रांची के टैगोर हिल ओपेन स्पेस थियेटर मोरहाबादी में 19 मई 2024 को आदिवासी सरना समाज का धार्मिक-सामाजिक चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस धार्मिक सामाजिक चिंतन शिविर में प्रकृति पूजक आदिवासी समाज पर लगातार हो रहे हमले और सरना झंडा, सरना धर्म से जुड़े प्रतीकों/ चिन्हों के दुरुपयोग पर गंभीरता पूर्वक चर्चा की गई। इस चिंतन शिविर में विभिन्न आदिवासी संगठनों और सरना समिति के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर से सरना धर्म और समाज को मजबूत करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आदिवासी चिंतक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि प्रकृति पूजक आदिवासी आज विकट संकटों के दौर से गुजर रहा है। जंगल, जमीन व आदिवासी सम्मान पर चोट तो सदियों से जारी है। अब हमारी प्राकृतिक आस्था, विश्वास, पहचान और धर्म, सब पर चोट किया जा रहा है।
सरना सदान मूलवासी मंच के अध्यक्ष सूरज टोप्पो ने कहा कि आज सरना धर्म के झंडे और इसके प्रतीकों व चिन्हों से खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रमों और अवांछित जगहों पर सरना झंडा, कलशा और रंपा-चंपा जैसे धार्मिक प्रतीक चिह्नों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

कांके रोड सरना समिति के अध्यक्ष डब्लू मुंडा ने कहा कि आदिवासी सरना समुदाय की धार्मिक सामाजिक भावनाओं से खिलवाड़ करके संपूर्ण आदिवासी समाज को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी सरना समाज इस पर चिंतन मनन करें और निर्णय ले।
वीर बिरसा मुंडा स्मारक समिति के अध्यक्ष अशोक मुंडा ने कहा कि सभी धर्मों की तरह आदिवासी सरना धर्म का भी सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति पूजक सरना आदिवासी सभी धर्मावलंबियों का सम्मान करते हैं।
समाज सेवी संजय टोप्पो ने बताया कि धार्मिक सामाजिक चिंतन शिविर में सर्वसम्मति से इसके लिए एक समिति का गठन किया गया। जिसका नाम “आदिवासी सरना धर्म संरक्षण समिति” रखा गया है।
“आदिवासी सरना धर्म संरक्षण समिति” द्वारा कई प्रस्ताव लिए गए, जिसमें सामुदायिक व सार्वजनिक जगहों पर किसी भी तरह की धार्मिक-सांस्कृतिक और जमीन की अतिक्रमण पर अविलंब रोक लगाई जाए।

प्रकृति पूजक सरना धर्मावलंबी आदिवासी समुदाय के धार्मिक झंडे और इसके चिन्हों /प्रतीकों जैसे रंपा-चंपा, कलशा का प्रयोग किसी भी राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों और अवांछित जगहों जैसे किसी भी राजनेताओं-अधिकारियों के सम्मान और स्वागत में नहीं किया जाए।
प्रकृति पूजक सरना आदिवासियों की धार्मिक सामाजिक समुदाय के कायों के लिए चिन्हित जमीन जो किसी गांव व टोले की जमीनों , पहाड़, टोंगरी, नदी, जंगलों में वर्षों से स्थापित है। इससे सुरक्षित किया जाए।
इस कार्यक्रम में आदिवासी समन्वय समिति, सरना सदान मूलवासी मंच, कांके रोड सरना समिति, बिरसा मुंडा स्मारक समिति, 12 पड़हा कांके, नामकुम सरना समिति, आदिवासी युवा शक्ति, केंद्रीय पड़हा कांके, चिरोंदी सरना समिति, केंद्रीय सरना समाज अनगड़ा, बिरसा सेना आदि संगठनों के सदस्य शामिल थे।
कार्यक्रम में लक्ष्मीनारायण मुंडा, सूरज टोप्पो, डब्लू मुंडा, साधुलाल मुंडा, सहदेव मुंडा,अमित मुंडा, बहादुर मुंडा, संजय टोप्पो, अरुण पहचान, मोहन तिर्की, अशोक मुंडा, दरिद्र चंद्र पहान, जगेश्वर मुंडा, अशोक पहान, सधन उरांव, विकास तिर्की, शिवरतन मुंडा, सुनील होरो, मिथिलेश कुमार, शशि मुंडा, दिनेश मुंडा, सिकंदर मुंडा, विजय मुंडा, दिनकर कच्छप, राकेश दोहरा, विकास तिर्की और विक्की करमाली उपस्थित थे।
(झारखंड से विशद कुमार की रिपोर्ट)
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