Tuesday, May 30, 2023

सड़कों पर उतरी कांग्रेस, देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

नई दिल्ली। राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता से अयोग्य ठहराने के बाद भी मोदी सरकार के दमन का सिलिसला थमा नहीं है। पुलिस मंगलवार को दिल्ली के लालकिला मैदान से कांग्रेस को मशाल जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी और मशाल जुलूस निकालने के लिए इकट्ठा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में ले लिया। केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर चुन-चुन करके हमला करने की कार्रवाई पर कांग्रेस ने सड़क से लेकर संसद तक विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

देश के मौजूदा माहौल को देखते हुए इस समय कांग्रेस के साथ 19 विपक्षी दल एकजुट हैं। विपक्षी दल लोकतंत्र पर आए संकट से लड़ने के लिए एकजुटता जाहिर कर रहे हैं। कांग्रेस मोदी सरकार पर संविधान और नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगा रही है। राहुल गांधी मामले में जिस तेजी के साथ सुनवाई हुई और अधिकतम सजा सुनाई गई, कांग्रेस उस पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस राहुल गांधी के मामले में जुडीशियरी को मैनेज करने का आरोप लगा रही है तो भाजपा का कहना है कि कांग्रेस और राहुल गांधी के पास ऊपरी अदालत जाने का विकल्प खुला है। कांग्रेस और राहुल गांधी अदालत जाने में देरी क्यों कर रहे हैं?

कांग्रेस का कहना है कि हम बिल्कुल इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जायेंगे। लेकिन इस मुद्दे पर भाजपा अलग-अलग कारण बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

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मशाल जुलूस के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करती पुलिस

कांग्रेस राहुल गांधी की सजा के खिलाफ न केवल अदालत जाने का निर्णय लिया है बल्कि केंद्र सरकार और मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन और सत्याग्रह की योजना की भी घोषणा की है। कांग्रेस ने विपक्षी दलों का मोर्चा बनाकर संसदीय तरीके से सरकार की तानाशाही से लड़ने का ऐलान किया है तो कांग्रेस कार्यकर्ता देश भर में केंद्र सरकार की तानाशाही के विरोध में ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर तक विरोध-प्रदर्शन करेंगे।

कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ मिलकर संसद के अंदर बाहर भाजपा और केंद्र सरकार से लड़ने का मन बना लिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस में इस बात पर भी विचार-विमर्श हुआ कि लोकसभा अध्यक्ष जिस तरह से कांग्रेस औऱ विपक्षी दलों के सांसदों के साथ भेद-भाव करते हैं, क्या उनके खिलाफ “अविश्वास प्रस्ताव” लाया जा सकता है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नेतृत्व को सुझाव दिया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस देना चाहिए। नेतृत्व ने तिवारी से नोटिस का मसौदा तैयार करने को कहा और उन्होंने मंगलवार को इसे सौंप भी दिया है। लेकिन पार्टी ने अभी तक इसे आगे नहीं बढ़ाया है। क्योंकि कुछ विपक्षी दलों ने इस तरह के कदम उठाने पर अपनी अनिच्छा का संकेत दिया था। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता है जो विपक्षी खेमे में विभाजन को बल दे।

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कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल

दरअसल, पिछले दिनों राहुल गांधी के सावरकर पर बयान देने के बाद उद्धव ठाकरे ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। बाद में शरद पवार के हस्तक्षेप के बाद यह मामला शांत हुआ। अब कांग्रेस ने सावरकर पर अपनी पार्टी लाइन को बिना छोड़े सहयोगी दलों का ध्यान रखेगी।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को सभी जिला मुख्यालयों पर और 1 अप्रैल को राज्य की राजधानियों में बाबासाहेब अंबेडकर और महात्मा गांधी की प्रतिमाओं के सामने पार्टी के एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा के साथ विस्तार से विरोध-प्रदर्शन की योजना के बारे में बताया। कांग्रेस 29 मार्च से 8 अप्रैल तक ब्लॉक और मंडल स्तर पर, 15 से 20 अप्रैल तक जिला स्तर पर और 20 से 30 अप्रैल तक राज्य स्तर पर जय भारत सत्याग्रह करेगी। और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर सत्याग्रह होगा।

