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नागपुर जेल में बंद जीएन साईंबाबा के जान का खतरा बढ़ा, परिजनों ने कहा-उनके लिए मौत का फरमान होगा कोरोना संक्रमण

नई दिल्ली। क्रांतिकारी कवि वरवर राव के बाद अब नागपुर जेल में बंद प्रोफेसर जीएन साईंबाबा के सामने भी स्वास्थ्य संबंधी भीषण खतरा पैदा हो गया है। जीएन साईंबाबा की पत्नी बसंता कुमारी और मां सूर्यवती ने बताया कि नागपुर जेल में कोविड-19 का बड़े स्तर पर फैलाव हो गया है। सैकड़ों की संख्या में कैदी संक्रमण की चपेट में आ गए हैं और यह संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि जेल के गार्ड भी सुरक्षित नहीं हैं। और इसके चलते जेल में बंद प्रोफेसर जीएन साईंबाबा के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि एक बार अगर वह इसकी चपेट में आ गए तो फिर उनके लिए इससे उबर पाना मुश्किल होगा क्योंकि वह पहले से ही कई गंभीर बीमारियों के शिकार हैं उसमें कोरोना का संक्रमण उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पत्नी और मां ने बताया कि 15 जुलाई को उनकी जीएन साईंबाबा से बात हुई थी। जेल अथारिटीज ने इसके लिए उनको स्पेशल अनुमति दी थी। आपको बता दें कि प्रोफेसर साईंबाबा तकरीबन 80 फीसदी विकलांग हैं और उन्हें नक्सल गतिविधियों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है।

पत्नी और मां के मुताबिक साईंबाबा ने उनसे कहा कि “बीमारी मेरे बेहद नजदीक तक पहुंच चुकी है। और अब यह सिर्फ समय की बात है जब वह उनके सेल तक पहुंच जाएगी।” उन्होंने कहा कि उनके स्वास्थ्य की खराब स्थितियों के चलते किसी भी तरह का संक्रमण उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

जेल अथारिटीज ने उन्हें कोई हेल्पर भी नहीं दिया है। जिसके चलते उन्हें बेहद बदबूदार और गंदगी भरे वातावरण में रहना पड़ रहा है। पत्नी बसंता कुमारी का कहना था कि अगर उन्हें संक्रमण हो जाता है तो वह एक सेल तक सीमित हो जाएंगे जिसमें उनके पास कोई हेल्पर नहीं होगा। इसके साथ ही उन्हें अपने परिवार के साथ जाने की इजाजत भी नहीं होगी। लिहाजा उनके लिए यह किसी फांसी की सजा से कम नहीं होगा। क्योंकि वह संक्रमण के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

दोनों महिलाओं ने बताया कि इसके पहले 6 जुलाई को बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनके स्वास्थ्य की स्थिति बेहद खराब है। जेल अथारिटीज द्वारा लॉक डाउन के दौरान उन्हें दो बार नागपुर सरकार के सुपर स्पेशियलटी हास्पिटल में ले जाया गया था। जहां पर उन्हें पांच से ज्यादा विभागों में दिखाया गया था। जिसमें उनको टेस्ट के साथ ही दर्द की दवा के सेवन का सुझाव दिया गया था। उन्होंने

बताया कि अस्पताल ने मस्तिष्क का एमआरआई किया था। उनका कहना था कि दूसरी टेस्ट रिपोर्ट को उन्हें नहीं दिखाया गया था। उन्होंने बताया कि बार-बार गुजारिश करने के बावजूद सितंबर 2018 के बाद से कोई भी टेस्ट रिपोर्ट उन्हें नहीं दिखायी गयी है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि मेडिकल रिकार्ड न होने के चलते उनके बारे में परिवार के डॉक्टर से भी कोई सलाह नहीं ली जा सकती है।

बताया जाता है कि नागपुर सुपर स्पेशियलटी अस्पातल के डॉक्टरों ने 25 जून, 2020 को गाल ब्लैडर को निकालने के लिए सर्जरी का सुझाव दिया था। लेकिन इस महामारी के दौर में इस तरह की किसी भी सर्जरी से बचने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही अस्पताल ने एहतियात के तौर पर कई चीजों के सेवन का सुझाव दिया था जिसे जेल की तरफ से साईंबाबा को मुहैया कराया गया।

पत्नी बसंता कुमारी के साथ साईंबाबा।

पत्नी और मां ने बताया कि उन्हें कोई हेल्पर न मुहैया कराए जाने से दैनिंदिन के कामों में बहुत दिक्कत होती है। जिसमें शौचालय के समय उन्हें भीषण परेशानियों से गुजरना पड़ता है। किसी के साथ न होने के चलते उन्हें गंदे कपड़े पहनने पड़ रहे हैं और गंदे बिस्तरों पर सोना पड़ रहा है।

बसंता कुमारी ने बताया कि मार्च से ही उनका अखबार बंद कर दिया गया है। उनका कहना था कि प्रोफेसर साईंबाबा का बायां हाथ तकरीबन काम करना बंद कर दिया है। नर्वस सिस्टम के प्रभावित होने के चलते ऐसा हुआ है। साथ ही उनके दोनों हाथों में ऊपर से लेकर अंगुलियों तक बेहद दर्द रहता है।

उनके पहले पैरोल का आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि सैबराबाद कमिश्नर की रिपोर्ट के मुताबिक उनके भाई के निवास वाला इलाका कोविड के डैंजर जोन में आता है। लिहाजा वहां भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है। उसके बाद उनके भाई ने एक बार फिर तकरीबन एक महीने पहले पैरोल के लिए आवेदन दिया लेकिन संबंधित जेल अथारिटी की ओर से उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।

14 जुलाई को एक बार फिर उनकी तरफ से बॉम्बे हाईकोर्ट में मेडिकल आधार पर एक याचिका दायर की गयी है। जिसमें कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की सुनवाई जुलाई के आखिरी सप्ताह में होगी।

पत्नी बसंता कुमारी ने बताया कि साईंबाबा को कई घातक बीमारियां हैं। जिसमें पैंक्रियाज संबंधी बीमारी के साथ ही उच्च रक्त चाप, दिल की बामारी, पीठ में भीषण दर्द और रात में नींद न आने जैसी बीमारियां शामिल हैं। और लगातार मेडिकल संबंधी लापरवाहियों के चलते ये बीमारियां खतरनाक रूप धारण करती जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियों द्वारा दबाव बनाए जाने के बावजूद अदालतें लगातार उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर रहे हैं। बगैर किसी कारण के लगातार जमानत का खारिज किया जाना किसी नागरिक को संविधान में दिए गए आर्टिकल 21 के तहत मूल अधिकार का खुला उल्लंघन है।

बयान के आखिरी हिस्से में उन्होंने कहा है कि इस तरह के किसी स्थान पर कोविड-19 वायरस का फैलना प्रोफेसर जीएन साईंबाबा के लिए मौत के फरमान जैसा होगा। इस तरह की बेहद चिंतनीय स्वास्थ्य स्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से उन्हें तत्काल रिहा करने की अपील की है। जिससे उन्हें तत्काल जरूरी इलाज मुहैया कराया जा सके। और यह काम हैदराबाद या फिर दिल्ली दोनों में से कहीं भी हो सकता है जहां उनके परिजन रहते हैं।

This post was last modified on July 15, 2020 7:51 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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