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अहमदाबाद के “शाहीन बाग” अजित मिल में भी शुरू हो गया लोगों का जमावड़ा, महिलाओं ने संभाली कमान

अहमदाबाद। देश भर में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। देश के कई शहर शाहीन बाग बनते जा रहे हैं अहमदाबाद के अजित मिल में चार दिन पहले एक तिरंगे के साथ जो धरना शुरू हुआ था अब उसकी कमान अहमदाबाद की महिलाओं ने संभाल लिया है। अब अजित मिल को अहमदाबाद का शाहीन बाग कहा जा रहा है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने धरना स्थल पहुंच कर नागरिकता कानून का विरोध किया।

कल से पहले महिलाएं केवल दिन में प्रदर्शन कर रही थीं लेकिन शुक्रवार से रात में भी महिलाएं धरने पर बैठ रही हैं। संख्या बढ़ जाने के कारण दो पंडाल बनाए गए हैं। अधिकतर  महिलाएं गृहणी हैं। नाज़िया बेन जो अगुवाई कर रही हैं, ने अपने संबोधन में कटाक्ष करते हुए कहा “मोदीजी आप अच्छे दिन का झांसा देकर आये थे  अब बता दो अच्छे दिन हमारे मरने के बाद आएंगे या आपके? कब आयेंगे?” शुक्रवार को वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी ने धरनास्थल पर बैठे लोगों को न केवल संबोधित किया बल्कि रात भर धरना स्थल पर ही बैठे रहे। मेवानी ने कहा “यह कानून मुस्लिम ही नहीं बल्कि देश विरोधी है।

हो सकता है मुसलमानों के पास काग़ज़ निकल आये लेकिन जंगल में रहने वाले आदिवासी, प्रकृति पूजक, नट, घुमंतू, छारा, मदारी इत्यादि के पास काग़ज़ कहां से आएंगे। गरीब मजदूर जो रोज़ाना पसीना बहाते हैं उनके पास पसीने के अलावा कुछ नहीं है।” मेवानी ने आगे कहा “मोदीजी मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री बन चुके हैं। अब उनकी महत्वकांक्षा है कि उनका पाठ सामाजिक विद्या विषय को किसी कक्षा में पढ़ाया जाए लेकिन इनकी यह ख्वाहिश नहीं पूरी होगी। नरेंद्र मोदी का नहीं शाहीन बाग का  पाठ पढ़ाया जायेगा।”

चंद लोगों द्वारा शुरू किए गए इस धरने में अब बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम भी शामिल हो रहे हैं। राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच, भीम आर्मी बामसेफ, आखिल भारतीय भील संगठन, जन संघर्ष मंच सहित ढेर सारे प्रोफेसर, वकील, छात्र, प्रोफेशनल्स शामिल हो चुके हैं। लंबे समय से सामाजिक मुद्दों की लड़ाई लड़ने वाली निर्जरी सिन्हा और भावना बेन ने धरने में शामिल महिलाओं से संवाद कर अपने तजुर्बे साझा किये। भावना बेन ऊना आन्दोलन में भी शामिल रही हैं। महिला सशक्तिकारण के लिए काम करती हैं। निर्जरी सिन्हा alt news के अलावा जन संघर्ष मंच की प्रमुख हैं।

शनिवार को गांधीनगर के विभिन्न विद्यालयों से शिक्षकों और छात्रों का प्रतिनिधिमंडल धरने में शामिल हुआ था। IIM, CEPT, गुजरात यूनिवर्सिटी के छात्र भी लगातार धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। रविवार को 30-35 युवाओं के साथ विकलांगों का एक प्रतिनिधिमंडल धरने के साथ एकजुटता दिखाने के मकसद से अजित मिल पहुंच कर काले कानून का विरोध किया।

सीपीआई और कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे का भी प्रतिनिधि मंडल आयोजकों से मिलकर समर्थन का ऐलान कर चुका है। आम आदमी पार्टी के शहर प्रमुख आन्दोलन में पहले दिन से शामिल हैं। SFI के नितीश मोहन और सोशलिस्ट पार्टी के जयंती पंचाल ने भी समर्थन दिया है। आंदोलन की कमान अब पूरी तरह से महिलाओं ने संभाल लिया है।

अहमदाबाद का शाहीन बाग कहे जाने वाले अजित मिल में आयशा जो जामिया आन्दोलन का चेहरा बनीं और उनके साथ जामिया के छात्र आन्दोलनकारी आसिफ इक़बाल भी शामिल होंगे। इसके अलावा गुजरात के अलग-अलग जिलों से भी आम जनता शामिल हो रही है।

आयोजक सूफियान राजपूत का कहना है “प्रगतिशील, दलित समाज, आदिवासी, महिला, वामपंथी, समाजवादी और गांधीवादी विचारों के लोग बड़ी संख्या में हमारे साथ जुड़ रहे हैं। गोदरेज सिटी घाटलोडिया जैसे इलाकों से हिंदू आ रहे हैं। अब यह आन्दोलन आम जनता का बन चुका है।”

अन्य आयोजक कलीम सिद्दीकी का कहना है अजित मिल का धरना बिल्कुल शाहीन बाग की तरह चल रहा है। जब तक शाहीन बाग की बहनें सड़क पर अहमदाबाद की आम जनता उनके साथ हैं। यह आन्दोलन अनिश्चित कालीन हैं। हमारी कामयाबी यह है कि हम आम महिलाओं के अलावा सभी समुदाय का समर्थन जुटा पाए।” नाज़िया परवीन जो गांधी नगर से रोज़ाना केवल धरने में शामिल होने आती हैं। कहती हैं “हम महिलाएं पूरी ताक़त से इस काले कानून के खिलाफ मोदी-अमित की नीतियों से लड़ेंगे”।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on January 19, 2020 11:11 pm

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