योगी ने किया था जमीन का वादा लेकिन मिला बलात्कार!

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के सर्वेसर्वा और देश में सबसे बेहतर कानून-व्यवस्था का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशांबी की जिस महिला को उसका हक दिलाने का वादा 9 महीने पहले जनता दरबार में दिया हो, उस महिला को उसका हक देने के बजाय पुलिस प्रशासन द्वारा जमकर प्रताड़ित किया जाता है, और उससे भी भयानक हादसा उसके साथ तब होता है जब वह महिला हिम्मत बांधकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आकर बाबा से सारा हाल बयां करने के लिए धरना देती है, तो 3 दिन के भीतर ही उसे बलात्कार का सामना करना पड़ता है। 

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के झलकारी बाई अस्पताल में 10 अक्टूबर के दिन प्रदेश की प्रख्यात पत्रकार और उल्टा चश्मा यूट्यूब चैनल की तेज-तर्रार एंकर प्रज्ञा मिश्रा एक रेप पीड़िता महिला से मुलाक़ात करने जाती हैं, तो यूपी की पुलिस उनके साथ धक्कामुक्की कर उन्हें ऐसा करने से मना कर देती है।

बता दें कि पीड़िता कौशांबी जिले की रहने वाली हैं, जिन्होंने इस वर्ष जनवरी माह में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर जनता दरबार में अपने जमीन के विवाद के सिलसिले में अर्जी डाली थी, जिसपर 3 फरवरी के दिन योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात संभव हो सकी। 

उक्त मुलाकात में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने महिला की फ़रियाद पर आश्वस्त किया था कि उसे पूरा-पूरा न्याय मिलेगा। उन्होंने महिला को 3 लाख रुपये और एक बिस्वा जमीन का पट्टे देने के लिए आश्वस्त किया था। इसके साथ ही महिला को एक कंबल, घर जाने के लिए किराया और लड्डू दिया था। महिला ने अपने इंटरव्यू में बताया है कि, मुख्यमंत्री ने साफ़ कहा था कि, “इसके साथ यदि कुछ होता है तो इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

लेकिन कौशांबी लौटने पर महिला पुलिस अधिकारी द्वारा महिला को दो दिन तक थाने में हिरासत में रखकर जमकर मारा गया, जिसमें थाना प्रभारी गायत्री सिंह, रत्ना पाल सहित अन्य महिला पुलिस कर्मियों की संलिप्तता की बात महिला ने अपने बयान में कही है।

साथ ही उसका यह भी कहना है कि थाना प्रभारी गायत्री सिंह ने कहा कि यह सब एसपी साहब के इशारे पर किया जा रहा है, क्योंकि उनका कहना है कि यह महिला छोटी सी बात पर क्यों मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गई? हमारे कौशांबी से तो कोई नहीं जाता, फिर यह कैसे चली गई। पूछने पर महिला ने जिले के एसपी का नाम बृजेश श्रीवास्तव बताया है। दो दिन तक थाने में हिरासत के दौरान मारपीट से जब महिला गिरकर बेहोश हो गई, तब पुलिस द्वारा उसे कौशांबी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसका पर्चा महिला दिखाती है। 

इसके बाद का किस्सा और भी भयावह है। जिला अस्पताल में इलाज के साथ महिला का मेडिकल हो जाता है, जिससे पुलिस महकमे को डर सताने लगता है कि यह महिला कल इसकी शिकायत कहीं फिर से योगी दरबार में न करने चली जाये। और यह महिला ठीक यही करती है और शाम को गोरखपुर निकल पड़ती है, लेकिन सुबह-सुबह ही कौशांबी का पुलिस महकमा गोरखपुर पहुंचा होता है। इसकी वजह संभवतः गोरखपुर से प्राप्त सूचना हो।

चौकी इंचार्ज अजीत सिंह और लौनावा के ग्राम प्रधान दीप नारायण और एसओ संतोष शर्मा सहित आधा दर्जन पुलिस गोरखपुर पहुंच गये थे। प्रधान मेरे पैरों पर गिर गया और लिखापढ़ी कराकर समझा-बुझाकर ले आये। मेरे नाम 3 लाख रुपये खाते में डाल दिए गये, लेकिन जमीन के पट्टे को लेकर उनका कहना था कि यह विवादित जमीन है। 

लेकिन महिला द्वारा पट्टे की जिद पर उसके खिलाफ धारा 307, 452 और एससीएसटी एक्ट और सरकारी वस्तु को नुकसान करने एवं महिला पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे आरोपों के तहत मुकदमा कर दिया गया। रात को जेल भेज दिया गया और घर पर तीन गाड़ियों में पुलिसकर्मी पहुंचकर घर के सदस्यों को धमकाने लगते हैं कि इसे क्यों नहीं समझाया कि योगी बाबा के पास फ़रियाद लेकर न जाये। 

