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विपक्ष ने पूछा- “बजट है या OLX”

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पूरी दुनिया के साथ-साथ हिंदुस्‍तान भी कोरोना महामारी की चपेट में आने की वजह से आर्थिक बदहाली में फंस गया है, इसलिए जब बजट पेश होने की तारीख आई तो हमें भी उम्‍मीद थी कि असाधारण स्थिति में बजट में असाधारण दिशा सामने रख कर इससे निकलने की कोशिश होगी। कोई असाधारण कदम उठाया जाएगा, लेकिन मुझे हताश होना पड़ा। स्थिति तो असाधारण है लेकिन बजट बेहद साधारण है। ये साधारण बजट के साथ-साथ बहुत सारे बोझ हमारे ऊपर डाले गए हैं, जो नहीं डाले जाने चाहिए थे। सरकार आज जिस रास्‍ते पर जा रही है, वह सीधा निजीकरण की ओर ले जा रहा है। स्थिति असाधारण, सरकार चाहती है निजीकरण… यही आज के बजट की कैच लाइन है।

केंद्र सरकार के बजट 2021 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने निराशाजनक बताते हुए कहा कि इस बजट के जरिए मोदी सरकार देश की संपत्तियों को अपने मित्रों में बांटने जा रही है। राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा, “लोगों के हाथ में कैश रखना तो भूल जाइए। मोदी सरकार देश की संपत्तियों को अपने पूंजीपति दोस्तों को हैंडओवर करने जा रही है।”

इससे पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्रीय बजट 2021 में घोषित की गई स्क्रैप पॉलिसी पर चुटकी ली। उन्होंने ट्वीट करके कहा, “यह भाजपा सरकार मुझे उस गैराज मैकेनिक की याद दिला रही है, जिसने अपने ग्राहक से कहा था, मैं तुम्हारे ब्रेक ठीक नहीं कर सकता था, इसलिए मैंने तुम्हारा हॉर्न तेज कर दिया है।”तृणमूल कांग्रेस के राज्‍यसभा सांसद डेरेक ओ’ ब्रायन ने ट्वीट कर कहा, “देश का पहला पेपरलेस बजट साथ में विजनलेस बजट भी है।”

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस बजट ने गरीबों और किसानों को धोखा दिया है। बजट में किसानों को कुछ नहीं मिला है। उद्योग जगत को इस बजट से कोई लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के करोड़ों गरीब, किसान और मेहनतकश जनता केंद्र और राज्य सरकारों के अनेकों प्रकार के लुभावने वादे, खोखले दावे और आश्वासनों आदि से काफी थक चुकी है तथा उनका जीवन लगातार त्रस्त है। सरकार अपने वादों को जमीनी हकीकत में लागू करे तो यह बेहतर होगा।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आज मोदी जी ने बजट पर नया नारा बनाया। ‘ये देश नहीं बचने दूंगा, ये देश नहीं बचने दूंगा’। आख़िर ये देश किसका है? 130 करोड़ लोगों का या मोदी जी के चार पूंजीपति मित्रों का? सपूत संपत्ति बनाता है, कपूत संपत्ति बेचता है। आज का बजट देश को बेचने का बजट है।”

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्रीय बजट पर कहा है, “यह देश बेचने वाला बजट है। यह बजट नहीं सरकारी प्रतिष्ठानों और संपत्तियों को बेचने की सेल थी। रेल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, लाल किला, BSNL, LIC बेचने के बाद यह बजट नहीं बल्कि अब बैंक, बंदरगाह, बिजली लाइनें, राष्ट्रीय सड़कें, स्टेडियम, तेल की पाइप लाइन से लेकर वेयरहाउस बेचने का भाजपाई निश्चय है।”

सीपीआईएमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कंपनी राज द्वारा कंपनी राज के लिए बनाया गया बजट है! अनुबंधित भारतीय अर्थव्यवस्था को सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की आवश्यकता है, निजीकरण में तेजी की नहीं। लोगों को नौकरी, आय, क्रय शक्ति की आवश्यकता है, लेकिन इस बजट नें आम भारतीयों के लिए राहत की कोई बात नहीं है।”

सीपीआईएम नेता मोहम्मद सलीम ने कहा है कि सरकार रेल, बैंक, बीमा, रक्षा और स्टील सब कुछ बेचने जा रही है। यह बजट है या OLX। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने बजट को लेकर कहा कि यह पूंजीपतियों का बजट है। कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने बजट पर कहा, “धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे। कली बेच देंगे, चमन बेच देंगे। कलम के सिपाही अगर सो गए। तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on February 1, 2021 6:02 pm

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