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सुप्रीम फटकार के बाद नींद से जागा एनबीएसए, सुशांत मामले में ‘आज तक’ समेत कई चैनलों पर लगाया जुर्माना

सुदर्शन न्यूज टीवी के विवादास्पद शो के खिलाफ मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) की तन्द्रा टूटी है और एनबीएसए ने इलेक्ट्रॉनिक समाचार चैनल आजतक, जी न्यूज, न्यूज 24 और इंडिया टीवी को निर्देश दिया है कि वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को सनसनीखेज बनाने व असंवेदनशील रिपोर्टिंग करने के मामले में माफी मांगे और उसका प्रसारण किया जाए। एनबीएसए ने आजतक, जी न्यूज़ और न्यूज़ 24 चैनल को वो असंवेदनशील टैग लाइन्स चलाने से भी रोक दिया है, जिनमें मृतक की निजता का उल्लंघन करने और उसकी गरिमा को प्रभावित करने का प्रभाव था। जबकि आजतक के साथ इंडिया टीवी को भी राजपूत की लाश की तस्वीरें दिखाने का दोषी पाया गया है।

दरअसल सुदर्शन न्यूज टीवी के विवादास्पद शो के खिलाफ मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने अपने स्वयं के नियमों को लागू करने में ढिलाई पर एनबीएसए को फटकार लगाई थी। पीठासीन जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एनबीएसए को ‘टूथलेस’ यानि दंतहीन कहा था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकील से पूछा था कि आप टीवी देखते हैं या नहीं? आपने खबर में क्या चल रहा है इसे नियंत्रित नहीं किया है।

सितंबर महीने में महाराष्ट्र के आठ पूर्व पुलिस अधिकारियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में राजपूत की मौत के मामले में चल रहे ‘मीडिया ट्रायल’ के ख़िलाफ़ आदेश देने की मांग की थी। उनका कहना है कि टीवी चैनलों का एक वर्ग पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इस पर अदालत ने कहा था कि इस मामले में मीडिया से उम्मीद है कि वे रिपोर्ट करते वक्त संयम बरतेंगे ताकि जांच में बाधा न आए। 11 सितंबर को हुई इस मामले की सुनवाई में अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि चैनलों द्वारा ख़बरें प्रसारित करने को लेकर कोई नियमन नहीं है।

8 अक्तूबर, 20 को चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जी एस कुलकर्णी की पीठ ने इस मामले में फिर सुनवाई की। जिसमें पूर्व पुलिस अधिकारियों के वकील अस्पी चिनॉय ने दलील दी कि किसी आपराधिक मामले का मीडिया ट्रायल निष्पक्ष ट्रायल के सिद्धांत के प्रतिकूल है। चिनॉय ने यह भी कहा कि आपराधिक मामले की रिपोर्टिंग में कौन दोषी है और किसे गिरफ्तार होना चाहिए नहीं शामिल किया जा सकता। अब इस मामले की सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी।

एनबीएसए स्व-नियामक संस्था है जो न्यूज इंडस्ट्री में प्रसारण आचार संहिता और दिशा निर्देशों को लागू करता है। इसमें 70 चैनलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 27 सदस्य शामिल हैं। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एके सीकरी इसके अध्यक्ष हैं। एनबीएसए द्वारा यह कार्रवाई दस शिकायतकर्ताओं के इन चैनलों के प्रसारण को लेकर की गई आपत्तियों के बाद की गई है। जून महीने में फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद से समाचार चैनलों पर इस बारे में प्रसारित की जा रही सामग्री को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

एनबीएसए ने कहा है कि हालांकि समाचारों को रिपोर्ट करना समाचार चैनलों का कर्तव्य है, जो सार्वजनिक हित में हो सकता है और जिन व्यक्तियों पर रिपोर्ट की जा रही है, उन्हें इस तरह की मीडिया रिपोर्टों से न्याय मिल सकता है। परंतु समाचार को ढंग से प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि वह मृतक की गोपनीयता का उल्लंघन न करें और न ही एक दुखद घटना को सनसनीखेज बनाया जाना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि मृतक को अनावश्यक रूप से मीडिया की चकाचौंध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

एनबीएसए ने आजतक के निर्लज्ज ”हिट-विकेट” टैग लाइन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सवाल सुशांत सिंह राजपूत से पूछे जा रहे हैं, जो अब मर चुका है। इसलिए टैग लाइन अपमानजनक हैं, जो गोपनीयता का उल्लंघन व मृतक की गरिमा को प्रभावित करती है।’ जी न्यूज द्वारा चलाई गई एक टैगलाइन का हवाला देते हुए, ‘पटना का सुशांत, मुम्बई में फेल क्यूं?, एनबीएसए ने कहा है कि, ”टैगलाइन से यह धारणा उत्पन्न होता है कि आत्महत्या करना असफलता है और इसलिए टैगलाइन मृतक की गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन करती है। आत्महत्या के विभिन्न कारण हो सकते हैं, लेकिन यह धारणा बनाई जा रही है कि एक छोटे शहर के लड़के ने मेट्रो शहर में आकर आत्महत्या कर ली। जो उसकी विफलता थी।

एनबीएसए ने कहा है कि न्यूज 24 द्वारा चलाई गई टैगलाइन ”अपमानजनक थी और मृतक की गरिमा को प्रभावित करती है” जो यह संकेत देती है कि सुशांत अपनी फिल्म छिछोरे में उनके द्वारा दिए गए आत्महत्या विरोधी संदेश को भूल गए थे। एनबीएसए ने कहा है कि मीडिया को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है।

