हरेन पांड्या हत्याकांड में नया खुलासा, गवाह ने कहा- पूर्व आईपीएस अफसर वंजारा ने दी थी हत्या की सुपारी

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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/मुंबई। गुजरात के पूर्व गृहमंत्री एवं बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हरेन पांड्या हत्या कांड ने एक बार फिर से गुजरात की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मुम्बई कोर्ट में राजस्थान के गैंगस्टर आज़म खान ने जज के सामने गवाही में कहा है कि “पूर्व गृहमंत्री हरेन पांड्या की हत्या की सुपारी सोहराबुद्दीन शेख़ को डीजी वंजारा ने दी थी। सोहराबुद्दीन शेख़ ने हैदराबाद के कलीमुद्दीन शाहिद को साथ मिलाकर पांड्या की हत्या को अंजाम दिया था।”

शनिवार को कोर्ट में दिए अपने बयान में आजम ने कहा कि ये बात उसे सोहराबुद्दीन ने बतायी थी। उसने बताया कि इस बात को उसने 2010 में सीबीआई जांच के दौरान भी उसके अफसरों को बतायी थी लेकिन उन्होंने बयान के तौर पर उसको दर्ज करने से इंकार कर दिया था। आजम खान का कहना था कि “एक बातचीत के दौरान सोहराबुद्दीन ने मुझे बताया था कि नईम खान के साथ उसने और शाहिद रामपुरी ने गुजरात के गृहमंत्री हरेन पांड्या (तब के गुजरात के गृहमंत्री) की हत्या का कांट्रैक्ट लिया था और उन लोगों ने उनकी हत्या कर दी। मुझे दुख का अहसास हुआ और मैंने सोहराबुद्दीन को बताया कि उन लोगों ने एक सही आदमी को मार दिया। सोहराबुद्दीन ने मुझे बताया कि उसे कांट्रैक्ट वंजारा ने दिया था।” खान ने ये भी कहा कि सोहराबुद्दीन ने उसे बताया था कि “ऊपर से ये काम दिया था।”

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सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर केस मामले में वंजारा को आरोपी नंबर-1 बनाया गया था और 1 अगस्त 2017 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

आगे पूछताछ में जब खान से पूछा गया कि उसने सीबीआई के सामने इस तथ्य को क्यों नहीं दर्ज कराया। इस पर उसने कहा कि उसने सीबीआई अफसर एनएस राजू को ये बात बतायी थी। खान ने कोर्ट से कहा कि “मैंने सीबीआई अफसर को बताया था कि हरेन पांड्या की हत्या सोहराबुद्दीन के इशारे पर तुलसीराम प्रजापति और एक लड़के ने की थी। जब मैंने उनको (राजू) हरेन पांड्या के बारे में बताया तो ‘उन्होंने बोला नये बखेड़े में मत डालो’।”

उसने ये भी बताया कि गुजरात में 2002 में हुए दंगों के बाद पांड्या ने समुदायों को एक साथ लाने में मदद की थी। और उसने सोहराबुद्दीन को कहा था कि उनकी हत्या नहीं होनी चाहिए थी। खान ने कोर्ट को बताया कि “मैं बेहद बुरा महसूस किया और सोहराबुद्दीन का साथ छोड़ देने का मन बना लिया था।”

गौरतलब है कि पांड्या की 26 मार्च 2003 को हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में गुजरात की ट्रायल कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराकर उसमें 9 को उम्र कैद की सजा सुना दी थी। हालांकि 2011 में गुजरात हाईकोर्ट ने उन सभी को बरी कर दिया था। उनके बरी होने के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

आज़म ने अपने निवेदन में आगे बताया कि “हमीद लाला केस में उसकी गिरफ़्तारी मोडासा से हुई थी जेल में रहते समय उसकी मुलाक़ात तुलसी प्रजापति से हुई थी। उस समय प्रजापति उसके सामने खूब रोया था। रोते-रोते प्रजापति ने बताया था कि डीजी वंजारा ने धोखा दिया है राजनैतिक दबाव के कारण पुलिस द्वारा सांगली जाते समय सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी गई है।”

गुजरात पुलिस और सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया था कि यह हत्या राजस्थान के मार्बल व्यापारियों के इशारे पर की गई है। आज़म के अदालत में  दर्ज कराये गए इस बयान से सीबीआई की चार्जशीट झूठी साबित हुई है। पांड्या केस में पकड़े गए सभी आरोपी हाईकोर्ट से छूट गए हैं हरेन पांड्या की पत्नी जागृति पंड्या भी भाजपा में हैं और इस समय बाल एवं महिला कल्याण मंत्रालय की चेयरमैन हैं। आज़म द्वारा कोर्ट में दिए गए निवेदन पर वंजारा ने कहा कि “यह मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए मेरा टिप्पणी करना ठीक नहीं है।”

आप को बता दें कि सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई (ट्रायल) मुम्बई सीबीआई जज एसजे शर्मा कर रहे हैं। ट्रायल के दरमियान राजस्थान के गैंगस्टर और सोहराबुद्दीन एवं तुलसी प्रजापति के मित्र आज़म का निवेदन लिया गया आज़म खान के निवेदन में यह बड़ा खुलासा हुआ है।

सोहराबुद्दीन को नजदीक से जानने वाले उसको पुलिस का मुखबिर ही मानते हैं। सोहराबुद्दीन अभय चूडास्मा का मुखबिर था। चूडास्मा की भी इस केस में गिरफ़्तारी हुई थी। बताया जाता है निष्पक्ष जांच होने पर पांड्या, प्रजापति और सोहराबुद्दीन हत्या केस में पुलिस और भाजपा के कई बड़े नेताओं का नाम खुल सकता है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सोहराबुद्दीन केस में गिरफ्तार किया गया था बाद में कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।

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