Tuesday, December 7, 2021

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मोदी का महाजुमला है 26 करोड़ के वैक्सीनेशन को 100 करोड़ बताना

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“जब एन-95 मास्क और ग्लव्स आ जाये तो उन्हें मेरी क़ब्र पर पहुंचा देना। वहां ताली और थाली भी बजा देना।” 23 मार्च, 2020 को डॉ. कामना कक्कड़ का ट्वीट, कोरोना मरीजों के साथ मौत का मॉकड्रिल करके 5 मिनट में 22 मरीजों का मारने का आगरा के पारस अस्पताल के संचालक डॉक्टर अरिन्जय जैन का कबूलनामा वाला 8 जून 2021 का वीडियो, बत्रा अस्पताल, सर गंगाराम अस्पताल में अप्रैल महीने में कोर्ट में ऑक्सीजन की सुनवाई के दौरान लोगों की ऑक्सीजन की कमी से मौत, लाखों दर्ज़ और लाखों आंकड़ाविहीन मौतें हैं जिनकी कब्र पर खड़ी होकर देश की नरेंद्र मोदी ( आरएसएस-भाजपा) सरकार देश में 100 करोड़ कथित वैक्सीनेशन का जश्न मना रही है।

 क्या 100 करोड़ वैक्सीनेशन का जश्न मोदी को कोरोनाकाल की लाखों लाशों से मुक्ति दिलाएगा

ज़श्न का आलम यह है कि कथित 100 करोड़ टीकाकरण होते ही समुद्री जहाजों पर सायरन बजाये गये। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने देश की 126 ऐतिहासिक धरोहरों को सजाया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लाल किले में कोरोना से जुड़ा गीत व वीडियो जारी किया, जिसे कैलाश खेर ने गाया है। इसके अलावा लालकिला पर 1400 किलो वजनी खादी का तिरंगा फहराया गया। मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर लगे तमाम डिजिटल पैनलों पर 100 करोड़ टीकाकरण की उपलब्धि को बार बार चलाया गया। इतना ही नहीं स्पाइसजेट ने एक विमान पर प्रधानमंत्री मोदी और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेष तस्वीर बनायी। स्वास्थ्यमंत्री मनसुख मंडाविया और स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह ने आईजीआई एयरपोर्ट पर इसका अनावरण किया।

वहीं फोन पर रिकॉर्ड वॉयस में मोदी जी देश को बधाई दे रहे हैं अपने दम पर 100 करोड़ कोविड टीका लगाने की। अख़बारों की हेडलाइंस कल 100 करोड़ टीके की ही थी, साथ में कथित 100 करोड़ वें टीकाधारी बनारस के अरुण रॉय के साथ मोदी की तस्वीर भी है। तस्वीर से साफ जाहिर है इसे यूपी चुनाव से पहले सब मैनेज करके किया गया है। वर्ना क्या गर्ज़ है कि कथित 100 करोड़वां टीका मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के ही किसी व्यक्ति को लगता। वो तो देश के किसी भी कोने में किसी को भी लग सकता था। और कथित 100 करोड़वें  टीके के फ्रेम में नरेंद्र मोदी भी खड़े हों मास्क में मुंह छुपाये।

जाहिर है नरेंद्र मोदी मैनेजमेंट से चीजों को अपने पक्ष में मैनेज करने और हाइप देकर जनमत प्रभावित करने का जादू जानते हैं। तभी तो 17 सितंबर 2021 को प्रधानंमत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के जन्मदिन पर टीकाकरण का रिकॉर्ड बनाया गया जब एक दिन में ढाई करोड़ टीके लगाने का विश्व रिकॉर्ड कायम करने का दावा किया गया।

लाशों से उबरने के लिये रचा जा रहा मनोवैज्ञानिक भ्रम

सर गंगाराम अस्पताल के मनोचिकित्सक राजीव मेहता कहते हैं कि “यह असल में टीका का नहीं बल्कि टीकाकरण का प्रभाव है। जिससे लोगों में चिंता और तनाव कम हुआ है।”

देश में टीकाकरण अभियान से लोगों को कोरोना से सुरक्षाबोध मिलेगा, क्योंकि वैक्सीन लगवाने वालों को लिये पीएम मोदी ने ‘बाहुबली’ और वैक्सीन के लिये ‘मंगल टीका’ शब्द दिया है। कथित 100 करोड़वें वैक्सीनेशन को भी नरेंद्र मोदी ने “ 100 वर्षों की सबसे बड़ी महामारी से लड़ने के लिये देश के पास अब 100 करोड़ वैक्सीन डोज का सुरक्षा कवच” बताकर एक मनोवैज्ञानिक खेल ही खेला है। इतना ही नहीं वैक्सीनेशन के बाद मिलने वाली रसीद पर नरेंद्र मोदी की फोटो का मनोवैज्ञानिक संदेश यही है कि नरेंद्र मोदी आपको कोरोना के ख़िलाफ़ सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं।  अब इस डुगडुगी को कार्पोरेट मीडिया लगातार बजाती जायेगी और 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में मोदी के पक्ष में जनमत तैयार करेगी।

100 करोड़ लोगों के वैक्सीनेश का सच

ख़ैर बात अब 100 करोड़ टीकों की। क्या तकनीकी तौर पर यह माना जाये कि 100 करोड़ टीका लग गया है या आंकड़े की खेलबाज़ारी से सब मैनेज किया गया है। दरअसल 100 करोड़ लोगों के वैक्सीनेशन का भ्रम फैलाया जा रहा है। जबकि हक़ीकत यह है कि दोनों टीकों के लगे बिना वैक्सीनेशन का कोई विशेष मतलब नहीं है क्योंकि दोनों खुराक़ एक दूसरे के पूरक हैं, और अब तो एक तीसरी खुराक़ यानि बूस्टर डोज की ज़रूरत पर भी बल दिया जा रहा है। फिलहाल देश की सिर्फ़ 21 प्रतिशत आबादी का वैक्सीनेशन पूर्ण रूप से हुआ है जिन्हें वैक्सीन की दोनों खुराक़ मिली है। जबकि देश की 49 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की केवल एक खुराक़ ही दी गई है। जबकि दोनों खुराक़ को मिलाकर एक वैक्सीन पूरा होता है। बिना पूरक (दूसरी खुराक़) के 100 करोड़ वैक्सीनेशन का दावा न सिर्फ़ गलत है बल्कि धोखाधड़ी भी है।

डेढ़ सालों में 40 प्रतिशत आबादी की कोरोना जांच नहीं हो पायी

भारतीय चिकित्सा व अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के मुताबिक़ 21 अक्टूबर 2021 तक देश में कुल 59,70, 66 481 सैंपल की कोविड जांच हुयी है जो कि कुल आबादी का महज 42 प्रतिशत (वर्तमान आबादी 1,40, 46 , 72,000) है। जबकि आरटीपीसीआर के अलावा एंटीजन टेस्ट समेत कई अन्य जांच भी शामिल हैं। जिस देश में लोग ऑक्सीजन के बिना बेमौत मरे हों। जिस देश के लोगों को ज़रूरी दवाईयां ब्लैक में ख़रीदनी पड़ी हों। जिस देश में ऑक्सीजन के लिये तमाम अस्पतालों को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी हो वह देश अगर कथित 100 करोड़ वैक्सीनेशन की ढोल पीटे जश्न मनाये अपने मुंह मियां मिट्ठू बने तो शर्मनाक बात है।

भारत निर्मित (स्वदेशी) वैक्सीन का भ्रम क्यों

नीति आयोग के सदस्य और कोविड टास्क फोर्स प्रमुख डॉ वी के पॉल ने कहा है कि भारत में निर्मित टीकों से देश में कोरोना टीकाकरण का नया कीर्तिमान बना है। नौ महीने में ये कामयाबी हासिल करना कोई सामान्य बात नहीं है।

यह सरासर झूठ है। भारत बायोटेक निर्मित ‘कोवैक्सीन’को भारत का वैक्सीन कह कर प्रचारित किया गया। लेकिन सच यह है कि न तो कोवैक्सीन को भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता दिलवा पाया। आलम यह है कि कोवैक्सीन खुराक पाये व्यक्ति को देश के बाहर वैक्सीनेटेड (टीकाकृत) मान्यता ही नहीं दी जा रही है। यानि कोवैक्सीन टीका वाला व्यक्ति देश के बाहर कोई यात्रा ही नहीं कर सकता है। 

जबकि कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन भारत में भले ही सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया हो पर सच यही है कि इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ऑस्ट्राजेनेका ने किया है।

वैक्सीनेशन में तानाशाही प्रवृत्ति

भारत में जिस सोच की सरकार है, वही सोच वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर दिखी है। यानि बिल्कुल तानाशाही। लोगों को अपनी पसंद का वैक्सीन चुनने का विकल्प तक नहीं दिया गया। मैं खुद अमेरिकी वैक्सीन फाइजर या मॉडर्ना में से एक लेना चाहता था लेकिन मुझे इसका विकल्प नहीं मिला। क्योंकि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने दोनों ही वैक्सीन को भारत में आने की मंजूरी नहीं दी। मायूस होकर मैंने कोविशील्ड का पहला टीका 4 अक्टूबर 2021 को लगवाया। ऐसे ही मेरे हृदय रोगी पिता और डायबिटिक मां को स्पुतनिक का टीका लगवाने का विचार था। लेकिन उन्हें उनकी किसी नजदीकी टीका केंद्र में स्पुतनिक की खुराक़ नहीं मिली। बल्कि शहर में भी नहीं मिली।

वहीं सरकार की ओर से तमाम सरकारी संस्थानों, सेवाओं तथा निजी संस्थानों कंपनियों और कल कारखानों में प्रवेश के लिये वैक्सीनेशन को अपरिहार्य कर दिया गया। सबसे पहले रेलवे ने ये घोषणा कि बिना वैक्सीनेशन के यात्रा नहीं करने देगी। इसके बाद तमाम सरकारी संस्थानों, कंपनियों ने घोषणा की। फिर निजी कंपनियों और शिक्षण संस्थानों ने घोषणा की कि बिना वैक्सीनेशन प्रवेश नहीं मिलेगा। एक तरह से लोगों को वैक्सीनेशन के लिये बाध्य किया गया।

वहीं जिन लोगों ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों में क़ीमत देकर वैक्सीन लगवाया है उन्हें भी नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाली रसीद दी गई है। इस पर कई लोगों ने कड़ा एतराज जताया है। केरल के एक व्यक्ति एम पीटर ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर करके इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। और कोर्ट से मांग की है कि जब उन्होंने अपनी वैक्सीन की पूरी कीमत चुकाई है तो उनकी रसीद में प्रधानमंत्री की तस्वीर क्यों है। उन्हें बिना प्रधानमंत्री की तस्वीर वाली रसीद दी जाये।

 100 करोड़ में कितने प्रतिशत वैक्सीनेशन निजी अस्पतालों में हुआ

 नरेंद्र मोदी के टैग करते हुये विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख टेड्रास एडहानोम ने ट्वीट करके कहा कि- “वैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों, भारत के लोगों और आपकी कोशिशों की बदौलत ही 100 करोड़ टीकाकरण का यह विशाल लक्ष्य हासिल हो सका है।”  

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिये निजी क्षेत्र, कार्पोरेट क्षेत्र और समाजिक संगठनों की भूमिका की सराहना की है। लेकिन मोदी शायद भूल गये कि कोरोना महामारी से लड़ने में निजी अस्पतालों और कार्पोरेट की भूमिका शून्य है। कथित 100 करोड़वें वैक्सीनेशन की तस्वीर खिंचवाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा- “ भारत ने इतिहास रचा। हम 130 करोड़ भारतीयों के विज्ञान, उद्यम, और उनकी सामूहिक भावना की विजय देख रहे हैं। भारत को बधाई। हमारे डॉक्टरों, नर्सों, और इस उपलब्धि को हासिल करने के लिये काम करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार”। 

