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नजरबंद कश्मीरी नेताओं को हर तरीके से किया जा रहा है जलील, सुरक्षा गार्ड ने मारा महबूबा को थप्पड़!

इन दिनों भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार संसद से लेकर सड़क तक पुरजोर दावे कर रही है कि कश्मीर ‘सामान्य’ है और मुख्यधारा के कश्मीरी नेताओं को ‘बाइज्जत’ नजरबंद रखा हुआ है और उन्हें किसी किस्म की कोई तकलीफ हुकूमत की तरफ से नहीं हो रही है। लेकिन तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के लिए मशहूर विदेशी पत्रकारों के इस बाबत खुलासे इन दावों को सिरे से नकारते हैं। कोलकाता से प्रकाशित प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक ‘द टेलीग्राफ’ ने ब्रिटिश कश्मीरी पत्रकार और लेखक मुर्तजा शिबली की एक विशेष सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित की है जो साफ बताती है कि नजरबंदी अथवा हिरासत में कश्मीरी रहनुमाओं के साथ कैसा अपमानजनक और अलोकतांत्रिक सुलूक किया जा रहा है। अक्सर लाहौर और लंदन के दौरे पर रहने वाले शिबली ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में वही लिखा है जो उन्होंने कश्मीर में तैनात अधिकारियों, नजरबंदियों और उनके परिजनों से जाना है। लिखने से पहले उन्होंने भरोसेमंद सूत्रों से बाकायदा पुष्टि भी की और एक भी पंक्ति ऐसी नहीं लिखी, जिसकी पुष्टि न हो पाई हो।                           

रिपोर्ट के मुताबिक नजरबंदियों को चार सितारा होटल संतूर से एमएलए हॉस्टल में लाते वक्त कहा गया था कि ठंड से बचाव के लिए ऐसा किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के हवाले से खबरें भी प्रकाशित हुईं। दरअसल, यह सच नहीं था कि नजरबंदियों को ठंड से बचाव के लिए संतूर से एमएलए हॉस्टल लाया गया। संतूर सेंटरली हिटिंग तकनीक से लैस है। जबकि एमएलए हॉस्टल में ऐसा नहीं है। वहां कई पूर्व मंत्री, विधायक और राजनीतिक नेताओं को बंदी बना कर रखा गया है। एक नजरबंदी के परिजन ने बताया कि सरकार ने नजरबंदियों की ‘औकात’ बताने की मंशा से जगह बदली है। हॉस्टल में एक-एक कमरे की व्यवस्था है और हिटिंग प्रणाली नहीं है।

पहली रात नजरबंद नेताओं ने ठंड से कांपते हुए बिताई। सुबह उन्हें सिंगल राड और इलेक्ट्रॉनिक हीटर दिए गए, जिनसे बमुश्किल हाथ ही गर्म हो सकते थे। नज़रबंदी वाली जगह लोहे की चादर से घेरी गई है। नजरबंद, परिसर में ही बने छोटे से पार्क में भी नहीं जा सकते। शीशे की खिड़कियों पर काली फिल्में अथवा काले पर्दे डाल दिए गए हैं ताकि बाहर से रोशनी अंदर ना आ सके। यहां अक्सर बिजली गुल रहती है। इसलिए भी कि कश्मीर में सर्दियों में बिजली की यही हालत रहती है। एक अन्य नजरबंद के परिजन ने बताया कि हुकूमती सोच यह है कि इस सबसे नजरबंदियों को जेल जैसे कड़वे अनुभव होंगे और वे जल्दी टूट जाएंगे।                                                                 

‘टेलीग्राफ’ में प्रकाशित यह रिपोर्ट बताती है कि हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारुक, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इमरान अंसारी, पीडीपी के रफी अहमद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के खालिद नजीब ने खामोश रहने की शर्त पर बांड भर कर दिए हैं। मीरवाइज को छोड़कर बाकी सब ‘आजाद’ हैं। सरकार ने बॉंड भरने वालों को कुछ खास सहूलियतें भी मुहैया कराई हैं। फिलहाल मीरवाइज को एनआईए की कड़ी जांच से कुछ राहत जरूर दी गई है।   

