Tuesday, December 7, 2021

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लखबीर की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाले निहंग जत्थेबंदी का मुखिया दिखा केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ

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सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल के पास पंजाब के तरनतारन के लखबीर सिंह की एक निहंग जत्थेबंदी से वाबस्ता निहंगों द्वारा की गई नृशंष हत्या का मामला इन दिनों बड़ी सुर्खियों में है। इस बेरहम कत्लकांड की चौतरफा कड़ी निंदा हो रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही दिन बाकायदा कह दिया था कि यह एक जघन्य हत्या है और इसे अंजाम देने वाली जत्थेबंदी से उसका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। साथ ही, पहले दिन से सरगोशियां तैर रही हैं कि लखबीर सिंह की हत्या के पीछे कोई बहुत बड़ी साजिश है।

धार्मिक बेअदबी एक बहाना है। भाजपा नेताओं ने इसके लिए किसानों को असल गुनाहगार ठहराने का कोई मौका नहीं छोड़ा। इस प्रकरण के कुछ सनसनीखेज पहलू निष्पक्ष माने जाने वाले उत्तर भारत के प्रमुख दैनिक ‘द ट्रिब्यून’ ने जगजाहिर किए हैं। ‘द ट्रिब्यून’ ने फोटो के सबूत के साथ बताया है कि लखबीर कत्लेआम के लिए गुनाहगार निहंग जत्थेबंदी का नेता बाबा अमन सिंह कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से भी मिलता रहा है और इन मुलाकातों में उसके साथ कुछ संदेहास्पद और पंजाब के आतंकवाद के दौर के बदनाम पुलिसकर्मी भी थे।

‘द ट्रिब्यून’ में प्रकाशित एक फोटो में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बाबा अमन सिंह को सिरोपा देकर सम्मानित कर रहे हैं। उनके ठीक पीछे पंजाब का बदनाम व बर्खास्त पुलिस अधिकारी गुरमीत सिंह पिंकी ‘कैट’ भी खड़ा है। पिंकी लुधियाना के एक बेकसूर नौजवान की हत्या के संगीन आरोप में सजा काट चुका है और उसने कई बार मीडिया के आगे कुबूल किया है कि वह आतंकवाद के काले दौर में पुलिस द्वारा बनाए गए 50 से ज्यादा फर्जी मुकाबलों का हिस्सा रहा है। निहंगों से उसके गहरे दोस्ताना रिश्ते भी जगजाहिर हैं। ‘जनचौक’ प्रसंगवश बताना चाहता है कि आतंकवाद के दौर में पंजाब के कतिपय पुलिस अधिकारियों ने आतंकवादियों के खिलाफ निहंगों का जमकर इस्तेमाल किया था। उस दौर में निहंगों ने संविधानेत्तर सत्ता कायम कर ली थी। एक निहंग मुखिया अजीत सिंह पुहला के जुल्मों को लोग अभी तक नहीं भूले हैं। बेशक बाद में उसे अमृतसर जेल के अंदर आग लगाकर मार दिया गया। इसकी पृष्ठभूमि में उसकी बेगुनाह लोगों के साथ की गईं ज्यादातियां थीं। प्रतिशोध के तौर पर उसकी हत्या हुई थी।

खैर, अब यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि लखबीर हत्याकांड के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार निहंग जत्थेबंदी का नेता बाबा अमन सिंह केंद्र सरकार की ओर से किसान आंदोलन को खत्म करवाने के लिए ‘पर्दे के पीछे से’ कोई अहम और संदिग्ध भूमिका निभा रहा था। एक कैनेडियन सिख ग्रुप की भी इसमें शमूलियत थी। कनाडा के सिख्स एंड गुरुद्वारा काउंसिल के चेयरमैन कुलतार सिंह गिल ने 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था जिसमें भाजपा नेता सुखमहेंद्रपाल सिंह ग्रेवाल को केंद्र सरकार और किसानों के बीच रुकी हुई बातचीत शुरू करवाने का अहम स्रोत बताया गया था। ‘द ट्रिब्यून’ के मुताबिक उसके पास तीन फोटो हैं जिनमें निहंग बाबा अमन सिंह को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सिरोपा डाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यह बैठक जुलाई के अंत की है।

दूसरी फोटो में बाबा अमन सिंह और कैट के नाम से बदनाम गुरमीत सिंह पिंकी केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी के दिल्ली स्थित बंगले में मंत्रियों के साथ लंच बैठक कर रहे हैं। इस मौके पर झारखंड से सांसद सुनील कुमार सिंह, भारत तिब्बत-संघ के राष्ट्रीय महासचिव और मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले सौरभ सारस्वत, भाजपा के पूर्व किसान मोर्चा नेता सुखमहेंद्रपाल सिंह ग्रेवाल भी मौजूद दिखाई देते हैं। गरेवाल जम्मू और कश्मीर की भारत-तिब्बत संघ की इकाइयों से भी जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री से इन तमाम लोगों की ‘विशेष’ बैठकें उस वक्त हुईं, जब पंजाब में भाजपा नेताओं का जबरदस्त बहिष्कार किया जा रहा था। वैसे, आज भी किया जा रहा है।

‘द ट्रिब्यून’ के साथ बातचीत में सुखमहेंद्रपाल सिंह ग्रेवाल ने स्वीकार किया है कि कनाडा के एक ग्रुप की पहलकदमी पर किसान मसले के हल के लिए शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ हुई बैठक में बाबा अमन सिंह मौके पर हाजिर था और वह भी किसानों के मसले का हल चाहता था। अब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के स्टाफ के कुछ सदस्यों ने कहां की मंत्री अपने ओहदे के कारण कई लोगों से मिलते रहते हैं।

बाबा अमन ने बैठक की बाबत पूछने पर सवाल को टालने की कोशिश में कहा कि वह कई नेताओं और लोगों से मिलता रहता है। वह कहता है, “बेअदबी करने वाले की हत्या एक धार्मिक मामला है। इसका किसी और मामले से कोई लेना देना नहीं है। हमारे निहंगों ने खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया है।”

अब यहां यह सवाल मौजूं है कि आखिर लखबीर हत्याकांड को अंजाम देने वाले निहंग संगठन और भाजपा के बीच आखिर रिश्ता कितना गहरा है? ग्रेवाल के कथन से साफ है कि बाबा अमन भाजपा नेताओं के साथ बैठकें करता रहा है, जबकि लखबीर को मार देने वाली जत्थेबंदी का नेता बाबा अमन सिंह इस सवाल पर कन्नी कतराते नजर आता है। ‘द ट्रिब्यून’ को आधार मानकर और उसके द्वारा प्रस्तुत फोटो से कहीं न कहीं इस नतीजे के करीब नहीं जाया जा सकता कि सिंधु बॉर्डर पर मौजूद निहंग जत्थेबंदी, जिसके 6 लोगों ने लखबीर का कत्ल किया, वह किसी न किसी का मोहरा है? गौरतलब है कि बहुत अतीत में निहंगों का इतिहास गौरवशाली रहा है लेकिन हाल-फिलहाल के सालों में वे ‘मोहरा’ बनने के लिए बदनाम रहे हैं। मामला चाहे ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद कार सेवा का हो या पंजाब पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का। निहंग बेशक खुद को सर्वोपरि मानते हैं लेकिन न जाने कैसे केंद्र और राज्य सरकार तथा उनकी एजेंसियों के काबू में बेहद आसानी के साथ आ जाते हैं!
(पंजाब से वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)

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