2024 पेरिस ओलिंपिक में महिला 50 किलो फ्रीस्टाइल कुश्ती प्रतिस्पर्धा में फाइनल मुकाबले से पहले विनेश फोगाट का 100 ग्राम से ओवरवेट होने के कारण प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाने के बाद कल से ही पूरा देश सकते की स्थिति में है। आज विनेश ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से देश को सूचित कर दिया है कि वह खेल से सन्यास ले रही हैं। विनेश ने लिखा है,
“माँ, कुश्ती मेरे से जीत गई, मैं हार गई।
माफ़ करना आपका सपना, मेरी हिम्मत, सब टूट चुके।
इससे ज्यादा ताकत नहीं रही अब।
अलविदा कुश्ती 2001- 2024
आप सबकी हमेशा ऋणी रहूंगी माफ़ी”
विनेश फोगाट 53 किलो वर्ग की खिलाड़ी थीं, लेकिन उन्हें 50 किलो वर्ग में हिस्सा लेना पड़ा। ऐसा इसलिए, क्योंकि 53 किलो वर्ग में अंतिम पंघाल ने विश्व चैम्पियनशिप में जीत के बदौलत इसे तब अपने नाम करा लिया था, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया सहित कई पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक धरने पर बैठे हुए थे। ऐसा माना जाता है कि आमतौर पर सभी खिलाड़ी अपनी वेट कैटेगरी से 2-3 किलो ओवरवेट होते हैं। आम तौर पर विनेश का वजन भी 56-57 किलो रहता है। ऐसे में उसके लिए 50 किलो वर्ग भार में बने रहना ही अपने आप में एक कठिन चुनौती थी।
बहरहाल अप्रैल में 50 किलो वर्ग में दो मुकाबले जीतने के बाद क्वालीफाई करने वाली विनेश फोगाट ने जब 6 अगस्त को पेरिस ओलिंपिक का अपना सफर शुरू किया तो उस सुबह उसका वजन 49.9 किलो पाया गया था। एक के बाद एक उसने अपने तीनों मुकाबले जीतकर फाइनल में अमेरिकी खिलाड़ी सारा ऐन हिल्डरब्रांड के खिलाफ 7 जुलाई को गोल्ड मेडल के लिये मुकाबला करना था। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद विनेश 100 ग्राम वजन कम कर पाने में असफल रही।
टीम के साथ गये मेडिकल डॉक्टर दिनशा पारदीवाला के अनुसार, परसों शाम अपने तीनों मैच जीतने के बाद जब विनेश ने कुछ खाया पिया तो उसका वजन 52.700 किलो निकला, अर्थात कुल 2.8 किलोग्राम की वृद्धि हुई। टीम की चीफ डाइटीशियन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है, जबकि ओलिंपिक शुरू होने से पहले चीफ आहार विशेषज्ञ आराधना शर्मा के विभिन्न समाचार पत्रों में जमकर इंटरव्यू प्रकाशित हो रहे थे। अब कुछ हलकों में कहा जा रहा है कि आपका संबंध रिलायंस अस्पताल से है।
आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के बाद खिलाड़ी का वजन 200-400 ग्राम कम हो जाता है, क्योंकि जीतने के लिए उसे जी तोड़ मेहनत और ऊर्जा लगानी होती है। इस लिहाज से कहा जा सकता था कि एक बार के पेय और खाद्य पदार्थ लेने से विनेश का वजन तकरीबन 3 किलो बढ़ गया था।
फिलहाल तो पूरे देश में विनेश के डिसक्वालिफाई हो जाने को लेकर हजारों तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सिल्वर मेडल के लिए अपील से लेकर 50 किलो बनाम 53 किलो वर्ग में हिस्सा लेने, फाइनल में हिस्सा लेने से पहले आवश्यक सावधानी से लेकर टीम के साथ गये सपोर्ट स्टाफ, भारतीय कुश्ती संघ सहित दक्षिणपंथी ट्रोल आर्मी की भारत की बेटी के इस प्रकार से प्रतियोगिता से बाहर हो जाने पर ख़ुशी को लेकर तमाम तरह की प्रतिक्रिया आ रही हैं।
लेकिन हम उन सभी बाधाओं को एक पल भूलकर सिर्फ इसी एक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करें कि उस 12 घंटे में क्या हुआ, कैसे भूखी-प्यासी रहकर क्वालीफाई राउंड में विश्व विजेता और पिछली ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट जापान की सुसाकी युई, जिसका इससे पहले तक रिकॉर्ड 82-0 था, को परास्त किया और उसके बाद क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन की खिलाड़ी और सेमीफाइनल में क्यूबा की यूस्नेलिस गुजमान लोपेज़ को पटखनी देकर अपने लिए गोल्ड या सिल्वर मेडल में से एक पक्का कर लिया था।
