माले ने मोदी के खिलाफ किया निर्णायक लड़ाई का आह्वान, दीपंकर ने कहा- सरकारी कंपनियों को औने-पौने दामों में बेचने पर उतारू है सरकार

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पटना। भाकपा-माले के राज्य स्तरीय कार्यकर्ता कन्वेंशन को संबोधित करते हुए माले महासचिव ने मोदी सरकार को जमकर निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार फायदे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को औने-पौने दामों में बेचने पर उतारू है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश के सामने लोकतंत्र का संकट खड़ा हो गया है। इस मौके पर उन्होंने एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया।

माले महासचिव ने कहा कि मोदी-2 शासन में सब कुछ निजी कंपनियों के हाथों सौंपने की तैयारी चल रही है। मुनाफे में चलने वाली कंपनियों को भी बेचा जा रहा है। रेलवे, बीएसएनएल आदि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निगमीकरण/निजीकरण करने का हम पुरजोर विरोध करते हैं और इसके खिलाफ इन संस्थानों के कर्मचारियों के आंदोलन का स्वागत व समर्थन करते हैं।

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लोकतंत्र के सामने आने वाले संकट की तरफ इशारा करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा-आरएसएस संपूर्ण लोकतंत्र का निषेध कर देना चाहते हैं। हमने चुनाव के दौरान भी देखा और चुनाव बाद भी देख रहे हैं कि किस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं का गला घोटा जा रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने झूठा प्रचार चला कर व जनता को गुमराह करके चुनाव जीता है। जनता के असली सवाल वहीं के वहीं हैं।

उन्होंने कहा कि  ऐसे वक्त में जब भाजपा-आरएसएस का हमला बहुत ही तीखा है, कम्युनिस्ट होने के कारण भाजपा के खिलाफ सशक्त आंदोलन खड़ा करना हमारा दायित्व बनता है। हमने नारा दिया है – एकजुट रहो-मुकाबला करो।

उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद बिहार में सामंती-सांप्रदायिक-मनुवादी ताकतों का मनोबल सिर चढ़कर बोल रहा है। भोजपुर-बेगूसराय आदि इलाकों में दलितों, गरीबों और कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं व समर्थकों पर हमले व उनकी हत्या तक कर देने की घटनाओं केा अंजाम दिया जा रहा है।

कन्वेंशन में माले महासचिव ने मॉब लिंचिंग के सवाल को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश भर में भाजपाई उन्मादी ताकतों द्वारा सुनियोजित तरीके से मॉब लिंचिंग की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय पर एक बार फिर से हमला बोल दिया गया है। उन्होंने कहा कि कठोर कानूनों के जरिए नागरिकों के अधिकारों को खत्म करने की साजिश चल रही है।

उन्होंने कहा कि नीतीश शासन में महिलाओं के सशक्तीकरण की बात तो खूब की गई लेकिन पुलिस विभाग में भी महिलायें सुरक्षित नहीं है। वहां उनका जबरदस्त शोषण हो रहा है। आशा, आंगनबाड़ी, रसोइया के साथ-साथ आज हमें पुलिस को भी संगठित करने की जरूरत है। स्नेहा कांड इसका ज्वलंत उदाहरण है।

माले महासचिव ने कहा कि आज बिहार व देश में पेयजल का घोर संकट है लेकिन यह संकट देश के बड़े नेताओं, कॉरपोरेट घरानों के लिए नहीं बल्कि आम लोगों के लिए है। भोजन, राशन, शिक्षा की तरह मोदी सरकार पानी का भी निजीकरण कर देना चाहती है। 

हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि यदि आयुष्मान भारत जैसी योजनायें हैं तो फिर बिहार में चमकी बुखार से बच्चे क्यों मर रहे हैं? लोग बीमार पड़े तो उसी समय उसका इलाज हो जाना चाहिए।

इस मौके पर उन्होंने जनता की वैचारिक-राजनीतिक चेतना को उन्नत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के पास गलत प्रचार तेजी से पहुंचता है इसलिए हमें जनता के साथ और भी मजबूत व गहरा रिश्ता बनाने की आवश्यकता है।

कन्वेंशन की शुरूआत दिन में 12 बजे हुआ। सबसे पहले भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने कन्वेंशन का विषय प्रवेश रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के एक महीने के भीतर जो परिस्थितियां उभर कर सामने आई हैं, वे बेहद गंभीर हैं। कन्वेंशन को अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, विधायक महबूब आलम, भोजपुर जिला सचिव जवाहर लाल, अरवल जिला सचिव महानंद, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, सिवान से महिला नेता सोहिला गुप्ता आदि नेताओं ने संबोधित किया।

इस मौके पर कन्वेंशन की ओर से 7 प्रस्ताव पारित किए गए:

1. भाजपाइयों द्वारा सुनियोजित हिंसा व मॉब लिंचिंग का प्रतिवाद करने और जहां कहीं ऐसी घटनाएं होती हैं वहां के पुलिस -प्रशासन के अधिकारियों को दंडित करने की मांग की गई।

2. रेलवे, बीएसएएनएल व सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निगमीकरण/निजीकरण के किसी भी फैसले से सरकार दूर रहे।

3. कन्वेंशन में चमकी बुखार के जिम्मेवार स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की बर्खास्तगी की मांग दुहराई गई।

4. बिहार को सूखाग्रस्त घोषित करने व राहत कार्य चलाने की मांग की गई।

5. सामंती-सांप्रदायिक ताकतों के हमले का जोरदार विरोध करने का आह्वान किया गया।

6. महिलाओं के यौन उत्पीड़न व सामूहिक बलात्कार पर रोक लगाने की मांग की गई।

7. अरवल के माले नेता गणेश यादव व अन्य नेताओं को झूठे मुकदमे में फंसाकर आजीवन कारावास की सजा की निंदा की गई।

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