भाकपा माले के राज्य सचिव कॉमरेड मनोज भक्त एवं पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्यएवं बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि राज्यों के हितों की अनदेखी करते हुए मोदी सरकार ने खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। यह विधेयक झारखंड जैसे खनिज-संपदा से समृद्ध राज्यों के अधिकारों और आर्थिक स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से राज्यों के खनिज एवं खनिज-युक्त भूमि पर अतिरिक्त कर लगाने के अधिकार को सीमित किया गया है। इसका सीधा असर राज्यों के राजस्व पर पड़ेगा। झारखंड जैसे राज्य, जहां की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, इस फैसले से गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि एक ओर केंद्र की मोदी सरकार केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी और अनुदान को लेकर लगातार कटौती तथा रोक लगाने का काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के अपने संसाधनों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने के अधिकार पर भी अंकुश लगाया जा रहा है। इससे राज्य सरकारों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, छात्रवृत्ति तथा ‘मंईयां सम्मान योजना’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं को चलाना और विस्तार देना कठिन होगा।
उन्होंने सवाल किया कि झारखंड के हितों की बात करने वाले भाजपा के सांसद इस विधेयक के पारित होने के समय सदन में चुप क्यों रहे? क्या वे झारखंड के खनिज और यहां की जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी पार्टी की सरकार के सामने आवाज नहीं उठा सकते थे?
भाकपा माले ने कहा कि यह केवल खनिज राजस्व का सवाल नहीं है, बल्कि राज्यों की संवैधानिक स्वायत्तता, संघीय ढांचे और राज्य सरकारों के अधिकारों पर हमला है। केंद्र सरकार को राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की नीति तत्काल वापस लेनी चाहिए।
भाकपा माले ने झारखंड सरकार और सभी जनवादी, लोकतांत्रिक एवं विपक्षी ताकतों से इस राज्य-विरोधी प्रावधान के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने तथा व्यापक जनप्रतिरोध खड़ा करने की अपील की है।