लेकिन यह सब अब इतिहास हो चुका है। अमेरिका की सारा ऐन हिल्डरब्रांड सोने का तमगा हासिल कर चुकी हैं, जबकि सिल्वर मेडल पर क्यूबा की खिलाड़ी और ब्रोंज मेडल पर पिछली बार की विजेता और विनेश फोगाट से पहले राउंड में हारने वाली जापान की खिलाड़ी सुसाकी युई हासिल कर पाने में कामयाब रही हैं। इसका अर्थ है ब्रोंज और सिल्वर मेडल जीतने वाली खिलाड़ियों को विनेश फोगाट हरा चुकी थीं, और स्वर्ण पदक जीत चुकी अमेरिकी खिलाड़ी से उनका मुकाबला होना था। असल में विनेश ही इस 50 किलो वर्ग भार की वास्तविक विजेता थीं, लेकिन वह उससे हार गई, जिसे वह पिछले 4 महीने से आसानी से परास्त कर रही थी। वह था उनका वजन, लेकिन ऐन मौके पर वे 100 ग्राम वजन कम कर पाने से चूक गई।
ऐसा कैसे हो गया? पहले दिन की प्रतियोगिता खत्म होने के बाद विनेश फोगाट के वजन में अप्रत्याशित तौर पर करीब 3 किलो वजन कैसे बढ़ गया? भारतीय ओलंपिक संघ की टीम में मेडिकल डॉक्टर, फिजीशियन, आहार विशेषज्ञ और खिलाड़ी के कोच भी होते हैं। सबको पता होता है कि खेल के बाद शरीर में जो भी पानी की कमी है उसे पूरा करना आवश्यक है और साथ ही आवश्यक आहार देना होगा। लेकिन तरल पदार्थ तो वैसे भी अपना काम पूरा होने के बाद कम हो जाते हैं, या पसीना बहाने, व्यायाम और सन बाथ लेते रहने से आसानी से उड़न छू हो सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पूरी रात भर विनेश फोगाट वजन कम करने पर काम करती रहीं। यहाँ तक कि सुबह जब वजन मापने का समय करीब आया तो विनेश के सिर के बाल भी काटने पड़े और हल्के से हल्के वस्त्र पहनकर वजन को 50 किलो के भीतर रखने का हर संभव प्रयास किया गया।
क्या 3 बार की ओलंपिक खिलाड़ी के लिए यह कहा जा सकता है कि उसने अगले दिन की परवाह किये बिना ही इतना सारा खाना ठूंस लिया कि वह फिर अपने वजन को 50 किलो लिमिट में ला पाने में नाकामयाब रही? क्या यह संभव हो सकता है? 29 वर्षीय विनेश फोगाट, जिसे संभवतः किसी भी भारतीय खिलाड़ी से कहीं अधिक ओलंपिक मेडल की आस रही, उसके बारे में ऐसा सोच पाने की भी कल्पना करना असंभव है। फिर यह भी जानना आवश्यक है कि किसी खिलाड़ी के लिए टीम की आहार विशेषज्ञ और कोच सहित मेडिकल टीम की निगरानी में ही कुछ भी खाद्य पदार्थ लेने का नियम लागू होता है। वो भी उस खिलाड़ी के लिए जिसे अगले दिन फाइनल मुकाबले में हिस्सा लेना हो, यह सब सोच पाना भी संभव नहीं है। इस खिलाड़ी ने अपने पसंदीदा वेट कैटेगरी में कुश्ती स्पर्धा में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी, जिसे नकार दिया गया।
उसे पता था कि उसके पास 50 किलो वर्ग में ही अपनी प्रतिभा को साबित करने का मौका है। उसने पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से अपमान और जिल्लत की जिंदगी को जिया था। उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी जीत और हार, दोनों ही मामलों पर देश में भारी प्रतिक्रिया होने जा रही है। कुश्ती महासंघ के भीतर की राजनीति की सफाई करने और महिला खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ने, दिल्ली पुलिस के जूतों के नीचे की कुचलन को महसूस करने वाली लड़की के पास साबित करने के लिए सिर्फ एक मौका था, और वह 12 घंटे के लिए अपनी भूख को बर्दाश्त नहीं कर पाई? ऐसा कोई घामड़ इंसान या नफरत से घिरा भक्त ही सोच सकता है।
फिर बड़ा सवाल ये उठता है कि किसी भी तरल पदार्थ का सेवन करने से तत्काल वजन तो बढ़ सकता है, लेकिन उसे आसानी से कम भी किया जा सकता है। बच जाता है ठोस पदार्थ, तो वो भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के व्यायाम, वेट लिफ्ट इत्यादि साधनों को अपनाने से वापस यथास्थिति तक पहुंच सकता है। फिर एक डाइट लेने से, उसके बाद कड़ी मेहनत के बावजूद विनेश इसे संभव कैसे नहीं कर पाई? सभी खिलाड़ी बचपन से ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के कारण जानते हैं कि स्पर्धा से पहले वजन नापने की मशीन पर खड़े होते समय आपका वजन पर्मिसबिल लिमिट के भीतर रहना चाहिए, फिर उसके बाद आप जितना मर्जी आहार ले सकते हैं, कोई नहीं पूछने वाला है। विनेश के सामने भी स्थिति स्पष्ट थी कि एक बार वजन मापने के बाद उसके पास फाइनल खेलने से पहले 12 घंटे का समय है, जिसमें वह आवश्यक डाइट को लेकर जो भी क्षति है उसकी भरपाई कर सकती है।
