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सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान यूपी में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश में सीएए के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच हो सकती है। पहले ही मामले का स्वत: संज्ञान ले चुके इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज एक बार फिर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर कोर्ट ने बेहद कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उसने सूबे में लगातार जारी धारा 144 को भी सिविल सोसाइटी के लिए बेहद आपत्तिजनक करार दिया।

मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की डिवीज़न बेंच ने सरकारी वकील से कहा कि सरकार को कानून और व्यवस्था बनाए रखने का पूरा हक है लेकिन यह लोगों के अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकता है।

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल किये गए काउंटर एफिडेविट को भी अपर्याप्त माना। इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किए गए एडवोकेट रमेश यादव ने बताया कि कोर्ट पुलिस ज्यादती के मामले में सरकार के ढीले ढाले रवैये से सख्त नाराज थी। बेंच ने सरकारी वकील से पूछा कि पुलिस की एकतरफा कार्रवाई के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के विरुद्ध सरकार ने अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? इस मामले में कोर्ट ने प्रदेश में हुई हिंसक घटनाओं की समुचित जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी के गठन की जरूरत बतायी। इस लिहाज से उसने राज्य सरकार से कुछ विशेष बिंदुओं पर डिटेल मांगा है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए उसने 17 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।

कोर्ट केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। उसने कहा कि लखनऊ के घंटाघर में धरने पर बैठी महिलाओँ के साथ होने वाली पुलिस ज्यादती की रिपोर्ट बेहद परेशान करने वाली है। इसके जवाब में जब सरकारी वकील ने मीडिया पर रिपोर्ट को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया तो कोर्ट ने सरकार वकील को अदालत को गुमराह करने से बाज आने की चेतावनी दी। बेंच ने कहा कि आप तो उल्टी बात कर रहे हैं। मीडिया पर तो सरकार के पक्ष में होने के आरोप लग रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से पुलिसकर्मी लोगों के कंबल खींचने से लेकर धरनास्थल पर पानी डालने की कार्रवाइयों में शामिल रहे हैं वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शोभा नहीं देता है।

एडवोकेट रमेश यादव ने बताया कि कोर्ट ने हिंसा के दौरान मारे गए सभी लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा घायलों की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस दौरान घायल पुलिस वालों की भी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

This post was last modified on January 27, 2020 11:17 pm

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Published by
Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi