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Thursday, September 16, 2021

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दुष्प्रचार, गोएबेलिज़्म और फर्जी वेबसाइट से प्रधानमंत्री का स्तुतिगान

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 झूठ बोलना एक आदत है। फासिज़्म की प्राणवायु ऑक्सीजन ही झूठ और फरेब पर आधारित है। भारत में भी झूठ के आधार पर व्हाट्सएप्प और सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत ही झूठी खबरें प्लांट की गईं। नेहरू की वंशावली, सावरकर के भगत सिंह से सम्बंध, सावरकर की नेताजी सुभाष बाबू को देश छोड़ कर बाहर जाने की सलाह, जैसी बहुत से मिथ्या ऐतिहासिक तथ्य, एक सुनियोजित तरह से आरएसएस और भाजपा के लोगों द्वारा लम्बे समय से फैलाये जा रहे हैं। 1994 में गणेश जी को दुनिया भर में दूध पिलाने की अफवाह को फैलाने की योजना गोएबेलिज़्म के भारतीय संस्करण का एक परीक्षण था। लेकिन यह झूठ और फरेब लंबे समय तक नहीं चल पाता है। झूठ के बवंडर थमते भी हैं और फिर जब आकाश निरभ्र हो जाता है तो सब कुछ दिखने भी लगता है। 

गोएबेलिज़्म की इसी परंपरा में एक नया झूठ प्लांट किया गया। द गार्जियन नामक एक ब्रिटिश अखबार की तर्ज पर बीजेपी आईटी सेल और एक बड़े नेता ने एक साइट बनाई जिसे नाम दिया, The daily guardian.com द डेली गार्जियन डॉट कॉम। याद कीजिए एक बार गृहमंत्री अमित शाह ने अपना सीना फुला कर कहा था कि वह कोई भी खबर कुछ ही घण्टो में देश भर में फैला सकते हैं। सरकार समर्थक मित्रगण, एक केंद्रीय गृहमंत्री को,  अफवाह फैलाने की उनकी क्षमता पर शेखी बघारते देख कर कितने लहालोट थे। 

इसी अखबार के नाम से एक देसी वेबसाइट लॉंच की गई। भाजपा आईटी सेल ने  इस नकली वेबसाईट के जरिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के छवि सुधार का एक कार्यक्रम शुरू किया। छवि सुधार कार्यक्रम की ज़रूरत इसलिए पड़ी कि, कोरोना महामारी आपदा में सरकार और प्रधानमंत्री की भूमिका पर बहुत अधिक सवाल उठ रहे हैं और यह सवाल और आलोचनाएं जितनी देश के अंदर की मीडिया द्वारा नहीं उठायी जा रही हैं, उससे अधिक विदेशी मीडिया द्वारा उठाए जा रहे हैं, लेख लिखे जा रहे हैं और संपादकीय छापे जा रहे हैं। विदेशी अखबारों में, द गार्जियन, ऑब्जर्वर, वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स, डेली मेल जैसे प्रतिष्ठित अखबार हैं। अब यह सब अखबार चूंकि नेट पर उपलब्ध हैं तो जिन्हें रुचि है, वे इन्हें पढ़ ले रहे हैं। 

लेकिन भाजपा आईटी सेल, और कुछ मंत्री भी, इस छवि सुधार के दुंदुभिवादन में रंगे हांथ पकड़े भी गए।अब ये गोएबेल तो हैं नहीं। ये ठहरे गोएबेल की नकल करने वाले लोग। इन्होंने द गार्जियन The Guardian’ को बदल कर, द डेली गार्जियन डॉट कॉम, The daily guardian.com तो कर दिया है, पर इसका रजिस्ट्रेशन का स्थान, मैनचेस्टर यूनाइटेड किंगडम तो हो नहीं सकता है। जब आप  Thedailyguardian.com वेबसाइट पर जाएंगे तो आप खुद ही समझ जाएंगे कि यह वेबसाइट नाम ही विदेशी अखबार द गार्जियन की लगती है, लेकिन दरअसल ऐसा बिल्कुल नहीं है। 