फिर ये सवाल भी अवश्य पूछा जाना चाहिए कि भारतीय कुश्ती संघ का अध्यक्ष कौन है? क्या वर्तमान कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह वही इंसान नहीं हैं, जिनकी जीत के बाद आंदोलनरत खिलाड़ियों ने भारी विरोध किया था? इस जीत के बाद, यह तथ्य सबके सामने शीशे की तरह साफ़ हो गया था कि संजय सिंह असल में उसी गुट के आदमी हैं, जिसके सरगना और पूर्व कुश्ती संघ के अध्यक्ष, भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उनकी जीत के बाद छूटते ही कहा था, दबदबा था, है और रहेगा।
देश के तमाम समाचार पत्रों में इस बारे में अपने-अपने निष्कर्षों के साथ स्टोरी प्रकाशित हुई है। लाखों भारतीय इस धक्के से अभी भी उबर नहीं पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल से इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा है, “IE की इस स्टोरी को पढ़ें और जानें कि सेमीफाइनल में जीत के बाद फोगाट का वजन कैसे बढ़ गया। भारतीय अधिकारियों ने उन्हें कुछ ORS दिया जिससे उनका वजन 52.7 किलोग्राम हो गया! उन्हें उम्मीद थी कि वह रात भर में 2.7 किलोग्राम वजन घटा लेंगी, जिसके लिए उन्हें पूरी रात कसरत करनी पड़ी!
लापरवाही! जानबूझकर?”
कल संसद के दोनों सदनों में विनेश फोगाट के फाइनल मैच से डिसक्वालिफाई कर दिए जाने पर विपक्ष की ओर से सवाल किये गये, जिसका अंततः खेल मंत्री के द्वारा जो जवाब दिया गया, वह बेहद शर्मनाक था। बीजेपी की सांसद हेमा मालिनी का बयान भी कम शर्मनाक नहीं था, जिसमें वे महिलाओं के लिए 100 ग्राम कम करने के महत्व के बारे में बताती हुई, आखिर में यह कहती हैं कि अब तो जो होना था, सो हो गया! भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो किसी भी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों के कांस्य पदक जीतने पर भी झट फोन कर उसका प्रसारण करवाने से नहीं चूकते, उनके द्वारा भारत के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय महिला खिलाड़ी के फाइनल मुकाबले में पहुँचने की खबर पर एक भी ट्वीट का न करना, अपने आप में संदेह पैदा करता है। लेकिन कल प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, तब जब विनेश फोगाट को स्पर्धा से बाहर कर दिया गया था।
आज संसद में एक बार फिर से इस विषय पर हंगामा हुआ और राज्य सभा का विपक्ष ने बहिष्कार किया है। टीएमसी ने सरकार से विनेश फोगाट को भारत रत्न देने या राज्य सभा का सदस्य मनोनीत करने की है। मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व के सबसे मजबूत देशों में एक गिना जाने लगा है, ऐसे में विपक्ष ही नहीं आम भारतीय भी मांग करते देखे गये कि यूक्रेन युद्ध रुकवा देने वाले मोदी जी अगर चाहते तो ओलंपिक संघ पर दबाव डालकर फाइनल में पहुंच चुकी भारत की बेटी को सिल्वर मेडल तो दिलवा ही सकते थे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्रधान मंत्री ने पेरिस गये अपने स्क्वाड से ओलंपिक संघ के समक्ष गुहार लगाने के निर्देश दिए, जिसका उसने पालन किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
क्या विनेश फोगाट की जीत और हार पर देश दो ध्रुवों में बंटा हुआ है? क्या विनेश फोगाट का अपराध यह था कि कुश्ती के खेलों में हिस्सा लेने वाली बेटियों के साथ खेलों से जुड़े पदाधिकारियों (जो अक्सर राजनीति में होने की वजह से इस पद पर आसीन होने में कामयाब रहते हैं) की घृणित हरकतों और बलत्कृत तक होने की सीमा तक पहुँचने का सड़क पर उतरकर विरोध कर रही थीं?
