Monday, December 5, 2022

इधर जस्टिस मुरलीधर के तबादले को केंद्र ने रोका, उधर फेक न्यूज़ प्लांट हो गयी

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आखिर वे कौन सी ताकतें हैं जो जस्टिस एस मुरलीधर के खिलाफ पिछले लगभग तीन सालों से फेक न्यूज़ प्लांट करके उनकी छवि बिगाड़ने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं। अभी एक ओर अक्तूबर में ही ओडीशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस मुरलीधर का मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में तबादले की सुप्रीम कोर्ट कालेजियम की सिफारिश केंद्र सरकार ने नहीं मानी और वहीं दूसरी ओर चीफ जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ फेक न्यूज प्लांट करके उनकी निष्पक्ष छवि को बिगड़ने की कोशिश की गयी।

स्थिति की गंभीरता इससे समझी जा सकती है कि सोशल मीडिया में चल रही फर्जी खबरों के खिलाफ उड़ीसा हाईकोर्ट ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। फर्जी खबरों की कड़ी निंदा करते हुए हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उड़ीसा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे एक वकील द्वारा एक तस्वीर प्रकाशित करके और वास्तविक तथ्यों को जाने बिना पूरी तरह से अपमानजनक और झूठे बयान देकर फर्जी खबरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह तस्वीर 12 मार्च, 2022 को सत्य साईं सेवा संगठन, भुवनेश्वर में ली गई थी। सत्य साईं हृदय अस्पताल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नि:शुल्क मेगा हार्ट कैंप के उद्घाटन का अवसर था।

एडवोकेट श्रीनिवास मोहंती नाम के एक वकील ने अपने फेसबुक अकाउंट में एक तस्वीर प्रकाशित की थी जिसमें लिखा था कि मुख्य न्यायाधीश डॉ एस मुरलीधर ने श्री वीके पांडियन आईएएस, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के निजी सचिव और कुछ अन्य लोगों के साथ आधिकारिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए बंद दरवाजे की बैठक की थी।

समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमआर शाह को आमंत्रित किया गया था। डॉ. जस्टिस एस मुरलीधर को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। श्री वी.के. पांडियन को भी समारोह में आमंत्रित किया गया था।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि तस्वीर ऐसे समय में ली गई है जब मेहमान पुरी से जस्टिस एमआर शाह के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे, इसलिए यह मुख्य न्यायाधीश और श्री पांडियन के बीच ‘बंद दरवाजे की बैठक’ या ‘निजी बैठक’ नहीं थी जैसा कि कहा गया है। वास्तव में यह कोई बैठक नहीं थी। यह एक धर्मार्थ संगठन द्वारा एक सार्वजनिक समारोह था, जो दिल की बीमारियों से पीड़ित ओडिशा के हजारों गरीब बच्चों को मुफ्त इलाज प्रदान कर रहा था।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि न केवल उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बल्कि पूरे न्यायपालिका की संस्था को जानबूझकर बदनाम करने का एक भयावह प्रयास किया गया है। इसके अलावा, मीडिया के कुछ वर्ग ने दुर्भाग्य से समाचार को नकारात्मक बना दिया है।

तथ्यों को सत्यापित किए बिना टिप्पणियां की गईं। इन तथ्यों को इस तरह के समाचार आइटम के प्रकाशन से पहले कार्यक्रम आयोजित करने वाले संगठन और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से भी आसानी से सत्यापित किया जा सकता था।” रजिस्ट्री ने 12 मार्च को सत्य साईं सेवा संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के लिए आधिकारिक निमंत्रण कार्ड भी शेयर किया।

दरअसल चीफ जस्टिस एस मुरलीधर पिछले कुछ दिनों से फेक न्यूज के निशाने पर हैं। हाईकोर्ट ने अपने बयान में कहा है कि यह पहली बार नही है जब जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ फेक न्यूज फैलाई गयी है। दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में रहते हुए जस्टिस मुरलीधर द्वारा एफआईआर दर्ज करने के एक आदेश दिए जाने के बाद भी इसी तरह से फेक न्यूज प्रकाशित की गयी थी, जिसमें कहा गया था कि जस्टिस मुरलीधर ने एक वकील के रूप में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को चुनाव नामांकन दाखिल करने में मदद की थी। जबकि उस तस्वीर में दिख रहे वकील जस्टिस मुरलीधर नहीं होकर कोई अन्य व्यक्ति थे।