संतूर होटल में नजरबंदी के सौ दिन भी खासे दुश्वारियों भरे थे। वहां किसी को लॉन में नहीं जाने दिया जाता था। कॉरीडोर तक जाने की मनाही थी। एक बार जब सज्जाद लोन टहल रहे थे तो एक गैर कश्मीरी सुरक्षाकर्मी ने उनकी गर्दन पर धौल जमा दी। वह ठिठक कर रुक गए, पर उक्त सुरक्षाकर्मी ने उन्हें चलते रहने के लिए कहा। उसने ऊंची आवाज में कहा, “तुम कौन हो?” आवाज इतनी ऊंची थी कि वहां मौजूद सब लोगों को सुनाई दी और ऐसा इसलिए पूछा गया था जिससे सबके बीच सज्जाद लोन को बेइज्जत किया जा सके।

इससे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इस घटना से ऐन पहले सज्जाद लोन ने एक आला पुलिस अफसर के फोन के जरिये किसी शख्स के साथ बात की थी और वह व्यक्ति कोई नहीं बल्कि भारत के गृह मंत्री अमित शाह थे! वह कुछ मिनट की कॉल में बच्चों की तरह गिड़गिड़ा रहे थे और कश्मीर तथा भाजपा के लिए अपने व अपने परिवार के समर्पण की लगातार दुहाई दे रहे थे। फोन सुनने वाले ने उन्हें फिर कभी बात करने का भरोसा दिलाया और कुछ देर के बाद उस पुलिस अफसर को बर्खास्त कर दिया गया, जिसका फोन लोन इस्तेमाल कर रहे थे। बाहर आतीं खबरें बताती हैं कि सज्जाद लोन पर ‘सख्ती’ बढ़ा दी गई है।                                           

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती एक बार इतना भड़कीं कि एक महिला सिपाही से उनकी गुत्मगुत्था हो गई। पत्रकार ने महबूबा मुफ्ती के दिल्ली रहने वाली एक नाराज रिश्तेदार के हवाले से लिखा है कि महिला सिपाही ने पूर्व मुख्यमंत्री को थप्पड़ तक जड़ दिए! एक अन्य उच्च पुलिस अधिकारी ने मुफ्ती को काफी भला-बुरा कहा।                                 

संतूर होटल में नजरबंद नेताओं की मानसिक हालत यह हो गई थी कि नजरबंदी के एक हफ्ते बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के एमएलसी शौकत हुसैन गनी ने पार्टी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को बुरी तरह कोसना शुरू कर दिया। गनी ने कहा कि शेख ने ही कश्मीरियों को  गुलाम बनवाया है। इसके बाद पार्टी के एक अन्य नेता ने गनी की पिटाई कर दी। सरकार के विरुद्ध प्रोटेस्ट करने वाले बशीर विरी, निजामुद्दीन भट्ट और शाह फैसल को एक रात चूहों ने काट लिया। यकीन किया जाता है कि उनके कमरों में जानबूझकर चूहे छोड़े गए।

महबूबा मुफ्ती के करीबी रिश्तेदार और रियासत के पूर्व मंत्री सरताज मदनी और पूर्व एमएलसी अल्ताफ कालू को श्रीनगर लाने से पहले, नजरबंदी के दौरान काफी परेशान किया गया। मदनी दोहराते रहे कि वह मंत्री रहे हैं, पर किसी ने परवाह नहीं की। सभी एकमत हैं कि कश्मीरी नजरबंदियों को नई जगह (एमएलए हॉस्टल) इसलिए लाया गया है ताकि दिक्कतों से घबराकर वे चुपचाप घुटने टेक दें।                           

(इस बीच महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तजा ने टेलीग्राम में छपी रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की है। और कहा है कि उनकी मां के बारे में इस तरह नहीं छापा जाना चाहिए था। ‘टेलीग्राफ’ ने इल्तजा का पत्र तो छापा है, लेकिन रिपोर्ट का खंडन नहीं किया है। अखबार अपनी रिपोर्ट पर कायम है।)

(वरिष्ठ पत्रकार अमरीक की प्रस्तुति। अमरीक आजकल जालंधर में रहते हैं।) 

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This post was last modified on November 22, 2019 10:01 am

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