एनबीएसए ने कहा है कि अगर आजतक, जी न्यूज और न्यूज 24 द्वारा दिखाए गए कार्यक्रम इस तरह की टैगलाइन के बिना होते, तो हो सकता है कि यह मृतक की गोपनीयता, सनसनीखेज और गरिमा से संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन न होता। कार्यक्रम में उपरोक्त टैगलाइनों को चलाया गया था, इसलिए एनबीएसए का मानना था कि उक्त प्रसारकों ने सूचना को कवर करने के लिए बनाए गए विशिष्ट दिशानिर्देश का उल्लंघन किया है। एनबीएसए ने आजतक और इंडिया टीवी को निर्देश दिया है कि वे राजपूत की लाश की तस्वीरों को सार्वजनिक करने के लिए माफी मांगें। आजतक ने बेडरूम से दिवंगत राजपूत की लाश की तस्वीरें प्रसारित की थी। इतना ही उन्होंने गला घोंटने के लिए इस्तेमाल किए गए कपड़े के रंग के साथ-साथ मरने के लिए इस्तेमाल की गई विधि का भी स्पष्ट रूप से वर्णन किया था।

इंडिया टीवी पर भी आरोप लगाया गया है कि उसने बार-बार शरीर के ओठों के रंग और राजपूत की गर्दन पर निशान का विस्तार से वर्णन किया था। वहीं यह भी आरोप है कि उन्होंने बार-बार अपार्टमेंट से कपड़े में ढके हुए शरीर को बाहर निकालते हुए भी दिखाया था। यह एनबीएसए दिशानिर्देशों का जबरदस्त उल्लंघन है।

दिशानिर्देशों में कहा गया है रिपोर्टिंग को सनसनीखेज नहीं बनाना चाहिए या दर्शकों के बीच घबराहट, बेचैनी या अवांछनीय डर पैदा करने वाली नहीं होना चाहिए। खंड 3.6, जिसमें कहा गया है कि मृतकों के साथ सम्मान से व्यवहार किया जाना चाहिए। मृत या कटे-फटे शरीर के क्लोज-अप नहीं दिखाए जाने चाहिए।’ गोपनीयता -दुःख और मौत की स्थितियों पर रिपोर्टिंग करते समय प्रसारकों को विवेक और संवेदनशीलता का प्रयोग करना चाहिए। कंटेंट को ग्लैमराइज नहीं करना चाहिए या अपराध को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए या आत्महत्या सहित आपराधिक कार्यों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एनबीएसए ने राजपूत की लाश को अपने टेलीकास्ट में दिखाने के लिए न्यूज नेशन को राहत दे दी है क्योंकि उन्होंने इसके लिए पश्चाताप व्यक्त किया है और आश्वासन दिया है कि इसे दोहराया नहीं जाएगा। एबीपी माझा को भी चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया है क्योंकि एनबीएसए ने पाया कि उन्होंने शरीर की क्लोज-अप तस्वीरों का प्रसारण नहीं किया था। आज तक को 1,00,000 रुपये का जुर्माना देने का निर्देश दिया गया है क्योंकि उन्होंने कुछ ट्वीट्स प्रसारित करने और अभिनेता को उनके लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले एक उचित सावधानी नहीं बरती थी या उनकी सत्यता जानने के लिए परिश्रम नहीं किया था। आजतक ने फर्जी ट्वीट्स के आधार पर झूठा आरोप लगाते हुए कहा था कि राजपूत ने तीन ट्वीट पोस्ट किए थे, जिनको उसने 14 जून, 2020 को अपनी मौत से कुछ घंटे पहले डिलीट कर दिया था। हालांकि बाद में चैनल ने ट्वीट को डिलीट कर दिया था और लेख को भी हटा दिया था।

इसे गंभीरता से लेते हुए एनबीएसए ने कहा कि ब्रॉडकास्टर को ट्वीट को टेलीकास्ट/अपलोड करने से पहले इसके लिए परिश्रम और सत्यापन का संचालन करना चाहिए था ना कि अपलोड करने के बाद। इस तरह की तत्परता एक मूल सिद्धांत है और पत्रकारीय नैतिकता की आवश्यकता भी। बिना सत्यापन के ट्वीट का टेलीकास्ट करना जनता के बीच गलत सूचना फैलाने की प्रवृत्ति थी। एनबीएसए ने कहा कि प्रसारक ने सत्यता से संबंधित रिपोर्टिंग दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है

एनबीएसए ने पाया है कि आजतक ने प्राईवेसी के संबंध में भी उनके दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है क्योंकि उनके संवाददाताओं ने राजपूत के माता-पिता के घर में घुसकर उसके परिवार के विभिन्न सदस्यों से सवाल पूछे थे, जो परेशान और शोक की स्थिति में थे। एबीपी न्यूज चैनल के पत्रकारों ने भी राजपूत की चचेरी बहन का इंटरव्यू लिया था। हालांकि एनबीएसए ने चैनल को एक चेतावनी के साथ छोड़ दिया है क्योंकि इस बात पर ध्यान दिया गया कि चचेरी बहन ने स्वेच्छा से यह साक्षात्कार दिया था।

बीते 28 अगस्त को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले और इससे जुड़ी जांच की कई मीडिया संस्थानों द्वारा की जा रही कवरेज को लेकर आपत्ति जताई थी। प्रेस काउंसिल ने कहा था कि जांच के बारे में सुनी-सुनाई बातों पर ख़बरें प्रसारित करना ठीक नहीं है। पीड़ित, गवाहों, संदिग्धों को अत्यधिक प्रचार देने से बचें, क्योंकि ऐसा करना उनकी निजता के अधिकार में अतिक्रमण होगा। काउंसिल ने इस मामले में मीडिया संस्थानों को अपना स्वयं का समानांतर मुकदमा न चलाने और फैसले की पहले ही भविष्यवाणी करने से बचने को कहा था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 9, 2020 10:47 am

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