श्री सत्य साईं सेवा संस्थान देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जो बच्चों के हृदय रोगों के इलाज के लिए समर्पित है। पूरी तरह निःशुल्क सेवा देने वाले इस अस्पताल में दुनिया भर से आए बच्चों का इलाज किया जाता है। पिछले कुछ सालों में यह संस्थान देश के बाहर भी अपनी पहचान बना रहा है। क्योंकि यह देश का एकमात्र प्राइवेट अस्पताल है जहां दिल का इलाज मुफ्त में होता है। यह पूरी तरह से एक कैशलेस अस्पताल है, जहां सिर्फ देश के ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग अपने बच्चों का इलाज कराने आते हैं।

दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस को फटकार लगाने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर उन दिनों काफी चर्चा में थे। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये दावा किया गया था कि जस्टिस मुरलीधर कांग्रेस नेताओं के करीबी हैं, इसलिए उन्होंने सिर्फ बीजेपी नेताओं के बयान पर ही सवाल उठाए।

पोस्ट में दो तस्वीरों का एक कोलाज था। पहली तस्वीर जस्टिस मुरलीधर की थी, वहीं दूसरी तस्वीर में वे सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी एक अन्य व्यक्ति के साथ किसी कार्यालय में दिख रहे थे। इस तस्वीर के साथ दावा किया गया था कि यही जस्टिस मुरलीधर सोनिया गांधी का चुनावी पर्चा भरवाने उनके साथ जाया करते थे और इस तस्वीर में भी वो यही कर रहे थे। साथ ही पोस्ट में ये भी कहा गया था कि जज बनने से पहले जस्टिस मुरलीधर 10 साल तक कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सहायक भी थे।

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस की कार्यशैली को देखते हुए जस्टिस एस मुरलीधर ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से पूछा था कि भड़काऊ भाषण देने पर कपिल मिश्रा सहित अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। इस सुनवाई के बाद खबर आई कि जस्टिस मुरलीधर का तबादला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया।

दरअसल तस्वीर में सोनिया गांधी के साथ दिख रहे व्यक्ति जस्टिस मुरलीधर नहीं, बल्कि कांग्रेस के कानूनी सलाहकार और सुप्रीम कोर्ट वकील केसी कौशिक थे। ये तस्वीर उस समय की थी, जब सोनिया गांधी ने रायबरेली से अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया था। ये बात भी गलत थी कि एस मुरलीधर मनीष तिवारी के सहायक रहे थे। केसी कौशिक भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस एस मुरलीधर ने सितंबर 1984 में चेन्नई से वकालत शुरू की थी। जस्टिस मुरलीधर ने 1987 में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत शुरू कर दी थी। साल 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया। जस्टिस मुरलीधर दो बार सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सक्रिय सदस्य रहे हैं। 1984 में हुए सिख दंगों में शामिल रहे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के मामले में भी जस्टिस मुरलीधर फैसला सुनाने वालों में से एक थे।

जस्टिस मुरलीधर ने 1987 में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। वे बिना फीस के केस लड़ने के लिए चर्चित रहे हैं, इनमें भोपाल गैस त्रासदी और नर्मदा बांध पीड़ितों के केस भी शामिल हैं। 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया। जस्टिस मुरलीधर साम्प्रदायिक हिंसा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर सख्त टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के हाशिमपुरा नरसंहार में दोषी पीएसी जवानों को सजा सुनाई थी। इसके अलावा 1984 दंगा केस में कांग्रेस नेता सज्जन सिंह को दोषी ठहराया। समलैंगिकों के साथ भेदभाव पर फैसला देने वाली बेंच में शामिल रह चुके हैं।

दिल्ली में हुए दंगों के बाद अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ सख्त टिप्पणी करने वाले जज का ट्रांसफर केंद्र सरकार ने रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस काम कर रहे जस्टिस एस मुरलीधर का ट्रांसफर मद्रास हाईकोर्ट में करने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार की तरफ से इसे मंजूरी नहीं दी गई। जबकि दूसरे तीन जजों के ट्रांसफर को हरी झंडी दिखा दी गई।

दरअसल 28 सितंबर22 को कोलेजियम ने जस्टिस पंकज मिथल को राजस्थान और जस्टिस एस मुरलीधर को मद्रास हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी।ये सिफारिश केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस तक पहुंचाई गई, जिसके बाद सरकार की तरफ से फैसला लिया गया। सरकार की तरफ से जस्टिस मिथल के ट्रांसफर को मंजूरी दी गई, जो इससे पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। इनके अलावा सरकार ने 28 सितंबर को पीबी वराले को कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी थी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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