Tuesday, October 26, 2021

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पूर्वांचल में बढ़ता आत्महत्याओं का ग्राफ

भूख, गरीबी, कर्ज और अपराध की गिरफ्त में पूर्वांचल का समाज, अवसाद की अंधेरी कोठरी में समाने लगा है। स्थिति नियंत्रण से बाहर दिख रही है और जागरुक लोग चिंतित हैं कि आखिर इसका समाधान क्या है? किसान और...

बंधुआ जिंदगी से आजाद होकर 30 सालों बाद अपने परिजनों से मिले फुचा महली

झारखंड के गुमला जिले का फोरी गांव 3 सितंबर को एक अद्भुत मौके का गवाह बना जब वहां के रहने वाले 60 वर्षीय फुचा महली (आदिवासी) 30 वर्षों बाद अपने परिजनों से मिले। बताया जा रहा है कि वह 30...

रोजगार की मांग को लेकर सेंचुरी के सैकड़ों मजदूर इंदौर पहुंचे, मेधा पाटेकर के नेतृत्व में रैली निकाली

इंदौर। पिछले 45 महीनों से आंदोलनरत सेंचुरी के श्रमिक कल सुबह इंदौर पहुंचे और उन्होंने लोहा मंडी से कमिश्नर कार्यालय तक रैली निकाली तथा बाद में श्रम आयुक्त कार्यालय पर जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया और दिन भर...

जयंती पर विशेष: प्रेमचंद की दृष्टि में मध्यवर्ग और किसान

सामान्यत: यह माना जाता है कि मध्य वर्ग की किसी भी आंदोलन, क्रांति और विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मध्यवर्ग का एक हिस्सा शासन का पैरोकार और दूसरा हिस्सा आंदोलनों की आवश्यकता का हिमायती होता है। यह दूसरा...

इंदौर: आंदोलनकारी मजदूरों के समर्थन में मेधा पाटकर ने भी शुरू किया उपवास

इंदौर। सेंचुरी यार्न/ डेनिम इकाई के श्रमिकों के द्वारा 1366 दिन से मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एबी रोड पर सतराटी में चलाए जा रहे आंदोलनकारी संगठन, श्रमिक जनता संघ को पत्र लिख कर 75 से ज्यादा संगठनों और...

बच्चे पालने के सवाल पर स्त्री और पुरुष के बीच पैदा हुआ पहला श्रम विभाजन

मानव विज्ञान में खुद को लगा देने का उनका संकल्प महज किसी बौद्धिक उत्सुकता का परिणाम नहीं था । इसका गहरा राजनीतिक-सैद्धांतिक मकसद था । गहन ऐतिहासिक ज्ञान के आधार पर वे वास्तविकता के सबसे करीब के उस क्रम...

सरकार की प्राथमिकता में, न तो किसान हैं, और न ही कामगार!

सोशल मीडिया पर एक फोटो और एक खबर घूम रही है कि एक किसान नेता एसी में आराम कर रहे हैं। उस पर बहुत से कमेंट आये। कुछ मज़ाकिया तो कुछ उपालम्भ भरे, कुछ तंजिया तो कुछ हास्यास्पद। यह...

कैलाश सत्‍यार्थी ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए बच्चों के बजट को बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस की पूर्व संध्‍या पर कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा ‘कोविड-19 और बाल श्रम उन्मूलन’ विषय पर एक राष्‍ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी ने बाल श्रम...

दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी के खाते में जहालत, अपमान और पल-पल की मौत

जी हां, यह वर्तनी की गलती नहीं है, बल्कि यही आज की कड़वी सच्चाई है। हम अक्सर देश और राष्ट्र के निर्माताओं को चंद नायकों-महानायकों में खोजते और उनके नामों पर तो बहसें करते रहते हैं लेकिन हमारे देश...

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के बाद आखिर क्या है आगे का रास्ता?

ऐतिहासिक किसान आंदोलन जो पिछले 6 महीने से दिल्ली की सरहदों पर चल रहा है। 26 नवम्बर को जब किसान दिल्ली की तरफ कूच कर रहे थे उस समय मीडिया ने सवाल पूछा था कि कब तक के लिए...
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हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित...
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