Saturday, January 22, 2022

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संपन्न हो गयी मिट्टी सत्याग्रह यात्रा, 350 शहीद किसानों के बने 5 शहीद स्मारक

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मिट्टी सत्याग्रह यात्रियों की ओर से डॉ. सुनीलम द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 132 दिन से दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में देश भर में मिट्टी सत्याग्रह यात्रा निकाली गई। यात्रा के माध्यम से तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने, सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल पर लोगों में जागरूकता पैदा की गई। उन्होंने बताया कि 30 मार्च से दांडी (गुजरात) से शुरू हुई मिट्टी सत्याग्रह यात्रा का समापन 06 अप्रैल को सिंघु बॉर्डर पर हुआ। यात्रा के दौरान 35 कार्यक्रम आयोजित किये गए। 23 राज्यों के 2500 गांवों से लाई गई मिट्टी से शाहजहांपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर (दो स्थान), गाजीपुर बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर 350 शहीद किसानों के स्मारक निर्मित किए गए।

शाहजहांपुर बॉर्डर पर आयोजित किए गए कार्यक्रम में योगेंद्र यादव, पूर्व विधायक अमराराम चौधरी टिकरी बॉर्डर पर जोगेंदर सिंह उग्राहा, इंद्रजीत सिंह, जसवीर कौर, गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैट, सिंघु बॉर्डर पर हनान मौला, सत्यवान सहित अनेक किसान संगठनों ने कार्यक्रमों को संबोधित किया।

शाहजहांपुर बॉर्डर पर बने स्मारक का निर्माण अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के कलाकार लालोन द्वारा, गाजीपुर और सिंधु बॉर्डर के स्मारक का डिजाइन पटियाला के कुलप्रीत द्वारा, टिकरी (मेट्रो स्टेशन) बॉर्डर के स्मारक का डिजाइन पश्चिम बंगाल के कलाकारों द्वारा तथा टिकरी (बहादुरगढ़) में शबनम हाशमी जी एवं साथियों द्वारा किया गया।

शाहजहांपुर, टीकरी और सिंगु बॉर्डर पर आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि मिट्टी सत्याग्रह यात्रा इस देश की कुर्सी (सत्ता) के लिए तीन सबक लाई है। पहला सबक, मिट्टी एक रंग की नहीं होती, इस देश को एक रंग में रंगना यहां की जमीन को कबूल नहीं होगा। दूसरा सबक, किसान के लिए मिट्टी मां के समान है, वह मिट्टी के लिए जान दे सकता है। तीसरा सबक, जो मिट्टी का मान नहीं रखेगा, वह मिट्टी में मिल जाएगा।

टीकरी बॉर्डर पर संबोधन में जोगेंदर सिंह उग्राहा जी ने कहा कि देश के लोगों को मिट्टी से जोड़ने की अपील करना आंदोलन का सबसे बड़ा हिस्सा है। देश में हर तरह की मिट्टी है। हर तरह की मिट्टी एक ही नाम से पुकारी जाती है कि मिट्टी हमारी मां है। मां शब्द मिट्टी के साथ जुड़ा हुआ है। जब-जब इस मिट्टी पर खतरा हुआ है, तब-तब मां के सपूत मैदान में आए हैं। तब उसका धर्म, उसकी जाति नहीं देखी जाती, उसका खून एक ही मिट्टी का होता है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि शहादत देने वाले जवान भी किसानों के ही बच्चे थे। जवान भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं और इस सरकार की नीतियों के कारण भाई-भाई का आपस में टकराव करवाया गया।  उन्होंने कहा कि यह शहीद स्मारक किसान और जवान की शहीदी को याद दिलाएगा। हमें अपनी पगड़ी, खेत और सीमा को संभालने की प्रेरणा देगा। हमारे पूर्वजों के बलिदान और देश को इतिहास के रूप में याद दिलाएगा।

जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की नेत्री सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि मिट्टी सत्याग्रह यात्रा देश के स्वतंत्रता आंदोलन और किसानों के वर्तमान आंदोलन को जोड़ती है। दांडी सत्याग्रह के माध्यम से एक चुटकी नमक उठाकर गांधी जी ने देश को जगाकर और जोड़कर साम्राज्यवादी हुकूमत को झुकाने में कामयाबी हासिल की थी। आज फ़ासीवादी सत्ता और कॉर्पोरेट का गठबंधन किसानी पर आक्रमण कर रहा है तब मिट्टी और जमीन बचाने के लिए यात्रा निकाली गई है। 12 मार्च से 06 अप्रैल तक  आज़ादी आंदोलन में शहीदों ने जो सपना देखा था उस सपने को धरती पर उतारने का संकल्प लेकर निकाली गई। जिसका मूल समता, न्याय और आत्मनिर्भरता था। निजीकरण और कॉरपोरेटीकरण के द्वारा विषमता और लूट बढ़ रही है। विकास के नाम पर अवैध दोहन, अधिग्रहण के द्वारा विस्थापन और हस्तांतरण का विनाश देश पर थोपा जा रहा है। मिट्टी-धरती को भी छीना जा रहा है। उससे देश की संपत्ति और आजीविका बर्बाद हो रही है। किसान आंदोलन के विचारों में जाति धर्म से ऊपर उठकर एकजुटता कायम करना, कंपनी राज का विरोध और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। इस सत्याग्रह से जल, जंगल, जमीन और पानी के जुड़े आंदोलनों, स्थानीय निर्माण एवम संघर्षों के जुड़े संगठनों को जोड़ा जाएगा।

डॉ सुनीलम ने कहा कि यात्रा गांधी जी और 1942 में और इमरजेंसी में जेल काटने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समाजवादी चिंतक डॉ. जीजी परीख जी की प्रेरणा से निकाली गई। उन्होंने कहा कि लाखों किसानों ने 132 दिनों में बोर्डरों पर जो नया भारत बसाया है वह समरसता, समता और संवेदनशीलता लिए हुए है। जहां हर एक व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकताओं का सामूहिक तौर पर इंतजाम किया जा रहा है, सम्मान दिया जा रहा है और हर महिला की सुरक्षा बिना पुलिस के सुनिश्चित की जा रही है। यह नया भारत मोदी जी के न्यू इंडिया से एकदम अलग है जहां अडानी, अम्बानी का मुनाफा सुनिश्चित करने के लिए किसानों को बर्बाद करने के लिए तीन कानून लाये गए हैं। जो घृणा, नफरत और हिंसा पर आधारित है।

समापन कार्यक्रम के दौरान सिंघु बॉर्डर पर सभी राज्यों से लाई गई मिट्टी को मिलाकर के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को सौंपी गई। दिल्ली में अनहद की शबनम हाशमी ने बताया कि इस मिट्टी से दिल्ली में एक प्रेरणा स्थल का निर्माण किया जाएगा।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा के पहुंचने पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड उड़ीसा, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के 75 यात्री शामिल हुए। 40 यात्री स्थायी तौर पर पूरी यात्रा में शामिल रहे।

उत्तराखंड से जबर सिंह वर्मा, उत्तर प्रदेश से जागृति राही,  प्रेम कुमार, पूनम पंडित, कर्नाटक से किरण कुमार विस्सा, बिहार से शाहिद कमाल, मध्य प्रदेश से एडवोकेट आराधना भार्गव, अमित भटनागर, दीपक शर्मा, महाराष्ट्र से सदाशिव मगदूम, बाबा नदाफ आदि के नेतृत्व में सैकड़ों प्रतिनिधि यात्रा में शामिल हुए।

सभी कार्यक्रमों को मेधा पाटकर, प्रफुल्ल सामंतरा,  फिरोज मीठीबोरवाला, शबनम हाशमी, गुड्डी, निश्चय, पूनम कनौजिया, लता प्रतिभा मधुकर ने संबोधित करते हुए मिट्टी बचाओ, जमीन बचाओ, संविधान बचाओ और देश बचाओ के नारे देते हुए मिट्टी सत्याग्रह के विचार और पृष्ठभूमि के संबंध में जानकारी दी तथा संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया। सभी कार्यक्रमो में नवीन मिश्रा जी तथा लोकायत की टीम द्वारा क्रान्तिगीत प्रस्तुत किये गए। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, किसान संघर्ष समिति, नर्मदा बचाओ आंदोलन, श्रमिक जनता संघ, लोकायत, हम भारत के लोग, राष्ट्र सेवा दल, युसूफ मेहेर अली सेंटर, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, घर बचाओ- घर बनाओ आंदोलन के यात्री पूरी मिट्टी सत्ताग्रह यात्रा में शामिल हुए।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित

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