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Tuesday, September 28, 2021

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भीमा कोरेगांव केस: नई फोरेंसिक रिपोर्ट में दावा- रोना विल्सन के लैपटॉप में हैकर ने डाली थीं कम से कम 22 फाइलें

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अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में फिर एक नया विस्फोटक खुलासा किया है। भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के लैपटॉप में और भी कई फाइलें हैकर के जरिए डलवाई गईं थीं। इसका खुलासा अमेरिका की आर्सेनल फोरेंसिक लैब ने किया है। इन फाइलों को विल्सन की गिरफ्तारी के बाद अपलोड किया गया था।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने जिस तरह के खुलासे फरवरी और अप्रैल 2021 में किए हैं, उससे एक बात तो उभर कर सामने आ रही है कि भीमा कोरेगांव मामले में रोना विल्सन, वकील सुधा भारद्वाज, सुरेंद्र गाडलिंग, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा, सुधीर धवाले, शोमा सेन, महेश राउत, पादरी स्टेन स्वामी, हनबाबू तरायिल, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बडे, गोवा के एक प्रोफेसर, कवि वरवरा राव आदि की गिरफ्तारी की साज़िश रची गयी थी, ताकि उन्हें जेल में डाला जा सके। इन सभी 16 कार्यकर्ताओँ को एल्गर परिषद की घटना के बाद 31 दिसबंर 2017 को भीमा कोरेगांव में हुए कार्यक्रम के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला अब प्लांटेड असलहे, दस्तावेज या नारकोटिक्स के आधार पर किसी को भी अनंतकाल तक जेल में रखने के षड्यंत्र सरीखा होता जा रहा है। जिसमें अंततः 8 से 14 साल बाद सबूत के अभाव में अदालतें रिहा करने का आदेश पारित कर देती हैं।

अमेरिका की एक डिजिटल फॉरेंसिक लैब ने कहा है कि हैकर ने मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन के लैपटॉप में 30 से ज्यादा डॉक्युमेंट अपलोड किए थे। यह काम महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में जनवरी 2018 में हुई हिंसा के कुछ दिनों बाद किया गया था, ताकि उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया जा सके। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने मेसाचुसेट्स स्थित फॉरेंसिक लैब के हवाले से यह खबर प्रकाशित की है।

आरोप है कि जिन फाइलों को रोना विल्सन के लैपटॉप में प्लांट किया गया, उन्हीं के आधार पर पुणे पुलिस और नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने रोना विल्सन, वकील सुधा भारद्वाज, सुरेंद्र गाडलिंग, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा, सुधीर धवाले, शोमा सेन, महेश राउत, पादरी स्टेन स्वामी, हनबाबू तरायिल, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बडे, गोवा के एक प्रोफेसर, कवि वरवरा राव आदि को गिरफ्तार किया था। वरवरा राव फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। बाकी सभी को बिना किसी मुकदमे के बीते तीन साल से जेल में रखा गया है। इन सब पर देश द्रोह के आरोप लगाए गए हैं। इन पर आरोप हैं कि उन्होंने प्रतिबंधित माओवादी ग्रुप के साथ मिलकर देश के खिलाफ साजिश रची और ये लोग यह काम एक दशक से कर रहे थे।

इसके पहले फरवरी 2021 में वाशिंगटन पोस्ट ने इसी लैब के हवाले से खबर दी थी, जिसमें बताया गया था कि रोना विल्सन के लैपटॉप में करीब 10 पत्र प्लांट किए गए थे। इनमें वह पत्र भी शामिल था, जिसमें कथित तौर पर प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश की बात कही गई थी। आर्सेनल की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि विल्सन के लैपटॉप में 22 अतिरिक्त दस्तावेज भी डाले गए थे और यह काम उसी हैकर ने किया था, जिसने वह पत्र लैपटॉप में अपलोड किए थे। आर्सेनल ने विल्सन के लैपटॉप की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी का विश्लेषण किया है जो वकीलों ने अदालती आदेश के बाद नवंबर 2019 में हासिल किए थे।

