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हाथरस गैंगरेप: नेताओं का पुलिस की लाठियों से स्वागत और सवर्ण गुंडों को खुला संरक्षण

हाथरस केस को लेकर आज दिनभर में कई गतिविधियाँ हुईं। पूरे प्रदेश में हाथरस के डीएम को बर्खास्त करने और जांच खत्म होने तक कोई पद न देने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलेवार विरोध-प्रदर्शन किया। गोरखपुर में हाथरस के डीएम की बर्खास्तगी के लिए बड़ा मार्च निकाला गया। जबकि लखनऊ और चंदौली में विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और गिरफ्तारियां हुई। लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन हुआ। यहां जिला और शहर अध्यक्ष समेत कई नेता गिरफ्तार कर लिए गए।

भीम आर्मी प्रमुख ने पीड़ित परिवार के Y श्रेणी सुरक्षा की मांग की

भीम आर्मी नेता चन्द्रशेखर आजाद आज दलित पीड़िता के परिजनों से मिलने बुलगड़ी गांव पहुंचे। परिवार से मिलने के बाद चंद्रेशेखर आजाद ने कहा कि “पीड़ित परिवार यहां सुरक्षित नहीं है, अतः परिवार को Y श्रेणी की सुरक्षा दी जाए नहीं तो मैं उन्हें अपने साथ घर ले जाऊँगा।”

चंद्रशेखर आजाद ने आगे कहा, “लोकतंत्र तो है, संविधान भी है लेकिन तानाशाही भी है। यूपी सरकार कह रही है कि धारा 144 लगी है, वहीं पड़ोस में आरोपियों के पक्ष में पंचायत हो जाती है। जाहिर तौर पर भेदभाव तो हो रहा है। अब ये नार्को टेस्ट की जो मांग है, ये भी तो आरोपी पक्ष की है, जो मुख्यमंत्री ने पूरी कर दी। वहीं वो पीड़ितों की मांग तो नहीं पूरी कर पा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक जाति का घमंड बना हुआ है कि मुख्यमंत्री हमारी जाति का है और हमारा कुछ नहीं हो सकता है। इन दलितों को हम देख लेंगे। वो लोग दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं और मुख्यमंत्री उनको बचा रहे हैं। हम चाहते हैं कि एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में जांच हो।”

चंद्रशेखर आजाद ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी और मुख्यमंत्री पर हमलावर होते हुए कहा “मैं दलित समाज से अपील करता हूँ कि वो लोग सफाई का काम बंद कर दें क्योंकि हम इनकी गंदगी तो साफ कर रहे हैं लेकिन इनकी मानसिक गंदगी जो सरकार के दिमाग में बैठी हुई है, वो साफ नहीं हो रही है। ऐसे मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। प्रधानमंत्री को चाहिए कि वो इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ें।”

आमने-सामने आए आरोपियों के पैरोकार सवर्ण समुदाय और सपा कार्यकर्ता

पीड़िता के गांव बुलगड़ी में उस वक़्त जातीय हिंसा की स्थिति बन गई जब आरोपियों के पैरोकार सवर्ण समाज के लोग भाजपा के पूर्व विधायक के घर मीटिंग करके “निर्दोषों को रिहा करो” का नारा लगाते हुए निकले और अचानक उनके सामने आरोपियों की सजा की मांग करते सपा कार्यकर्ता खड़े मिल गए। मामले ने अब जातीय संघर्ष का भी रूप ले लिया है। गांव के बाहर विवाद जैसी स्थिति पैदा हो गई है जब एक तरफ सवर्ण समाज के लोग आरोपियों को रिहा करो के नारे और जांच की मांग कर रहे थे, वहीं 200 मीटर के दायरे में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी आरोपियों को सज़ा देने के नारे लगा रहे थे। कुछ देर के लिए हालात ऐसे हो गए कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया जिसकी जद में आरोपियों के कुछ पैरोकार भी आ गए। पुलिस के लाठीचार्ज में एसपी जिलाध्यक्ष गिरीश यादव समेत कई लोग गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गए हैं।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से समाजवादी पार्टी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल रविवार को हाथरस के बुलगड़ी गांव पहुंचकर पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमण्डल में प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजी लाल सुमन, पूर्व सांसद धर्मेन्द्र यादव और अक्षय यादव और अन्य सदस्य शामिल थे। लेकिन जॉइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीना ने सिर्फ़ 5 लोगों को ही पीड़ित परिवार से मिलने की इज़ाज़त दी।