11 मई को भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं की ट्विटर टाइमलाइन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ़ करने वाला एक आर्टिकल अचानक तेजी से स्थान पाने लगा। यह लेख, कोरोना आपदा की दूसरी लहर से उपजी परिस्थितियों को संभालने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीठ थपथपाते हुए एक शीर्षक, “पीएम मोदी कड़ी मेहनत कर रहे हैं; विपक्ष की बातों में न आयें (PM MODI HAS BEEN WORKING HARD; DON’T GET TRAPPED IN THE OPPOSITION’S BARBS)”

इस लेख में विस्तार से लिखा है कि कैसे, जब लोग इस स्थिति के लिए पीएम को ज़िम्मेदार ठहराने में लगे हैं, तो प्रधानमंत्री, बिना किसी को कोई जवाब दिए देश की भलाई में जुटे हैं। लेख में सरकार के प्रति सभी आलोचनाओं का जवाब, देते हुए, बताया गया है कि कैसे कुछ मुख्यमंत्री बच्चों की तरह रो रहे हैं, और ज़िम्मेदारी से पलड़ा झाड़ रहे हैं, कैसे कांग्रेस सरकार एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली बनाने में नाकामयाब रही और कैसे नरेंद्र मोदी के आलोचक उनकी छवि को धूमिल करने में लगे हैं। 

यह लेख, भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय, खेल एवं युवा और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री किरन रिजीजू, भाजपा सांसद डॉ. जितेन्द्र सिंह, फ़ाइनेंस और कॉर्पोरेट राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी, कोयला, खदान और संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, भाजपा सांसद नरेंद्र केशव सवइकर, झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और पूर्व भाजपा विधायक अर्चना चिटनिस ने सोशल मीडिया शेयर किया। 

भाजपा की नेशनल मीडिया टीम के एक सदस्य सुदेश वर्मा द्वारा यह लेख लिखा गया है, जो भाजपा के प्रवक्ता के रूप में टीवी चैनलों पर अक्सर दिखते हैं। चूंकि, इस वेबसाइट का नाम, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थान द गार्डियन से मिलता जुलता है इसलिए अधिकांश ने यह समझ लिया कि यह लेख  उसी विदेशी मीडिया पब्लिकेशन द्वारा भारत के प्रधानमंत्री की सराहना में लिखा गया है। लेकिन यह आर्टिकल भाजपा के मीडिया रिलेशंस विभाग के सुदेश वर्मा ने लिखा है. वो भाजपा के प्रवक्ता के रूप में टीवी चैनलों पर भी अक्सर दिखते रहते हैं।

सुदेश वर्मा ने इस लेख में, कोरोना की भयावह स्थिति के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सभी को ज़िम्मेदार ठहराया है और लिखा है, 

“दुनिया में किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि कोरोना की दूसरी लहर इतनी ख़तरनाक होगी। सभी ने सोचा था कि पहले से कम स्तर पर फैलेगा। क्या इसके लिए भी हम मोदी को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं?” 

जब कि इसी सरकार द्वारा गठित वैज्ञानिकों के फ़ोरम ने मार्च में भी यह चेतावनी दे दी थी कि कोरोना मामलों में बहुत तेज़ वृद्धि आने वाली है और सरकार ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। इसका कोई उल्लेख उक्त लेख में नहीं किया गया है। 

आगे सुदेश ने लिखा है,

“अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने से पहले तक मात्र एक एम्स हुआ करता था जो 1952 में बना था। लेकिन वाजपेयी ने 6 और AIIMS खोलने का फ़ैसला लिया। वाजपेयी से सीख लेते हुए मनमोहन सरकार ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली में 2013 में एक एम्स और बनवाया, और जब नरेंद्र मोदी आये, उन्होंने पूरे देश में 14 एम्स खोलने का फ़ैसला किया।” 

ऑल्ट न्यूज़ ने विस्तार से इसकी पड़ताल की है। ऑल्ट न्यूज की पड़ताल के अनुसार, यह सब लिखते समय सुदेश वर्मा ने एक तथ्यात्मक गड़बड़ी कर दी। वाजपेयी सरकार ने ने 6 एम्स खोलने की घोषणा तो की थी लेकिन उन पर काम यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू किया गया था। इसके अतिरिक्त, जिन 14 एम्स की घोषणा नरेंद्र मोदी ने की है, उनमें से कोई भी पूरी क्षमता के साथ चालू नहीं हो पाया है। कई जगह या तो आधे-अधूरे काम हो रहे हैं या अभी निर्माण कार्य ही चल रहा है। 

