Monday, April 15, 2024

नई दिल्ली: ऐक्टू से जुड़े ऐप कर्मचारी एकता यूनियन ने किया ब्लिंकिट प्रबंधन की गुंडई का विरोध

नई दिल्ली। देशभर में डिलीवरी करने वाली ऐप आधारित कंपनियों में से अग्रणी ‘ब्लिंकिट’ द्वारा लगातार अपने मजदूरों का शोषण जारी है। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) से संबद्ध ‘ऐप कर्मचारी एकता यूनियन’ ने ब्लिंकिट प्रबंधन द्वारा एक मजदूर की बेरहम पिटाई के खिलाफ मालवीय नगर थाने पर अपना विरोध दर्ज किया। गौरतलब  है कि ऐप आधारित डिलीवरी कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से मजदूरी में कटौती एवं काम से छटनी से परेशान वर्कर लगातार विरोध दर्ज कराते आए हैं। लेकिन न तो ये कंपनियां और न ही सरकार–प्रशासन इनकी मांगों को सुनने के लिए तैयार हैं।

कंपनी के गुंडे मजदूरी मांगने पर करते हैं ऐप कर्मचारियों की पिटाई

8 जनवरी को जब खिड़की गांव के नजदीक काम करने वाले ब्लिंकिट कर्मचारियों ने मजदूरी में कटौती को लेकर ब्लिंकिट के स्टोर मैनेजर से बात करने की कोशिश की तब कंपनी की ओर से बातचीत तो दूर, मजदूरों को डराया–धमकाया गया। आज यानि 9 जनवरी को सुबह-सुबह जब फिर से मजदूरों ने अपनी बात कहने की कोशिश की तब कंपनी प्रबंधन द्वारा गुंडों को बुलाकर मजदूरों की पिटाई की गई।

एक मजदूर श्याम (नाम बदला हुआ) को बुरी तरह से पीटा गया। मालवीय नगर थाने से आई पुलिस ने भी मजदूर की सुनने की जगह यूनियन पदाधिकारियों से ही बदतमीजी की। ऐप कर्मचारी एकता यूनियन ने मौके पर पहुंचकर पुलिस के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद यूनियन पदाधिकारी अपूर्वा शर्मा ने कहा कि ब्लिंकिट प्रबंधन और दिल्ली पुलिस द्वारा इस तरह से मजदूरों को सताया जाना सरासर गैरकानूनी और गलत है।

कई गुना मुनाफा बढ़ने के बावजूद, मजदूरी भुगतान में ब्लिंकिट कर रही है मनमानी कटौती

एक तरफ तो इन कंपनियों के मुनाफे में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है, दूसरी तरफ मजदूरों को हो रहे भुगतान में लगातार कटौती की जा रही है। ऐप कर्मचारी एकता यूनियन (ऐक्टू) की अपूर्वा शर्मा ने बताया कि यूनियन द्वारा ऐप कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों को ही चिट्ठी दी गई है पर दिल्ली सरकार इनकी मांगों पर किसी प्रकार की बातचीत के लिए तैयार नहीं है।

सरकार की चुप्पी के कारण ऐप-कंपनियां हर दिन मनमानी कर रही हैं। दिल्ली सरकार को इनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए यूनियन से बातचीत करनी चाहिए ताकि धड़ल्ले से चल रहे मजदूरों के शोषण पर रोक लग सके। ऐक्टू के राज्य सचिव सूर्य प्रकाश ने बताया कि देश की राजधानी दिल्ली में श्रम विभाग पूरी तरह से मालिकों का गुलाम हो गया है। मजदूरों द्वारा लगाए जा रहे वाद पर या तो कोई कार्रवाई ही नहीं होती या काफी टालमटोल किया जाता है। ऐप कर्मचारी एकता यूनियन के ही पदाधिकारी आयुष ने कहा कि यूनियन इस संघर्ष को आगे जारी रखेगी और आने वाले दिनों में सरकार और कंपनियों को हमारी मांगें माननी ही पड़ेगी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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