पीड़ित परिवार से मिलने के बाद सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा, “परिवार बहुत असन्तुष्ट है। बहुत दर्द में है और बहुत परेशानी में है। एक तो उनके परिवार की बेटी चली गई है वहीं प्रशासन द्वारा जितना अत्याचार होना था वो हुआ, बेटी के इलाज में लापरवाही हुई, बेटी की पोस्टमार्टम में देरी हुई। जो पीड़ित परिवार की मांग है वही सपा की मांग है। मामले की सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए। और परिवार को धमकाने वाले आरोपी डीएम को तत्काल निलंबित किया जाए।”

जयंत चौधरी और उनके कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रुई की तरह धुना

हाथरस में पीड़िता के गांव में पीड़ित परिवार से मिलने आज राष्ट्रीय लोक दल नेता जयंत चौधरी भी पहुंचे। उनके साथ पार्टी के कई कार्यकर्ता भी थे जिन्हें गांव के बाहर ही रोक लिया गया था। जबकि जयंत चौधरी पीड़ित परिजन से घर के अंदर मुलाकात करने के बाद बाहर निकले। वो जैसे ही बाहर निकले मीडिया ने उन्हें बाइट के लिए रोक लिया। इसी दौरान पुलिस ने आरएलडी और सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने जयंत चौधरी पर भी लाठीचार्ज की कोशिश की। लेकिन जयंत चौधरी को बचाने के लिए आरएलडी कार्यकर्ताओं ने घेरा बना लिया। इस दौरान पुलिसकर्मी लगातार बुरी तरह कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाते रहे।

बाद मे हाथरस सदर के एसडीएम प्रेम प्रकाश मीणा ने लाठीचार्ज को जस्टीफाई करते हुए कहानी सुनाया कि, “गांव में अभी 5 से अधिक लोगों के प्रतिनिधिमंडल को जाने की इज़ाज़त नहीं है। हमें समाजवादी पार्टी और आरएलडी के 5 लोगों के नाम मिले थे। तभी कार्यकर्ताओं ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और बैरिकेडिंग तोड़ डाली। पत्थरबाजी भी की गई। हमारे एक सीओ घायल हुए हैं। भीड़ को नियंत्रण में लेने के लिए हमें लाठीचार्ज करना पड़ा।”

पुलिस की मौजूदगी में पीड़ित परिवार को धमकी

वहीं सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें ठाकुर समुदाय के दो युवक पुलिस की मौजूदगी में गुस्से से चीखते हुए पीड़ित परिवार और चंद्रशेखर आजाद को धमका रहे हैं। ये सभी राष्ट्रीय सवर्ण परिषद से ताल्लुक रखते हैं।

वीडियो को कांग्रेस उत्तर प्रदेश के आधिकारिक हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा गया है कि इनके लिए न धारा 144 है न पुलिस।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग बाग अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं क्या यही रामराज्य है। विपक्षी नेताओं की पुलिस हड्डियां तोड़ रही है। महिला नेताओं से बदसलूकी कर रही है। मीडियाकर्मियों से बदसलूकी कर रही है, बुजुर्ग सांसद डेरेक ओ ब्रायन को खुद एसडीएम प्रेम प्रकाश मीणा धक्के मारकर ज़मीन पर गिरा रहा है। और पुलिस दो ठाकुर गुंडों को कुर्सी पर बैठाकर उनके पीछे उनके बॉडीगार्ड की तरह खड़ी है और वो दोनो खुलेआम बेखौफ़ होकर पीड़ितों को धमकी दे रहे हैं। यही रामराज्य है।

धारा 144 के बावजूद आरोपियों के पक्ष में हुई सवर्ण समाज की मीटिंग

वहीं दूसरी ओर धारा 144 के बावजूद आरोपियों के पक्ष में सवर्ण समुदाय के लोगों की आज बसंत बाग स्थित पूर्व विधायक राजवीर पहलवान के आवास पर पंचायत हुई। पंचायत में सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। पूर्व विधायक के आवास पर शुरू हुई इस पंचायत में हाथरस मामले को लेकर कई अहम बातें रखी गईं। पंचायत के दौरान सवर्ण समाज के लोगों ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को निर्दोष बताया । साथ ही सीएम योगी के सीबीआई जांच की सिफारिश वाले फैसले का सवर्ण समाज के लोगों ने स्वागत भी किया।

बता दें कि शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया था कि सीएम योगी के आदेश के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है। साथ ही आरोपियों के पक्षकारों की ओर से रखी गई दूसरी मांग पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट कराने की मांग को भी सरकार ने स्वीकार करते हुए प्रशासन को पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट कराने का आदेश दिया था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 5, 2020 9:59 am

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