आगे उक्त लेख में लिखा है, “किसी को भी अन्य पार्टियों और उनके नेताओं के कैंपेन से दिक्कत नहीं हुई लेकिन आलोचकों को प्रधानमंत्री से ही दिक्कत हो रही है। प्रधानमंत्री के लिए अलग नियम नहीं बनाये जाते हैं। और उन्होंने पश्चिम बंगाल में कैंपेन के आखिरी चरण की अपनी बैठकें रोक दी थीं। मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत अन्य भाजपा नेताओं ने भी पश्चिम बंगाल में चुनाव के मध्य में ही सभी दौरे रद्द कर दिए।”

लेकिन वे यह उल्लेख करना भूल गए कि, पीएम मोदी ने आसनसोल में 17 अप्रैल को भाषण दिया था, जिसमें वे, बगैर मास्क पहने दिख रहे हैं, और गर्व से कह रहे हैं कि, इससे पहले उन्होंने इतनी बड़ी भीड़ कभी नहीं देखी। उनके शब्द हैं,  “चारों तरफ़ मैंने ऐसी सभा पहली बार देखी है…मैं जहां देख सकता हूं मुझे लोग ही लोग दिखते हैं।” 

जिस दिन उन्होंने यह बात कही, उसी दिन देश में 2.6 लाख से ज़्यादा मामले सामने आये थे। 

सुदेश वर्मा आगे लिखते हैं, “हरिद्वार में कुम्भ मेला क्यों हुआ? इसे स्थगित किया जा सकता था। ये राज्य की ज़िम्मेदारी थी कि वो देखे कि क्या कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इतने बड़े स्तर का मेला लगाना संभव है या नहीं… प्रधानमंत्री ने सभी से तो मेले को केवल प्रतीकात्मक रखने की भी गुज़ारिश की थी।” 

लेकिन तथ्यात्मक तौर से फिर गड़बड़ी की गयी क्योंकि पीएम मोदी ने जनता से ये अपील 18 अप्रैल को की थी। और तब तक लाखों लोग मेले में शामिल हो चुके थे। कुम्भ मेले की तस्वीर लगभग सभी अख़बारों के पहले पन्ने पर छापी गयी थी जिसमें नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी दिखती थी। इस विज्ञापन में लिखा हुआ था – “सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत है।” यह सब आल्ट न्यूज़ की पड़ताल में लिखा है। 

डेली गार्डियन का मालिक आईटीवी ITV है। डेली गार्डियन को इसी साल फ़रवरी में ITV नेटवर्क ने लॉन्च किया था। यह आउटलेट केवल 3 महीने पहले अस्तित्व में आया है और सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी के साथ इसने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किया था।  नितिन गडकरी ने इस इंटरव्यू में कहा था कि 

” कोरोना वायरस ‘एक छिपा हुआ आशीर्वाद’ साबित हो सकता है जो भारत में FDI निवेश को बढ़ावा देने में भूमिका निभाएगा।”

डेली गार्डियन के कार्यकारी संपादक उत्पल कुमार हैं। इस साइट का मालिक कार्तिकेय शर्मा है, जिसका भाई जेसिका कांड फेम मनु शर्मा पिछले साल दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेश पर सजा पूरी होने से पहले छोड़ दिया गया।

यह वेबसाइट, यूपी इंडिया में 2007 में रजिस्टर्ड है और 2 मई 2021 में इसे अपडेट किया गया है और यह 22 मई को समाप्त हो जाएगी। फिलहाल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि इस वेबसाइट से प्रधानमंत्री का कितना महिमामंडन किया गया पर यह महत्वपूर्ण है कि एक वैश्विक प्रतिष्ठा वाले विदेशी अखबार के नाम से एक फर्जी वेबसाइट द्वारा उक्त अखबार की खबरें बता कर मनचाही खबरें प्लांट की गयीं। यह कृत्य एक फ्रॉड है और भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत एक दंडनीय अपराध भी है। 