मजे की बात यह है कि ये बातें प्रज्ञा मिश्रा ने 5 अक्टूबर के दिन दारुलशफा में धरने पर बैठी उक्त महिला का इंटरव्यू कर हासिल कर लिया था, लेकिन जब तक वे इस मुद्दे को राज्य प्रशासन के समक्ष पेश करतीं, उसी रात उस महिला के साथ बलात्कार हो जाता है। प्रदेश की राजधानी में सबसे पॉश इलाके हजरतगंज से उक्त महिला के साथ ऐसी हैवानियत की घटना बताती है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था किस हालत में है।

बता दें कि 9 महीने तक अपने लिए न्याय की फ़रियाद करने वाली उक्त महिला ने आखिर हारकर जब सीधे प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जाकर बाबा योगी आदित्यनाथ के सामने पूरा किस्सा कहने की हिम्मत जुटाते हुए, दारुलशफा पर धरना दिया तो तीन दिन के भीतर उसके साथ ऐसी घटना हो जाती है, जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की थी। 

5 अक्टूबर को देर शाम के समय दो अपरिचित लोग उससे मिलते हैं, और आश्वस्त करते हैं कि योगी जी तो नहीं मिलेंगे लेकिन डीजीपी साहब से तुम्हारी मुलाक़ात करा सकते हैं, जो तुम्हें न्याय दिला देंगे। महिला को बुखार की अवस्था में देखते हुए उन्होंने दवा खिलाने की बात कह खाना खिलाया और टेम्पो में बिठाकर ले गये। बाद में होटल में ले गये जहां सुबह होश आने पर महिला को अहसास हुआ कि उसके साथ रेप हुआ है, और उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे। शिकायत करने पर लड़के ने धमकाया कि यदि जानकारी सार्वजनिक की तो जान से मार दूंगा। 

इसके बाद जब महिला ने डीजीपी दफ्तर में जाने के लिए टेम्पो से उतरकर चलना शुरू किया तो सड़क पर गश खाकर गिर पड़ी, जिसे राह चलते लोगों ने देख पुलिस को सूचना देकर अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना का विवरण अख़बार और वीडियो न्यूज़ में मिलता है। लेकिन कैसे एक कौशांबी से लखनऊ आकर पुलिस तंत्र से अपनी रक्षा की गुहार करने वाली महिला को न्याय तो नहीं मिलता, बल्कि उसे बलात्कार का सामना करना पड़ता है, के बारे में प्रदेश का मीडिया खामोश बना हुआ है।

अमर उजाला ने 8 अक्टूबर को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि लखनऊ के डालीबाग स्थित डीजीपी आवास के पास शनिवार शाम कौशांबी की महिला बेसुध हालत में मिली। पुलिस ने उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया तो पता चला कि उसके साथ होटल में दुष्कर्म किया गया। हजरतगंज थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर पुलिस आरोपियों का पता लगा रही है।

डीसीपी मध्य अर्पणा रजत कौशिक के मुताबिक सिविल अस्पताल में महिला ने बताया कि वह मुकदमे की पैरवी के लिए दो दिन पहले कौशांबी से लखनऊ आई थी। इस दौरान उसकी मुलाकात अनजान महिला व दो युवकों से हुई। उन्होंने केस की पैरवी में मदद की बात कही। इसके बाद शुक्रवार को दोनों में से एक युवक बहाने से उसे होटल ले गया और नशीला दवा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। 

करीब-करीब इसी बात को राजस्थान पत्रिका सहित अन्य न्यूज़ चैनलों ने पुलिस प्रशासन के वक्तव्य के सहारे आगे बढ़ाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यूपी की कानून-व्यवस्था यदि सिर्फ मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन के द्वारा ही चलाई जा रही है, और इसके अलावा प्रदेश की 24 करोड़ आबादी के पास अपनी समस्या के निवारण के लिए कोई स्थान उपलब्ध नहीं है, तो वह कैसे न्याय की उम्मीद कर सकता है?

कौशांबी प्रशासन को उक्त महिला का मुख्यमंत्री के सामने जाना गंवारा नहीं, और इसके लिए उसके द्वारा सजा मुकर्रर कर दी जाती है। ऐसे में मरघट वाली शांति ही नजर आएगी, और इस शांति को कानून-व्यवस्था की सफलता भले ही बता दिया जाये, लेकिन असल बात तो यही है कि प्रदेश एक बड़े विस्फोट के मुहाने पर बैठा है, जो कभी भी फट सकता है।

(रविंद्र पटवाल जनचौक की संपादकीय टीम के सदस्य हैं।)

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