विनेश ने यह लड़ाई अपने लिए और नई पीढ़ी की महिला पहलवानों के लिए लड़ी थी, जिसकी उसे पहले ही भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। टोक्यो ओलंपिक और उससे पहले भी उसके बारे में कुश्ती संघ के प्रमुख की टिप्पणियाँ सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं। 140 करोड़ वाले देश में महिला पहलवानों की सफलता को देखकर, हरियाणा जैसे पितृसत्तात्मक राज्य में माता-पिताओं ने अपनी बेटियों को खेलों में आगे करना शुरू कर दिया था, जो अब फिर से खत्म होने लगा है।
सोशल मीडिया में विनेश फोगाट के खिलाफ नफरती चिंटुओं की कमी नहीं है। उनके विचारों को देखने के बाद तो लग ही नहीं रहा है कि ये किसी भारतीय खिलाड़ी के खिलाफ भी ऐसा सोच सकते हैं, क्योंकि ऐसी नफरती भाषा का प्रयोग तो इनके द्वारा अक्सर पाकिस्तान और उनके खिलाड़ियों के प्रति देखने को मिला करता था। भाजपा की तरफ से यदि किसी एक नेता ने खुलकर विनेश फोगाट मामले में बोला है तो वो हैं पूर्व मुक्केबाज, बिजेंद्र सिंह। उन्होंने साफ़ कहा है कि इसमें उन्हें साजिश की बू नजर आती है, और यदि विनेश को उसका वाजिब हक नहीं मिलता है तो भारतीय स्क्वाड को बिना समय गंवाए पेरिस ओलिंपिक का बहिष्कार कर देना चाहिए, क्योंकि हमारे पास पाने के लिए कुछ भी खास नहीं है।
हमारी सरकार और उनसे जुड़े खिलाड़ियों से नेता बन चुके व्यक्तित्वों से बेहतर तो 6 बार के विश्व विजेता और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अमेरिकी पहलवान जोर्डन बरोज का विनेश फोगाट के समर्थन में उतरना जख्मों पर मरहम का आभास दिलाता है। जोर्डन ने एक्स पर एक के बाद एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि विनेश को बेहद मामूली अंतर के कारण स्पर्धा से बाहर कर दिया गया है। जानते हैं यह कितना छोटा सा है?
नहाने की एक बट्टी साबुन जितना, 1 किवी या 2 अंडे या 100 पेपर क्लिप जितना। जोर्डन ने भारतीय एथलीट के लिए सिल्वर मेडल की मांग की है, लेकिन उन्होंने अमेरिकी खिलाड़ी के इसी केटेगरी में गोल्ड मेडल का लुत्फ़ भी उठाया है। जोर्डन को पता था कि यदि विनेश के साथ मुकाबला होता तो बहुत संभव था कि अमेरिका गोल्ड जीतने से चूक जाता। लेकिन यही तो असली खेल भावना है। तो क्या हमारे देश के कर्णधार इसे कभी सीख सकेंगे? अगर ऐसा संभव हो पाता तो बहुत संभव था कि विनेश 53 किलो भार वर्ग में खेल रही होती, या 50 किलो भार वर्ग में ही एक सोने का तमगा भारत को अब तक मिल चुका होता।
(रविंद्र पटवाल जनचौक की संपादकीय टीम के सदस्य हैं।)
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