वहीं कोवीशील्ड वैक्सीन का भारत में उत्पादन करने और उसकी पूरी क़ीमत वसूलने वाले उद्योगपति अदार पूनावाला ने कहा कि यह पूरे देश के लिए गौरव का पल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सभी संस्थाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिश की मेहनत से ही ऐसा संभव हो पाया है। भारत आने वाले समय में भी नए कीर्तिमान बनाएगा।  

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने कथित 100 करोड़ टीकाकरण का जश्न मनाते हुये निजी असपतालों में कितना टीकाकरण हुआ इसका आंकड़ा देना भी ज़रूरी नहीं समझा। इतना ही नहीं कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में मौत का मॉकड्रिल करने वाले निजी अस्पतालों की भूमिका का विवरण भी मोदी जी नहीं दिये। 

 क्या सुप्रीमकोर्ट के हस्तक्षेप बिना आज की तारीख में 100 करोड़ टीकाकरण हो सकता था

2 जून 2021 को केंद्र की मोदी सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुये फटकार लगायी थी। और अगली सुनवाई में सुप्रीमकोर्ट द्वारा सबको मुफ्त वैक्सीनेशन के संभावित आदेश के मद्देनज़र ही मोदी सरकार को 8 जून को सबको फ्री वैक्सीनेशन की घोषणा करनी पड़ी।

दरअसल मोदी सरकार की तत्कालीन वैक्सीन नीति यानि 45 साल से अधिक आयु वाले लोगों को फ्री टीका लगाने और उससे कम वालों के लिए पेड वैक्सीन को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि- “पहली नज़र में ही यह चिढ़ाने वाला और मनमाना है। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह रोडमैप पेश करे कि आखिर कैसे दिसंबर के अंत तक वह देश में सभी वयस्क लोगों को टीका लगाने की बात कर रही है।

मोदी सरकार की वैक्सीनेशन की पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 2 जून को कहा कि 18 से 44 साल के लोग न सिर्फ संक्रमण का शिकार हो रहे हैं बल्कि उसके चलते और भी कई असर हो रहे हैं। लंबे समय तक उन्हें अस्पतालों में रहना पड़ रहा है और मौतें हो रही हैं।”

सिर्फ़ इतना ही नहीं सरकार की ओर से इस तर्क पर भी अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की थी कि नीतियों को लागू करने से कोर्ट को दूर रहना चाहिए। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे वक्त में अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती, जब नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा हो। 

सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि हमारा संविधान यह नहीं कहता कि जब नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा हो तो अदालतें मूकदर्शक बनी रहें। बेंच ने सरकार से कहा कि आखिर बजट में वैक्सीन के लिए तय किए गए 35,000 करोड़ रुपये अब तक कैसे खर्च हुए हैं और 18 से 44 साल वाले लोगों के लिए उसका क्या इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से एफिडेविट दाखिल़ कर यह बताने को कहा कि उसने कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-वी की कब और कैसे ख़रीद की है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार से अपनी वैक्‍सीनेशन पॉलिसी की समीक्षा करने का आदेश देने के बाद 8 जून 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजबूर होकर 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए निशुल्क टीकाकरण की।

जबकि इससे पहले ‘फ्री वैक्सीनेशन’भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार के लिये सिर्फ़ वोट ख़रीदने का जरिया था।

22 अक्टूबर 2020 को  केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था कि जैसे ही ICMR कोरोना की किसी वैक्‍सीन को मंजूरी देता है और बड़े पैमाने पर उसका उत्‍पादन शुरू होता है, बिहार में हर व्‍यक्ति का मुफ्त में टीकाकरण होगा। दरअसल बिहार में मुफ्त टीकाकरण का वादा कर बीजेपी ने एक तरह से इशारा किया था कि भारतीयों को कोविड-19 वैक्‍सीन के लिए कीमत चुकानी होगी।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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