मीडिया से बात करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, “यह सत्याग्रह राहुल गांधी की गलत सजा और अयोग्यता के विरोध में, और मोदानी द्वारा लोगों के धन और देश के धन की लूट के खिलाफ लोगों की आवाज उठाने के लिए कांग्रेस पार्टी के संकल्प को व्यक्त करने के लिए है।”

उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, अन्य फ्रंटल संगठन और पार्टी के प्रकोष्ठ अप्रैल के पहले सप्ताह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड भेजेंगे, “ज्वलंत मुद्दों पर उनसे सवाल करेंगे।”

वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी दिन-प्रतिदिन के आधार पर अभियान की निगरानी के लिए दिल्ली और राज्यों में वार रूम भी खोलेगी।

इसके साथ ही कांग्रेस ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि के खिलाफ पार्टी द्वारा अभी तक अपील दायर नहीं करने संबंधी सवालों पर कहा कि कानूनी टीम “जितनी जल्दी हो सके” ऐसा करेगी।

बीजेपी द्वारा सवाल उठाए जाने के वाले सवाल कि, फैसले के पांच दिन बाद भी कांग्रेस ने सूरत सत्र न्यायालय में अपील दायर क्यों नहीं की, इस पर मंगलवार को केसी वेणुगोपाल ने कहा “जल्दबाजी में अपील दाखिल नहीं किया जा सकता… हमारी कानूनी टीम सभी पहलुओं को देख रही है। हम इसे यथाशीघ्र करेंगे।”

वेणुगोपाल ने कहा “राहुल गांधी ने साफ बयान दिया है। चाहे उन्हें जेल में डाल दिया जाए या सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया जाए … उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। वह सवाल पूछना जारी रखेंगे।”

वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि पार्टी को अपनी कानूनी टीम पर पूरा भरोसा है, इस आरोप पर कि देरी के लिए कानूनी टीम जिम्मेदार थी, को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “यह कहना कि यह कानूनी टीम की गलती है… परोक्ष रूप से भाजपा सरकार को सही ठहराना है।”

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अपील दायर करने में देरी के पीछे का कारण कोई “साजिश”नहीं बल्कि गुजराती से फैसले के अनुवाद और सबूतों के संग्रह में समय लग रहा था।

सूरत मजिस्ट्रेट अदालत के राहुल को दोषी ठहराने के आदेश पर वेणुगोपाल ने पूछा कि राहुल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा गुजरात में क्यों दायर किया गया जब भाषण कर्नाटक के कोलार में दिया गया था। उन्होंने कहा, “गुजरात का अधिकार क्षेत्र क्या है?…यह राहुल गांधी को अयोग्य ठहराने के लिए स्पष्ट रूप से तैयार की गई परियोजना है।”

कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश ने अपील दायर करने में देरी पर सवाल उठाने को ‘भाजपा के बदनाम अभियान’ का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि “पूरी अयोग्यता मैच फिक्सिंग थी…कानूनी टीम की कमियों के बारे में यह सब बात इस मैच फिक्सिंग से ध्यान हटाने के लिए है…बड़े नेता (भाजपा के) राज्यसभा और लोकसभा में यह बात फैला रहे हैं…कि अपील दायर करने में देरी की वजह कुछ कमियां हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘कालक्रम’ को समझने की जरूरत है। “राहुल गांधी ने 7 फरवरी को भाषण (लोकसभा में गौतम अडानी के खिलाफ आरोपों के बारे में) दिया। 16 फरवरी को (पूर्णेश मोदी, मानहानि मामले में याचिकाकर्ता) को हाई कोर्ट में स्टे मिल गया। 27 फरवरी को बहस शुरू होती है, 17 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया जाता है और 23 मार्च को राहुल को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

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