दरअसल 2014 के बाद अधिकांश टीवी मीडिया सरकार के पीआर एजेंसी में बदल गया है। अखबार सरकार की विरुदावली गाने लगें हैं। सवाल पूछ कर,  असहज करने वाले कुछ पत्रकारों को उनके चैनल से निकलवा दिया गया। सोशल मीडिया पर अमित मालवीय का झुठबोलवा गैंग सक्रिय है ही। पर जब देश समस्याओं से घिरने लगा और सरकार का निकम्मापन हर सरकारी निर्णय में सामने आने लगा तो, सरकार की भूमिका पर लोग सवाल उठाने लगे। दुनियाभर में विदेशी अखबार जो अपनी स्वतंत्रता के प्रति सजग और सचेत रहते हैं, प्रधानमंत्री की सख्त और तार्किक आलोचना करने लगे तो, फिर इस नयी आफत से कैसे पार पाया जाय ? तब आइटी सेल के फ्रॉड लोगों ने दिमाग लगाया कि क्यों न एक अंतराष्ट्रीय अखबार का नाम चुनकर उससे मोदी की ब्रांडिंग कर दी जाए। 

बीजेपी से जुड़े कई बड़े नामों ने इस न्यूज़ आर्टिकल को शेयर किया। यूनियन मिनिस्टर अनुराग ठाकुर, किरण रिजिजू, डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रल्हाद जोशी, रघुबर दास भी शेयर करने वालों की लिस्ट में शामिल थे। यहां तक कि बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने भी इसे अपनी टाइमलाइन पर शेयर किया. साथ में लिखा कि मौत बड़ी खबर है, लेकिन रिकवरी नहीं। दावा किया कि 85 प्रतिशत लोग बिना हॉस्पिटल में एडमिट हुए ठीक हो गए। इतनी जगह शेयर होने के बाद लोग ‘द डेली गार्डियन’ की उत्पत्ति जानने को स्वाभाविक रूप से इच्छुक हो गए, जो कोरोना महामारी में भी मोदी सरकार का इस तरह से बचाव कर रहा था। लोग वेबसाइट चेक करने लगे। इस कदर कि ‘द डेली गार्डियन’ का पेज क्रैश हो गया। 

दिनभर वेबसाइट की पीएम मोदी वाली स्टोरी का लिंक डाउन रहा। हालांकि, शाम को ओपन होने लगा। जब खुला, तो पाया गया कि यह एक संपादकीय था। स्क्रॉल करते-करते नीचे जब यूजर पहुंचे तो पूरी बात समझ मे आयी,  क्योंकि वहां लिखा था,

” इसे लिखने वाले बीजेपी मीडिया रिलेशन्स डिपार्टमेंट के कन्वेनर हैं और टीवी डिबेट में पार्टी प्रवक्ता की भूमिका भी निभाते हैं। उन्होंने ‘नरेंद्र मोदी: द गेम चेंजर’ नाम की बुक भी लिखी है। यहां लिखे विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं।” 

द डेली गार्जियन एक ब्रिटिश अखबार है जो 1821 में पहली बार मैनचेस्टर से छपना शुरू हुआ था। उसका शुरुआती नाम मैनचेस्टर गार्जियन था। 1959 में उक्त अखबार का नाम बदल कर, द गार्जियन कर दिया गया। इस अखबार के साथ गार्जियन मीडिया ग्रुप के दो और अखबार निकलते हैं, ऑब्जर्वर और द गार्जियन वीकली। यह ग्रुप स्कॉट ट्रस्ट द्वारा संचालित है। इंग्लैंड का यह एक प्रतिष्ठित मीडिया समूह है। 

जो फर्जी लेख मोदी जी की ब्रांडिंग में द गार्जियन के नाम से लिखे गए और इस वेबसाइट पर छापे गए उन्हें, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सहित  मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने धड़ाधड़ ट्वीट और रिट्वीट भी करने शुरू कर दिए। उन मंत्रियों ने यह भी नहीं देखा कि वे सच मे असल द गार्जियन में छपे भी हैं या नहीं। पर वे ही नहीं एक अदना सा मोदी समर्थक भी यह मान कर चलता है कि, मोदी तो कोई गलती कर ही नहीं सकते। आखिर वे एंटायर पॉलिटिकल साइंस में ग्रेज्युएट जो ठहरे। 

( विजय शंकर सिंह रिटायर्ड आईपीएस आफिसर हैं और आजकल कानपुर में रहते हैं।)

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