फरवरी 2021 में जब पहली रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी तो विल्सन के वकीलों ने इसे मुंबई की अदालत में पेश किया था और अदालत से आग्रह किया था विल्सन के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया जाए। अदालत इस मामले पर सुनवाई आने वाले दिनों में कर सकती है। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, एनआईए के एक प्रवक्ता जया रॉय ने कहा कि सरकारी फोरेंसिक लैब में किए गए विल्सन के लैपटॉप के विश्लेषण में किसी भी मालवेयर के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है और ऐसे में लैपटॉप से छेड़छाड़ नहीं हो सकती। हालांकि प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि आखिर लैब इस नतीजे पर कैसे पहुंची है। उन्होंने कहा था, “हमारी जांच पूरी है और एनआईए किसी प्राइवेट लैब की रिपोर्ट से मिले सबूतों के आधार पर मामले की दोबारा जांच नहीं कर सकती।”

फरवरी में भी एनआईए ने अप्रत्यक्ष रूप से आर्सेलन की रिपोर्ट को खारिज किया था। एनआईए प्रवक्ता ने कहा था कि चार्जशीट में जिन फोरेंसिक रिपोर्ट का जिक्र है, वह मान्यता प्राप्त लैब की हैं। इस मामले में यह जांच पुणे की रीजनल फोरेंसिक साइंस लैब ने की है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक लैपटॉप में कोई मालवेयर नहीं पाया गया है।

इसके विपरीत आर्सेनल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि विल्सन के लैपटॉप में 22 दस्तावेज अपलोड किए गए, जिससे इन कार्यकर्ताओँ और माओवादी नेताओं के बीच पैसे के कथित लेनदेन का आरोप लगाया गया है।

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार विल्सन के लैपटॉप के विंडोज ड्राइव में दो अन्य फाइलें भी एक फोल्डर में डाली गईं। 22 दस्तावेजों की तरह आर्सेनल इस बात की पुष्टि नहीं कर पाया है कि इन फाइलों को क्या नेटवायर से लैपटॉप में डाला गया या नहीं। वैसे इन फोल्डर को किसी ने क्रिएट नहीं किया है, लेकिन हैकर ने एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर इन्हें लैपटॉप में डाला है।

नेटवायर दरअसल एक कमर्शियली उपलब्ध सॉफ्टवेयर है। आर्सेनल लैब ने पाया कि हैकर ने इस मालवेयर का इस्तेमाल कर विल्सन के लैपटॉप से करीब दो साल तक छेड़छाड़ की है। इतना ही नहीं, इसी हैकर ने विल्सन के साथ अन्य लोगों को भी अपना निशाना बनाया है। ध्यान रहे कि इन कार्यकर्ताओं की मदद करने वाले कम से कम 8 लोगों को नेटवायर की तरफ से ईमेल पर ऐसे लिंक भेजे गए जो संदिग्ध थे।

दूसरी रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से जिक्र है कि रिमोट एक्सेस के जरिए ट्रोजन हॉर्स विल्सन के लैपटॉप में भेजा गया, जिसके बाद हैकर को विल्सन के लैपटॉप का कंट्रोल मिल गया। मिसाल के तौर पर 11 जनवरी 2018 को जब लैपटॉप खोला गया तो मोहिला मीटिंह के नाम से डाक्युमेंट से नेटवायर खुद ही लैपटॉप में लॉन्च हो गया। यह बात भीमा कोरेगांव हिंसा के 11 दिन बाद की है। हैकर ने एक कमांड प्रॉम्प्ट को खोला और 5.10 बजे और 5.12 बजे तीन फाइलें लैपटॉप में डाल दीं। इनमें से एक ‘मोहिला मीटिंग’ की पीडीएफ फाइल भी थी। इन फाइलों को फिर एक छिपे हुए फोल्डर में अनपैक किया गया और रीनेम कर दिया गया।

आर्सेनल के प्रेसिडेंट मार्क स्पेंसर ने आर्टिकल 14 नाम की वेबसाइट से बातचीत में कहा कि हैकर ने एक जगह गलती की। उसने जब फाइलें प्लांट करने के लिए कमांड लिखा तो इसे करेक्ट भी कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कम होता है कि हैकर कोई गलती करे, ऐसे में इस गलती का होना चोर की दाढ़ी में तिनका सरीखा हो गया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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