Tuesday, October 26, 2021

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विजय शंकर सिंह

जन्मदिन पर विशेष: गांधी ने चाही थी गणेश शंकर जैसी मौत

25 मार्च, 1931 को कानपुर में एक अत्यंत दुःखद घटना हुयी थी। एक साम्प्रदायिक उन्माद से भरी भीड़ ने गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या कर दी थी। विद्यार्थी जी हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरुष रहे हैं। वे न केवल...

क्रूज रेड के अगुआ अफसर समीर वानखेड़े पर गिरफ्तारी की तलवार!

अब इस हाई प्रोफाइल मामले में जांच कर रहे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी समीर वानखेड़े ने खुद के लिए कानूनी सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने मुंबई पुलिस को 'Don't-Arrest-Me'का खत लिखा है। अपने को फंसाए जाने का...

मोदी सरकार में गलत है पासपोर्ट की ताकत बढ़ने का दावा

गोवा में 14 अक्टूबर को, अमित शाह ने यह कहा कि, "नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ी है?" उन्होंने कहा, "देश को दुनिया के देखने का नज़रिया बदल गया। जो विदेश जाते हैं… ये तो...

इंफ्रास्ट्रक्चर बनाओ, संवारो और फिर निजी क्षेत्र को बेच दो – माले मुफ्त दिले बेरहम !

कुशीनगर, हवाई अड्डा के भी अगले साल तक निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की योजना है। कुशीनगर का हवाई अड्डा कल देश को प्रधानमंत्री ने समर्पित कर दिया, पर यह हवाईअड्डा अगले ही साल राष्ट्रीय मोनेटाइजेशन कार्यक्रम में निजी...

सावरकर के बचाव में आ रहे अनर्गल तर्कों और झूठ का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी

एबीपी न्यूज पर एक डिबेट के दौरान एंकर रुबिका लियाकत ने यह सवाल पूछा कि, कांग्रेस के कितने नेताओं को कालापानी की सज़ा मिली थी ? इसके उत्तर में कांग्रेस के प्रवक्ता ने गांधी, नेहरू की जेल यात्राओं के...

सावरकर प्रकरण: बंटवारे की भूमिका लिखने वाले, बंटवारे को रोक कैसे सकते थे ?

वीडी सावरकर पर एक और विवाद कि, उन्होंने गांधी जी के कहने पर अंग्रेजों से माफी मांगी थी, उदय माहुरकर और चिरायु पंडित की किताब, द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टीशन, वीर सावरकर, के विमोचन के अवसर पर...

लोहिया की पुण्यतिथि: सड़कें तो सुनसान नहीं रहीं लेकिन संसद जरूर आवारा हो गयी!

कल्पना कीजिए, यदि आज डॉ लोहिया जीवित रहते तो, साल भर से हो रहे किसान आंदोलन में, उनकी क्या भूमिका रहती। लोहिया को जानने वाले और उस कुजात गांधीवादी के लेखों, भाषणों का अध्ययन करने वाले एकमत से यही...

आइडिया ऑफ इंडिया की रीढ़ थे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

मौलाना आज़ाद के विचार और उनका लेखन सबसे कठिन होता है धार्मिक कट्टरता और धर्मान्धता से उबल रहे समाज में, सेक्युलर सोच या सर्वधर्म समभाव के, सार्वभौम और सनातन मूल्यों को बचाये रखना, उन पर टिके रहना और उनके पक्ष...

आपराधिक छवि के नेताओं से मुक्त हो गृहमंत्रालय

देश के गृह मंत्रालय का नेतृत्व जिन नेताओं के पास है, वे हत्या और हत्या के प्रयास जैसी संगीन धाराओं के मुल्जिम भी हैं। खुद गृहमंत्री अमित शाह भी, एक समय अदालत के आदेश से, अवांछित और तड़ीपार किये...

राजनीतिक विराटता के साथ अद्भुत थी गांधी जी की सामाजिक व्यापकता

बीसवीं सदी के इतिहास पर जब भी चर्चा छिड़ेगी, महात्मा गांधी की स्थिति उस कालखंड की सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में मानी जायेगी। उनका योगदान भारत के स्वाधीनता संग्राम में तो है ही, पर उनका सबसे बड़ा योगदान...

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हाल-ए-यूपी: बढ़ती अराजकता, मनमानी करती पुलिस और रसूख के आगे पानी भरता प्रशासन!

भाजपा उनके नेताओं, प्रवक्ताओं और कुछ मीडिया संस्थानों ने योगी आदित्यनाथ की अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त फैसले...