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होंडा के मजदूरों का धरना आज छठें दिन भी जारी, रात भर डटे रहे मजदूर

नई दिल्ली/गुड़गांव। गुड़गांव स्थित होंडा के मजदूरों का आज छठे दिन भी धरना जारी रहा। तकरीबन 1600 से लेकर 2000 के आस-पास मजदूर फैक्ट्री के गेट और उसके भीतर धरने पर बैठे रहे। प्रबंधन ने इन सभी मजदूरों को कंपनी से निकालने की घोषणा कर दी है।

आपको बता दें कि कंपनी में कुल 2500 मजदूर ऐसे हैं जो ठेके पर हैं। जबकि स्थायी मजदूरों की संख्या 2000 है। कंपनी के प्रबंधकों ने मंदी का हवाला देकर कांट्रेक्चुअल वर्करों को निकालने का फरमान जारी कर दिया है। जिसका मजदूर विरोध कर रहे हैं। लेकिन सभी मजदूर अपने निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर कंपनी निकालना ही चाहती है तो उसे इतना मुआवजा देना चाहिए जिससे मजदूरों के बच्चों और परिवार का भरण-पोषण हो सके। मजदूरों का कहना है कि कितने सारे मजदूर 40 के पार चले गए हैं लिहाजा उनके लिए कहीं काम भी मिल पाना मुश्किल है। ऐसे में यह कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके भविष्य की व्यवस्था करे।

एचएमएसआई इंप्ल्वाइज यूनियन के अध्यक्ष सुरेश गौड़ ने जनचौक से बातचीत में कहा कि प्रबंधन मंदी को बहाना बनाकर मजदूरों को निकालने की साजिश कर रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि होंडा के राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात में स्थित तीन प्लांटों में किसी तरह की मंदी नहीं है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर इन तीन प्लांटों में मंदी नहीं है तो फिर गुड़गांव प्लांट में भला कैसे मंदी आ गयी। उन्होंने बताया कि गुड़गांव प्लांट से महज 20 किमी दूर राजस्थान में स्थित तपूगड़ा प्लांट में कोई मंदी नहीं है। लिहाजा यह कहना है कि गुड़गांव में मंदी है बिल्कुल झूठी बात है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन के झूठ की कलई अक्तूबर में आयी रिपोर्ट खोल देती है। जिसमें बताया गया है कि टू ह्वीलरों की कटेगरी में होंडा की बिक्री टॉप पर थी। उन्होंने कहा कि प्रबंधन मंदी की आड़ में मजदूरों की छटनी करना चाहता है।

मजदूरों का यह धरना छह दिन पहले शुरू हुआ था। तब से दिन-रात लगातार जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा के लेबर डिपार्टमेंट ने हस्तक्षेप किया है। और वह लगातार दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश में जुट गया है। डिप्टी लेबर कमिश्नर अजय पाल डूडी, रमेश आहूजा तथा असिस्टेंट लेबर कमिश्नर अभिषेक मलिक के नेतृत्व में यह कोशिशें जारी हैं। हालांकि अभी तक तीनों पक्षों की एक साथ कोई बैठक नहीं हो सकी है। यूनियन के नेता सुरेश गौड़ का कहना है कि लेबर डिपार्टमेंट मजदूरों और कंपनी के प्रबंधन से अलग-अलग बातचीत कर रहा है। अभी तक तकरीबन छह चक्र की वार्ताएं हो चुकी हैं। लेकिन उनका कोई नतीजा नहीं निकला है।

इस बीच धरने पर बैठे लोगों की परेशानियां शुरू हो गयी हैं। जिसमें ट्वायलेट से लेकर भोजन तक की समस्याएं शामिल हैं। सुरेश का कहना है कि कंपनी प्रबंधन मजदूरों को सुविधाएं देने की जगह लगातार उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश कर रहा है। कैंटीन के बंद होने से भोजन की समस्या खड़ी हो गयी है। इसके साथ ही ट्वायलेट और बाथरूम तक को बंद कर दिया गया है।

आपको बता दें कि एक महीना पहले भी मजदूर धरने पर बैठे थे। जिसमें कंपनी मालिकान ने पालिसी बनाने का मजदूरों को भरोसा दिलाया था। इस आश्वासन के बाद मजदूरों ने धरना वापल ले लिया था। लेकिन कंपनी अपने वादों को नहीं पूरा की। और नये सिरे से मजदूरों की छटनी का फरमान जारी कर दिया। हालांकि मजदूरों के इस आंदोलन को गुड़गांव की दूसरी यूनियनों का भी समर्थन हासिल है। कंपनी में काम करने वाले स्थाई मजदूर भी हड़ताली मजदूरों के साथ खड़े हैं। इस बीच, प्लांट पूरी तरह से बंद हो गया है और उसमें किसी तरह का उत्पादन कार्य नहीं हो रहा है।

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