कांग्रेस समेत 12 दलों ने दिया उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस

कांग्रेस समेत 12 दलों ने उप सभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। कांग्रेस ने कहा कि आज जिस तरह से बिल पास किया गया है, वह लोकतंत्र की हत्या है। इतिहास में आज का दिन काली स्याही से लिखा जाएगा। पार्टी ने इन बिलों को किसानों को बर्बाद कर देने वाला और संघीय ढांचे के खिलाफ कहा है। साथ ही इसे संविधान की मूल भावना से छेड़छाड भी बताया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने पत्रकारों से कहा कि 12 पार्टियों ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है, क्योंकि जिस तरह से बिल को पास किया गया, सदन में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गई हैं और लोकतंत्र की हत्या की गई है। हमने कहा था कि आज सदन की कार्रवाई स्थगति करिए, कल बाकी मंत्री जवाब देंगे और उस पर डिवीजन भी होगा, वो बात तो नहीं मानी, हम समझ सकते हैं, लेकिन उसके साथ-साथ जो हमने डिवीजन की मांग की थी, वो भी नहीं मानी। वोटिंग अलाउ नहीं किया। उनका जो आज रवैया था उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है।

उन्होंने कहा कि आज जो बिल पास किया गया है और केंद्र सरकार जो कानून लाने जा रही है, वो न सिर्फ किसानों के विरोध में है बल्कि संघीय ढांचे के खिलाफ भी है। कृषि राज्यों का विषय है और एक कंकरंट (Concurrent) लिस्ट में है, जो राज्य का विषय है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी की वजह से राज्य पहले से ही परेशान हैं और उनके जो रेवेन्यू हैं, वो कम करने की कोशिश की गई है। संविधान की जो स्पिरिट है, सरकार ने उस पर प्रहार किया है, क्योंकि जो राज्य का विषय था ट्रेडिंग के नाम पर, केंद्र सरकार ने एक कानून पास करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार जो एक्वीजिशन एक्ट (Acquisition Act) लाई थी, उस पर काफी हंगामा हुआ था, किसान भी काफी नाराज थे। सरकार को उसे वापस लेना पड़ा था। सरकार जमीनों को कॉर्पोरेट को देना चाहते थी, वो जब नहीं कर पाए, तो कई स्टेट में फिर से कानून ले आए। अहमद पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के खेत और जमीन कॉर्पोरेट सेक्टर को देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि एपीएमसी को खत्म करने की कोशिश हो रही है। एमएसपी को भी धक्का पहुंचेगा। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मिनिमम सपोर्ट प्राइस को मैक्सिमम सेलिंग प्राइस देंगे, यह बात बिल्कुल गलत और तथ्यहीन है। अहमद पटेल ने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ जो आरोप लगा रहे हैं कि इनके मैनिफेस्टो में भी एपीएमसी को खत्म करने की बात की गई है, वो बिल्कुल डिस्टोर्ट करने की कोशिश है। काफी मेहनत करके हमारे चुनावी घोषणा पत्र को पढ़ने की ज़रूरत है, लेकिन आधा-अधूरा उन्होंने पढ़ा हुआ है और जो चुनावी घोषणा पत्र में हमने बात की है, एपीएमसी की बात की है, तो उसके साथ-साथ हमने किसानों के लिए सेफ गार्ड भी रखे हुए हैं, कम से कम 22 प्वाइंट है। 20 मुद्दों की बात नहीं करते हैं, सिर्फ दो मुद्दों की बात करते हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने आज उसी पर संसद में कहा कि हमने जो सेफ गार्ड रखे हैं, क्या आप वो सेफ गार्ड किसानों को देने के लिए तैयार हैं, कोई जवाब नहीं आया और चाहे कुछ भी कह दे ये सरकार, प्रधानमंत्री चाहे कुछ भी प्रचार कर लें, आज का दिन बड़ा महत्वपूर्ण है किसानों के लिए। आज का दिन काली स्याही से लिखा जाएगा। ये जो भी बिल पास हुआ है और जो कानून आएगा, वो किसानों के हित के विरोध में है। इसी बहाने से खेती कॉर्पोरेट सेक्टर को सौंपना चाहते हैं, एमएसपी नहीं मिलेगा। लोग परेशान होंगे। किसान परेशान होंगे। एसडीएम को जो अधिकार दिए हैं, पता नहीं कहां जाना पड़ेगा किसानों को। तो किसानों की जो भी तकलीफ है, मुश्किलात हैं, वो बढ़ेंगी।

राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि हाउस में मैंने कहा कि ये वारंट ऑफ डेथ था किसानों का। विशेष तौर से पंजाब, हरियाणा और वेस्टर्न यूपी के जो किसान हैं, उन्होंने 55 साल इस देश के गरीबों का पेट पाला है। सरकार का यह रवैया बहुत अफसोसनाक है। एक तरफ तो हम कोरोना से जूझ रहे हैं। एक लाख से ज्यादा लोग हर रोज बीमार हो रहे हैं, दूसरी तरफ चीन के साथ वार जैसी सिचुएशन है। 50 हजार हमारे नौजवान वहां गलवान वैली में हैं, ये जरूरत क्या थी आज के दिन की? न इनके कृषि मंत्री ने स्टेक होल्डर से बात की, स्टेक होल्डर किसान है, स्टेक होल्डर 245 किसान जत्थे-बंदियां हैं। यह आज हजारों की तादाद में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में सड़कों पर हैं, उनके साथ बात करनी थी। आपने तो हरसिमरत कौर से बात कर ली, सुखबीर सिंह से बात कर ली और चौटाला से कर ली, चौटाला रह गए, बादल छोड़ गए।

वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 2006 में सबसे पहले बिहार में एपीएमसी एक्ट समाप्त किया गया था और उसके बाद की जो स्थिति है बिहार की उसे देखा-समझा जा सकता है। पूरे देश में बिहार के किसान सबसे ज्यादा डिस्ट्रेस सेल में अपना अनाज बेचते हैं। हर साल हजारों गाड़ियां ट्रकों से लदकर, चावल-गेहूं बिहार से निकलकर और पंजाब और हरियाणा की मंडियों में आता है। ट्रेडर्स मुनाफाखोरी करते हैं। किसानों की पॉकेट में जो न्यूनतम समर्थन मूल्य जाता था, वो ट्रेडर्स की पॉकेट में जाता है। जो रूरल इकॉनमी को बिहार में बूस्ट मिलना चाहिए था, वो ट्रेडर्स को बूस्ट मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार का उदाहरण मैं इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि इसी तरह की स्थिति पूरे देश में होने वाली है। किसान विरोधी बिल जबरदस्ती पास किया गया है। आज जिस तरह से बिल पास किया गया है उससे साफ है कि सीधे लोकतंत्र की हत्या और सीधे डेमोक्रेसी को बुचर किया गया है।

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आज गणतंत्र के लिए काला दिन है। पहले तो बिल के मेरिट्स के बारे में बात होगी और आज जो भी वहां पर मौजूद था, वो जानता है कि कोई ऐसा बिल पारित नहीं हुआ है और सरकार दावा कर रही है कि पारित हुआ है, ये गणतंत्र की मौत है, हत्या है। पौने एक बजे कोई मंत्री अपना जवाब शुरू करता है तो ये संभव नहीं है कि आप बिना डिवीजन के एक बजे तक डिबेट बंद कर दें, सवा एक तक पारित कर दें।

उन्होंने कहा कि एक नहीं कम से कम 10 लोग, आपको नाम कैमरे में दिख रहे हैं, डिवीजन मांगा, कई लोगों ने संशोधन मूव किया, प्रस्ताव किया, रेजोल्यूशन किया, एक को बोलने का मौका नहीं दिया, एक को सुनने का मौका नहीं दिया, तो ये बिल किस जादूई छड़ी से पास हुआ? हमने इसलिए तुरंत हाउस में बैठकर एक व्यापक अविश्वास मत का मोशन मूव किया है। हम नहीं समझते कि गणतंत्र में आपका काम है कि अपने बहुमत को क्रूरता से और टेरनी से आप कानून पास करेंगे।

सिंघवी ने कहा कि सुनना-समझना-आत्मसात करना उतना ही आवश्यक है और आपने उसका आज बिल्कुल हनन किया है। मैंने कोई बिल नहीं देखा कि लिस्ट-दो के इतने अनुच्छेदों से वो संबंध रखता हो। लिस्ट-दो आप जानते हैं कि सिर्फ प्रदेश के स्तर पर कानून पास हो सकता है। लिस्ट के अनुच्छेद-14, 26, 28 और 67 ये सब कृषि के उद्योग से संबंध रखते हैं, तो ये एक असंवैधानिक बिल लाया गया है। संघीय ढांचे के विरुद्ध बिल लाया गया है। संघीय ढांचा हमारे मूल संविधान के तथ्यों का एक अभिन्न हिस्सा है और मेरा विश्वास है जो कुछ थोड़ा-बहुत मुझे संविधान का ज्ञान है, इस प्रकार का असंवैधानिक बिल जो पास होगा, उसे निश्चित रूप से चुनौती नहीं दी जाएगी, लेकिन उसको निरस्त किया जाएगा, उच्चतम न्यायालय में। उन्होंने कहा कि सरकार को विश्वास है कि वो अपने बहुमत पर, अपने बलबूते बिल पास नहीं कर सकते थे, इसलिए इस प्रकार के हथकंडे हुए हैं। आज सबने इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखा है।

सिंघवी ने कहा कि इसका एक और पहलू है कि जो राज्यसभा के लोग और हम में से कई लोग लोकसभा चैम्बर में बैठते हैं। लोकसभा की एक आवाज राज्यसभा के चैम्बर में माननीय अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पास नहीं जाती। वहां की एक आवाज हमारे पास नहीं आती, तो आपने बिना कोरम के, क्योंकि आधे लोग यहां पर बैठे हैं तो कोरम कहां से होगा और बाकी लोग खड़े हुए विरोध कर रहे हैं, डिवीजन मांग रहे हैं, बिना आगे हाउस को सुने हुए, देखे हुए, अनदेखा करते हुए बिल पारित कैसे कर दिया?

This post was last modified on September 22, 2020 12:15 am

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