Saturday, December 4, 2021

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किसान कानूनः राष्ट्रपति के अभिभाषण का दोनों सदनों में बहिष्कार करेगा विपक्ष

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बजट सत्र के पहले दिन, 29 जनवरी शुक्रवार को राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने वाले हैं। मोदी सरकार के नये कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस सहित 16 विपक्षी दलों ने एक साथ संसद में राष्ट्रपति के इस संबोधन भाषण का बहिष्कार करने का एलान किया है। इन दलों में कांग्रेस के अलावा एनसीपी, नेशनल कान्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना शिवसेना, सीपीआई (एम), सीपीआई, पीडीपी, एमडीएमके, आईयूएमएल, आरएसपी, आरजेडी, केरल कांग्रेस (एम) और एआइयूडीएफ शामिल हैं। वहीं बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन और सत्ता में रही शिरोमणि अकाली दल ने भी कल राष्ट्रपति के भाषण के बहिष्कार की घोषणा की है।

इन दलों द्वारा जारी एक संयुक्त विज्ञप्ति में इसकी मुख्य वजह यह बताई गई है कि कृषि बिलों को सदन में जबरन विपक्ष के बिना पास कराया गया है। बयान में कहा गया है कि किसानों की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार अहंकारी, अड़ियल और अलोकतांत्रिक बनी हुई है। सरकार की असंवेदनशीलता से स्तब्ध हम विपक्षी दलों ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग दोहराते हुए और किसानों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए यह फैसला किया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया जाएगा।

विपक्षी दलों का पूरा बयान:

भारत के किसान मिलकर तीन खेती विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जो भाजपा सरकार ने मनमाने ढंग से उन पर थोपकर लागू कर दिए हैं। ये कानून भारत की कृषि के लिए बड़ा खतरा हैं, जिस पर देश की 60 प्रतिशत जनता एवं करोड़ों किसान, बंटाईदार और खेत मजदूर की आजीविका निर्भर है।

दिल्ली की सीमाओं पर कड़कड़ाती सर्दी और भारी बारिश के बावजूद लाखों किसान पिछले 64 दिनों से अपने अधिकारों व न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 155 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूँ नहीं रेंग रही, उल्टा भोले-भाले किसानों के ऊपर वाटर कैनन, आँसू गैस के गोले और लाठियां बरसाई गई हैं। एक जायज जन आंदोलन को बदनाम करने की बदनीयत से सरकार द्वारा प्रायोजित दुष्प्रचार के द्वारा किसानों पर कीचड़ उछालने का हर संभव प्रयास किया गया है।

यह आंदोलन और विरोध प्रदर्शन प्रायः शांतिपूर्वक रहा है। दुर्भाग्य से 26 जनवरी, 2021 को दिल्ली में हिंसा की कुछ घटनाएं हुईं, जिनका हर जगह एक स्वर और स्पष्ट रूप से निंदा हुई। हम भी मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के जवानों को चोट लगने पर अपना दुख व्यक्त करते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि यदि इन घटनाओं की निष्पक्ष जाँच हो, तो इन घटनाओं को अंजाम देने के लिए केंद्र सरकार की नापाक भूमिका सबके सामने खुलकर आ जाएगी।

तीन कृषि कानून राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण और संविधान की संघीय भावना का उल्लंघन करते हैं। यदि इन कानूनों को निरस्त नहीं किया गया, तो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और जन वितरण प्रणाली यानि पीडीएस के स्तंभों पर आधारित है। कृषि अध्यादेश राज्यों, किसान संगठनों की सलाह के बगैर लाए गए थे और इसमें राष्ट्रीय सहमति नहीं थी। इन कानूनों की संसदीय समीक्षा नहीं हुई और विपक्ष की आवाज दबाकर, संसदीय नियमों, प्रथाओं व परंपराओं को ताक पर रखते हुए इन कानूनों को देश पर थोप दिया गया। इन कानूनों की संवैधानिकता ही सवालों के घेरे में है।

प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार अहंकारी, जिद्दी एवं अलोकतांत्रिक रवैया अपनाए हुए है। सरकार की असंवेदनशीलता से आहत होकर, हम यानि निम्नलिखित विरोधी दलों ने भारतीय किसानों के साथ खड़े रहते हुए किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने की सामूहिक मांग के लिए शुक्रवार, 29 जनवरी, 2021 को संसद के दोनों सदनों में माननीय राष्ट्रपति महोदय के संबोधन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता और राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इन नये काले कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया है और आगे भी करता रहेगा, इसलिए उनकी पार्टी भी राष्ट्रपति के भाषण का बहिष्कार करेगी।

इस बीच गाज़ीपुर बॉर्डर पर पुलिस एक्शन के बाद सिंघु बॉर्डर पर भी कार्यवाही तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सभी डीएम और एसएसपी को आदेश जारी कर राज्य से सभी किसान आंदोलन को समाप्त करने को कहा है।

सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने जेसीबी लगा कर दिल्ली से जुड़ने वाली सड़क पर गहरा गड्ढा खोद दिया है।

यूपी के एडीजी ने कहा है कि 26 जनवरी को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कुछ किसान संगठनों ने स्वेच्छा से चिल्ला बॉर्डर, दलित प्रेरणा स्थल से आंदोलन वापस ले लिया। बागपत में लोगों को समझाने के बाद उन्होंने रात में धरना खत्म कर दिया। यूपी गेट पर अभी कुछ लोग हैं, उनकी संख्या काफी कम हुई है। उधर पलवल में भी 58 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने हरियाणा सरकार के दबाव में जगह खाली कर दी है।

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इस बीच गाजीपुर में धरना स्थल पर किसान एकता मंच के पास पुलिस प्रशासन के पहुंचने से माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया है। मंच से राकेश टिकैत ने कहा कि ऊपर प्रशासन और नीचे बीजेपी के नेता आए हैं। इन लोगों ने गद्दारी की है। उन्होंने किसानों और सिख समुदाय को बदनाम करने का काम किया है।

राकेश टिकैत ने मंच से कहा कि कोई गिरफ़्तारी नहीं देंगे और यहां अगर कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

(वरिष्ठ पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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