Subscribe for notification

दबंगों के सामने लाचार सरकार : महिला और मानवाधिकार संगठनों ने जताई हैरानी

जनचौक ब्यूरो

वोट का गणित और सामाजिक आधार का खेल

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के रिश्ते में है पीड़िता का परिवार

हार्दिक पटेल ने भी किया दौरा


भावनगर (गुजरात)

कौन हैं आरोपी और क्या है उनका रसूख

भावनाबेन बलात्कार और हत्या की घटना के मुख्य आरोपी भावेश, अमरो और विक्रम हैं लेकिन पकड़ने की जगह पुलिस उन्हें बचाने में जुटी है।

आरोप है कि इसके एवज में पुलिस ने आरोपियों से तीन करोड़ रुपये की रिश्वत ली है। इस बात को मामले के मुख्य गवाह धीरूभाई गुजराती खुदकुशी से पहले दिए अपने बयान में भी कहते हैं।

तीनों आरोपी अहीर समाज से आते हैं और पहले भी इस प्रकार के अपराध कर चुके हैं। बताया जाता है कि इस तरह के 17 लड़कों का गैंग है जो इलाके की महिलाओं और लड़कियों का अपना निशाना बनाता है।

इलाके में अहीर समाज का वर्चस्व

दरअसल इलाके में अहीर समाज का वर्चस्व है और कहा जाता है कि पाटीदारों की संख्या कम होने के चलते उनके लोग सबसे ज्यादा उत्पीड़न का शिकार होते हैं।

यही वजह है कि प्रताड़ित होने वालों में सबसे ज्यादा पाटीदार समुदाय से जुड़ी लड़कियां और महिलाएं हैं।

घटनास्थल का दौरा करके आए लोगों का कहना है कि इलाके की ज़्यादातर महिलाएं परेशान हैं। इनके भय से गांव की लड़कियों ने स्कूल और कॉलेज जाना बंद कर दिया है।

इस गांव में लगभग तीन सौ पाटीदारों के घर थे लेकिन इनके भय और प्रशासन की ढील और लापरवाही के कारण लगभग 200 पाटीदार परिवार गांव छोड़कर सूरत शहर में बस गए।

अब अब केवल 100 पाटीदार परिवार मांडवी गांव में बचे हैं जिनके कारण अहीर समाज के गुंडा तत्वों ने इन परिवारों के सदस्यों का जीवन नरक बना रखा है। इज्जत के कारण बहुत सारी घटनाएं सामने ही नहीं आती हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि बलात्कार की शिकार भावनाबेन खेमी रिश्ते में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघानी की पत्नी की चचेरी बहन हैं। बावजूद इसके प्रशासन पूरे मामले की लीपापोती में लगा हुआ है।

आरोपियों को मिला है राजनीतिक संरक्षण

पाटीदार ग्रुप का कहना है कि आरोपियों को राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है जिसके कारण पुलिस असली आरोपियों को  नहीं पकड़ रही है। दरअसल भावनगर के इलाके में पिछड़ों का वर्चस्व है संख्या से लेकर धन-बल के क्षेत्र में उनका दबदबा है। पूरे प्रदेश में पाटीदार समुदाय के लोगों का दबदबा होने के बावजूद यहां उनकी स्थिति बहुत खराब है। लिहाजा पूरा मामला और सामाजिक आधार, वोट और उसकी राजनीति से जुड़ा हुआ है।

बीजेपी अध्यक्ष के रिश्ते में है पीड़िता

सूबे के पाटीदार पहले बीजेपी के सामाजिक आधार हुआ करते थे। लेकिन पाटीदारों के अनामत आंदोलन और उसके बर्बर दमन के बाद उसका बड़ा हिस्सा बीजेपी से नाराज है। ऐसे में बीजेपी का अब पाटीदारों की जगह पिछड़े वोट बैंक पर ज्यादा भरोसा है। लिहाजा पिछड़े समुदाय से आये इन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का मतलब होगा उस समुदाय को नाराज करना। यही वजह है कि सरकार की तरफ से निर्णायक कार्रवाई की जगह हीला-हवाली की गयी। मामला सीधे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा होने के बावजूद इस मामले में कुछ नहीं किया जा पा रहा है। गरियाधार विधानसभा में संख्या के साथ-साथ अहीर समाज के लोगों का दबदबा है। गांव के लोगों का कहना है कि जीतू भाई वघानी अपने भविष्य की राजनीति देख रहे हैं जिसका लाभ आरोपियों को मिल रहा है।

महिला और मानवाधिकार संगठनों का दौरा

घटना के बाद आम आदमी की महिला विंग की प्रमुख वंदनाबेन पटेल और सुखदेव पटेल के साथ पीयूसीएल के एक प्रतिनिधिमंडल ने मांडवी का दौरा किया। इन लोगों ने पीड़ित परिवार से मिलकर अपनी संवेदना जताई। वंदनाबेन ने इसे बेहद शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा जब किसी का शव 10-10 दिन तक न्याय के इंतजार में पड़ा हुआ हो। उन्होंने कहा कि अगर सरकार बलात्कार के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही पीड़ितों की मांग नहीं मानती है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा। सुखदेव पटेल का कहना है कि बड़े शर्म की बात है कि परिवार को मृत शरीर को कोल्ड स्टोरेज में रख कर सरकार से न्याय की मांग करनी पड़ती है। आज 10 दिन हो गए अभी तक धीरू भाई की अंतिम विधि पूरी नहीं हुई न ही सरकार से किसी प्रकार मुआवजा या न्याय का भरोसा मिला है।

हार्दिक पटेल का दौरा

सोमवार को पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने भी मांडवी का दौरा किया। दरअसल खुदकुशी करने वाले धीरूभाई और हत्या और बलात्कार की शिकार भावनाबेन दोनों पाटीदार समुदाय से हैं। ऐसे में इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। और मामले के प्रदेश व्यापी रूप लेने की संभावना भी बढ़ गयी है।

पुलिस का उत्पीड़न से इंकार

भावनगर के रेंज आईजी जो इस केस की जांच कर रहे हैं का कहना है कि पुलिस द्वारा धीरूभाई के साथ किसी प्रकार की मारपीट या दबाव नहीं बनाया गया। उन्होंने आत्महत्या की है जिसके लिए पुलिस जिम्मेदार नहीं है।

धीरूभाई की पत्नी की भी पिटाई

मृत धीरूभाई की पत्नी का कहना है महिला पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की है। उनके पति को आये दिन पुलिस थाने ले जाती थी उनके साथ मारपीट कर कुछ लोगों के खिलाफ झूठी गवाही देने का दबाव बनाती थी।

पुलिस की कार्यशैली पर कोर्ट को भी शंका है जिस वजह से न्यायालय ने दो बार पंचनामा करने का आदेश दिया।

कहना गलत न होगा कि गुजरात पुलिस का ये असली चेहरा है जहां रिश्वत लेकर हत्या और बलात्कार के आरोपी बदल दिए जाते हैं और फिर उनकी जगह दूसरे गरीब-मजदूरों को आरोपी बनाकर जेल में ठूंस देने की कोशिश होती है। और इस कड़ी में गवाह से लेकर दूसरे लोगों को अपना बयान बदलने के लिए कदर प्रताड़ित किया जाता है कि वो खुदकुशी के लिए मजबूर हो जाएं।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on November 5, 2018 6:34 am

Share