Saturday, March 2, 2024

ग्राउंड रिपोर्ट: ओबरा सी तापीय परियोजना में काम कर रहे मजदूर न्यूनतम मजदूरी से वंचित

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश की ऊर्जांचल नगरी कही जाने वाली सोनभद्र जिले के ओबरा में स्थित सरकारी ईकाई के निर्माणाधीन ओबरा (सी) परियोजना में मजदूरों से आधुनिक गुलामी कराई जा रही है। तमाम कंस्ट्रक्शन कंपनियों में मजदूरों से 12 घंटे काम कराया जा रहा है और न्यूनतम मजदूरी का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। हालत इतनी बुरी है कि कई-कई महीना मजदूरों की मजदूरी बकाया रह जा रहा है। विडंबना यह कि मजदूर खुलकर अपनी पीड़ा को बताने से भी कतराते हैं। वजह यह कि कहीं उनके उपर परियोजना प्रबंधन का कोई खतरा न मंडराने लगे।

ओबरा सी तापीय परियोजना में काम करने वाले श्रमिक नाम न छापे जाने की शर्त पर ‘जनचौक’ को बताते हैं कि “वह सुबह 4:30 बजे सो कर उठ जाते हैं और नित्यकर्म व खाना बनाने आदि की क्रिया के बाद 7:30 बजे तक ड्यूटी पहुंच जाते हैं। जहां से रात 8:00 बजे काम से वापस आते हैं और रात को 11:00 बजे तक सो पाते हैं। लगातार इस तरह से कराए जा रहे काम से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है वहीं उनकी सेहत भी बिगड़ रही है। भरपूर नींद पूरी न होने से थकान सहित कई शारीरिक मानसिक समस्या बनी हुई रहती है।”

और तो और तापीय परियोजना प्रबंधन माह में चार छुट्टी देने की जगह मात्र दो छुट्टी ही दे रहा है। जिससे काम का अत्यधिक दबाव बना हुआ है। इस काम का उन्हें 14000 रुपए महीना दिया जा रहा है जो प्रदेश सरकार के न्यूनतम वेतन से कम है। यह मजदूरों की जीवन सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। ओबरा में मजदूरों से संवाद करते हुए यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि “यह मजदूरों के साथ घोर अन्याय और गुलामी मानसिक का परिचायक है।”

मजदूरों से अत्यधिक काम लिए जाने को लेकर मजदूरों में अंदर ही अंदर पनप रहे आक्रोश के गुबार के सवाल पर वह बताते हैं कि ठेका मजदूर यूनियन के 18 फरवरी को पिपरी में आयोजित होने वाले सम्मेलन में इस मसले पर गहनता पूर्वक रणनीति बनाई जाएगी और मजदूरों के शोषण प्रवृत्ति पर रोक लगाने पर भी खुलकर चर्चा विमर्श होगा।

दरअसल, ओबरा में निर्माणाधीन ओबरा (सी) तापीय परियोजना में कार्यरत मजदूरों से अत्यधिक काम लिए जाने का मामला कोई नया नहीं है। श्रमिकों के हितों को लेकर संघर्षरत संगठनों की माने तो यहां मजदूर खुले मन से नहीं बल्कि एक बंदी के तौर पर कार्य करने को विवश हैं। सीधा असर उनके मन मस्तिक पर पड़ता हुआ परिलक्षित नजर आता है।

ओबरा सी में हो रही आधुनिक गुलामी : वर्कर्स फ्रंट

ठेका मजदूर यूनियन सोनभद्र के जिला संयुक्त मंत्री मोहन प्रसाद की माने तो “ओबरा सी इकाई के 2016 से प्रारंभ हुए कंस्ट्रक्शन कार्य को लेकर इकाई की कार्यगति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कार्य में लगे मजदूर मानसिक दबाव और भारी थकान बोझिल नजरों के बीच कार्य करने को विवश हो रहे हैं। पेट और परिवार के लिए वह सेहत से खिलवाड़ करते हुए आ रहें हैं।”

मजदूरों की यह समस्या किसी एक से नहीं कमोवेश सभी से जुड़ी हुई है। सभी के शब्दों में पीड़ा और परेशानी के साथ खुलकर कह, बोल न पाने की तड़प भी साफ तौर पर देखा समझा जा सकता है। एक अन्य मजदूर नाम न छापे जाने के शर्त पर बताते हैं कि “दो शिफ्ट में काम के कारण एक शिफ्ट के मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया गया है। पहले 8 घंटे की 3 शिफ्ट चलती थी और अब दो ही शिफ्ट में काम कराया जा रहा है। हेल्पर को ₹12000 महीने की मजदूरी दी जा रही है जो 8 घंटे काम की 295 रुपए बनती है और सरकार द्वारा तय 395 रुपए दैनिक से ₹100 कम है। इस तरह से मजदूरी की बहुत बड़े पैमाने पर लूट हो रही है। यों कहें कि मजदूरों के श्रम पर भी प्रबंधन तंत्र डाका डालने से बाज नहीं आ रहा है।”

यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व श्रम बंधु दिनकर कपूर “जनचौक” को बताते हैं कि “कोरोना काल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा काम के घंटे 12 करने की कोशिश की गई थी। जिसे हाईकोर्ट में हमारे हस्तक्षेप के बाद सरकार को वापस लेना पड़ा था। मोदी सरकार संसद से पारित किए गए लेबर कोड के जरिए काम के घंटे 12 करने की कोशिश कर रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे विरोध के कारण अभी लागू नहीं कर पाई है।”

वह बताते हैं इसके खिलाफ श्रम विभाग को पत्र भेजा जाएगा और जांच कराने की मांग की जाएगी। वह आगे भी बोलते हैं कि प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन ना होने के कारण मजदूरी बेहद कम है और इस महंगाई में मजदूरों के लिए अपना जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा है। विधान परिषद में श्रम मंत्री ने भी स्वीकार किया है कि शीघ्र ही प्रदेश में लिए वेज बोर्ड का गठन किया जाएगा।

ठेका मजदूर यूनियन के सम्मेलन में उठेगी आवाज

सोनभद्र के विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों की विभिन्न लंबित, ज्वलंत मुद्दों समस्याओं को लेकर 18 फरवरी को होने वाले सम्मेलन में पूरी दमदारी के साथ आवाज उठाने की तैयारी है। मजदूरों की माने तो ठेका प्रथा के जरिए मजदूरों से काम लेने के साथ ही साथ उनका आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न भी जोरों पर है। सोनभद्र जिले के विभिन्न इकाइयों में कार्यरत मजदूरों का जमकर शोषण हो रहा है।

उप श्रमायुक्त से की गई शिकायत

निर्माणाधीन ओबरा सी तापीय परियोजना में विधि विरुद्ध 12 घंटे की दो शिफ्ट में मजदूरों से कराए जा रहे काम की जांच कराने के संदर्भ में उप श्रमायुक्त विंध्याचल मंडल, पिपरी, सोनभद्र से करते हुए शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। ओबरा सी तापीय परियोजना में  मजदूरों के हवाले से प्राप्त जानकारी के आधार पर नियम विरुद्ध मजदूरों से 12 घंटे दो शिफ्ट में काम कराये जाने की शिकायत की गई है। वहीं दूसरी ओर इसकी जांच के लिए 8 फरवरी 2024 को यूपी वर्कर्स फ्रंट की टीम ने निर्माणाधीन ओबरा सी तापीय परियोजना के मजदूरों के साथ संवाद किया तो इस बात की पुष्टि भी हुई।

मुख्यमंत्री के समक्ष उठ सकता है मामला  

सोनभद्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम के मद्देनजर अधिकारियों की जहां धड़कनें बढ़ गई हैं तो वही ओबरा सी तापीय परियोजना प्रबंधन भी सतर्क नजर आने लगा है खास करके मजदूरों के मुद्दे पर इनकी भी सांसे टंगी हुई नजर आ रही हैं। दूसरी और बताया जा रहा है कि श्रमिक संगठनों सहित स्वयं मजदूर भी अपनी पीड़ा को लेकर मौका मिलने पर मुख्यमंत्री से व्यथा कहने से पीछे नहीं हटेंगे। मजदूरों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के कानों तक उनकी पीड़ा पहुंचने पर निश्चित ही उनका कुछ हल-भला हो सकता है।

मुख्यमंत्री के भ्रमण मद्देनजर ओबरा सी तापीय परियोजना में बढ़ी चौकसी

सोनभद्र जिले में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम के मद्देनजर तापीय परियोजना ओबरा सी का शुक्रवार को जिलाधिकारी सोनभद्र चंद्र विजय सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ यशवीर सिंह द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

जिलाधिकारी ने मुख्य महाप्रबंधक तापीय परियोजना सी व संबंधित अधिकारियों के साथ तैयारी संबंधी समन्वय बैठक की। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों के साथ हेलीपैड स्थल, कार्यक्रम स्थल गांधी मैदान ओबरा, तापीय परियोजना कुलीन टावर आदि का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहा कि कार्यक्रम स्थल पर बैरेकेटिंग व्यवस्था, झाड़ियों की कटाई, पीने हेतु शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, परिसर में साफ सफाई, शौचालय, वाहन पार्किंग, लोगों के आवागमन आदि की व्यवस्था बेहतर तरीके से किया जाए। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए।

(सोनभद्र से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट)

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