Tuesday, January 18, 2022

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बरसी पर विशेष: छोटे जीवन में बड़ी भूमिका निभा गए विनोद मिश्र

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी लिबेरेशन (सीपीआई एमएल) यानि भाकपा माले के दिवंगत संस्थापक महासचिव विनोद मिश्र को बहुत सारे लोग नहीं जानते हैं। जो जानते रहे उनमें से अधिकतर उन्हें शायद भूलते जा रहे हैं। वे 1975...

कैसा होगा सीपीसी का ‘आधुनिक समाजवाद’

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी अपने इतिहास के सौ साल पूरे कर चुकी है। कुछ महीने पहले यह शताब्दी समारोह मना लेने के बाद उसकी मौजूदा केंद्रीय समिति का छठां पूर्णाधिवेशन सत्र- प्लेनम या प्लेनरी सेशन- बीते बृहस्पतिवार, 10...

विश्व मानवता के लिए वरदान सोवियत अक्टूबर क्रांति

आज 1917 की महान रूसी क्रांति को एक सौ चारवीं वर्षगांठ हो चले हैं। 1917 में 07 नवंबर ही के दिन सोवियत रूस में महान वैज्ञानिक समाजवादी क्रांति संपन्न हुई और वहां की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा गरीबों – मजदूरों...

बाजारवादी समाजवाद के बाद साझा समृद्धि: अब कैसे दिखेगा चीन?

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की अगले महीने (8-11 नवंबर) एक विशेष बैठक होगी। खबरों के मुताबिक उसमें ‘इतिहास पर संकल्प-पत्र (resolution)’ को मंजूरी देगी। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पार्टी के इतिहास में इस संकल्प-पत्र का वही...

किसान आंदोलन तैयार कर रहा है बदलाव की नई जमीन

कल के टेलिग्राफ में प्रभात पटनायक का एक लेख है — A Promethian moment ( The farmer’s agitation challenges theoretical wisdom)। बंधन से मुक्ति का क्षण; किसानों के आंदोलन ने सैद्धांतिक बुद्धिमत्ता को ललकारा है। जाहिर है, यह किसान आंदोलन...

पीएम मोदी के नाम एक पूर्व माओवादी के बेटे का खत

भाकपा (माओवादी) के केन्द्रीय कमेटी सदस्य प्रमोद मिश्रा के पुत्र सुचित मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 27 जुलाई, 2021 को एक खुला खत लिखा है, जिसे 28 जुलाई को रजिस्टर्ड डाक से भी उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा है। मालूम...

बच्चे पालने के सवाल पर स्त्री और पुरुष के बीच पैदा हुआ पहला श्रम विभाजन

मानव विज्ञान में खुद को लगा देने का उनका संकल्प महज किसी बौद्धिक उत्सुकता का परिणाम नहीं था । इसका गहरा राजनीतिक-सैद्धांतिक मकसद था । गहन ऐतिहासिक ज्ञान के आधार पर वे वास्तविकता के सबसे करीब के उस क्रम...

चिली में वामपंथी ताकतों की जीत ने साफ किया जनपक्षीय संविधान के निर्माण का रास्ता

15-16 मई को दक्षिण अमेरिकी देश चिली में संविधान सभा के 155 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ था। रविवार 16 मई को मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू हुई। सोमवार 17 मई की शाम तक ज्यादातर नतीजे...

पूछता है भारत; काली टोपी नेकरधारी बटुक कहाँ हैं !!

चुनाव के बीच भी जब नरेंद्र मोदी दलबदल सहित बंगाल में कोरोना की घर-घर डिलीवरी करने में लगे थे तब चुनाव के बावजूद वहां की जनवादी नौजवान सभा, एसएफआई और जनवादी महिला समिति के रेड वालंटियर्स संक्रमण से पीड़ित...

बंगाल में हिन्दुत्वा-कारपोरेट वैचारिकी का सबाल्टर्न-मुखौटा कितना कारगर होगा?

बंगाल के चुनावी नतीजे चाहे जो हों लेकिन चुनाव प्रचार की रणनीति के स्तर पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे अनोखा प्रयोग किया है। उसका यह प्रयोग ‘राजनीतिक-पंडितों’ को ही नहीं, आरएसएस-भाजपा की राजनीतिक-धुरी समझे...
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पुस्तक समीक्षा: सर सैयद को समझने की नई दृष्टि देती है ‘सर सैयद अहमद खान: रीजन, रिलीजन एंड नेशन’

19वीं सदी के सुधारकों में, सर सैयद अहमद खान (1817-1898) कई कारणों से असाधारण हैं। फिर भी, अब तक,...
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