Friday, January 21, 2022

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लद्दाख में पैंगोंग झील के इलाके में चीन तेजी से पुल बना रहा

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लद्दाख में पैंगोंग झील के इलाके में चीन तेजी से पुल बना रहा है, इस बात का खुलासा सैटलाइट की नई तस्वीर से हुआ है। जियो-इंटेलिजेंस एक्सपर्ट डेमियन साइमन ने कुछ सैटेलाइट इमेज को देख कर नया खुलासा किया है। तस्वीरों से संकेत मिलता है कि चीन पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पार एक पुल का निर्माण कर रहा है। जियो-इंटेलिजेंस एक्सपर्ट डेमियन साइमन ने ट्विटर पर एक सैटलाइट तस्वीर डाली और बताया कि चीन पैंगोंग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ने के लिए नया पुल बना रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि Khurnak इलाके में पुल बनाने का मकसद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को अपनी टुकड़ी जल्दी से भेजना हो सकता है। भारतीय सैन्य सूत्रों ने भी कहा है कि क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर भारत की नजर है और एलएसी के पास सभी महत्वपूर्ण इलाकों में तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।https://twitter.com/detresfa_/status/1477917748047003653?s=19
पिछले साल भारतीय सैनिक पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कैलाश रेंज के ऊपर चले गए थे जिससे इस क्षेत्र में चीनी सेना को अवसर मिल गया। इस पुल के पूरा होने के साथ, चीन के पास विवादित क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों को शामिल करने के लिए कई मार्ग हो जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले मई में लद्दाख में तनाव होने के बाद से इस क्षेत्र में 50,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है। लद्दाख ही नहीं, चीन पिछले एक साल में अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा से लगे पूर्वी क्षेत्र में आक्रामक कदम उठा रहा है.रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे को हल करने के लिए, दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न स्तरों पर बातचीत में लगी हुई हैं। https://twitter.com/detresfa_/status/1478215245936017409?s=19

किस हिस्से में हो रहा निर्माण 

अरुणाचल प्रदेश के क़रीब चीन के गांव बसाने की खबरों और 15 जगहों के नाम बदलने की चर्चा के बीच पैंगोंग लेक पर आखिर चल क्या रहा है। 
बता दें कि 3,488 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) अधिकतर जगह ज़मीन से होकर गुज़रती है, लेकिन पैंगोंग झील अनोखी है। यहां पर भारत और चीन की सीमाएं पानी में हैं। LAC इस झील में कहां से गुज़रती है, इसे लेकर भारत और चीन के अलग-अलग दावे हैं। पूर्वी लद्दाख में आने वाली क़रीब 826 किलोमीटर लंबी LAC के लगभग बीच में पैंगोंग झील पड़ती है।यह एक लंबी, गहरी और ज़मीन से घिरी झील है जो 14,000 फीट से भी ज्‍यादा ऊंचाई पर स्थित है। 135 किलोमीटर लंबी यह झील 604 वर्ग किलोमीटर से भी ज्‍यादा एरिया में फैली है। कहीं-कहीं इसकी चौड़ाई 6 किलेामीटर तक है। इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में स्थित है, जबकि 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में पड़ता है। रणनीतिक रूप से यह झील इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि अगर चीन भारत पर आक्रमण करना चाहे तो उसके पास चुशूल के रास्‍ते घुसने का विकल्‍प है और उसी के रास्‍ते में यह झील पड़ती है।क्या भारत के हिस्से में पुल बना रहा चीन?सैटलाइट की जो नई तस्वीर सामने आई है और उसमें जिस पुल की बात कही जा रही है वह दरअसल, पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग लेक के चीन की तरफ का इलाका है। बताया जा रहा है कि यह ब्रिज झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर 8 से 20 किमी पूर्व में है। 

हमले की स्थिति में हथियार और रसद पहुंचान के लिये 

इस पुल का निर्माण भविष्य में भारतीय सेना के अगस्त 2020 जैसे किसी भी ऑपरेशन का मुकाबला करने के लिए किया जा रहा है। भारतीय सेना ने एक स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 29 और 30 अगस्त 2020 की रात को पैंगोंग त्सो दक्षिणी किनारे की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन पुल खुर्नक से दक्षिणी तट के बीच 180 किमी की दूरी को खत्म कर देगा। इसका मतलब है कि खुर्नक से रुडोक तक का रास्ता पहले करीब 200 किमी की तुलना में अब सिर्फ 40-50 किमी का होगा।
सूत्रों के मुताबिक़ चीन जो पुल बना रहा है वह LAC से 40 किमी की दूरी पर है और भारत भी उसी रफ्तार से सीमावर्ती इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। हाल के समय में टैंक का वजन सहन करने वाले कई पुल और बॉर्डर के क़रीब मजबूत सड़कें बनाई गई हैं। इसका मक़सद साफ है, चीन की तरफ से किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए जल्द ही सैनिकों की टुकड़ी के साथ ही टैंक जैसे भारी सैन्य साजोसामान को बॉर्डर तक पहुंचाया जा सके।

उधर, भारतीय सेना और वायुसेना का अभ्यास बॉर्डर पर लगातार जारी है।तैयारी तो दोनों तरफ हैजानकार लोगों का कहना है कि गलवान वैली क्षेत्र के पास चीन अपनी तरफ के हिस्से में एक पुल बना रहा है। इसके जरिए चीन पूरे अक्‍साई चिन इलाके में भारत के ख़िलाफ़ अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है। चीन ने भारत के अक्‍साई चिन इलाके पर ज़बरन क़ब्ज़ा कर रखा है और अब वहां पर सड़कों और पुलों का जाल बिछा रहा है।चीन ने लद्दाख के गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद साल 2020-21 के बीच अपने निर्माण कार्य को तेज कर दिया है। 15 जून 2020 को झड़प के बाद भारत और चीन की सेनाओं ने गलवान वैली में एक बफर जोन तय किया था। 1 जनवरी को दोनों पक्षों के सैनिकों ने एक दूसरे को मिठाइयां दी और नए साल की शुभकामनाएं दीं। पूर्वी लद्दाख में 20 महीने की तनातनी के बाद अब भी दोनों देशों के बीच गतिरोध सुलझा नहीं है। 

भारत की स्थिति 

पिछले हफ्ते ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में 19 हजार फीट की ऊंचाई पर चिशुल-डेमचोक रोड का उद्घाटन किया जो दुनिया की सबसे ऊंचाई पर मोटर चलाने वाली सड़क है। इससे बॉर्डर पर सैन्य वाहनों की आवाजाही में मदद मिलेगी। फिलहाल एलएसी पर संवेदनशील क्षेत्र में भारत और चीन की तरफ 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं। हाल में चार धाम प्रोजेक्ट को लेकर भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि चीन ने बॉर्डर पर काफी निर्माण किया है और सेना को 1962 जैसी युद्ध की स्थिति टालने के लिए बॉर्डर तक भारी वाहनों को ले जाने के लिए चौड़ी सड़कों की जरूरत है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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