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Tuesday, September 28, 2021

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पवार भी निलंबित राज्य सभा सदस्यों के साथ बैठेंगे अनशन पर

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नई दिल्ली। राज्य सभा के उपसभापति द्वारा कृषि विधेयक पर सदस्यों को नहीं बोलने देने पर चिंता जाहिर करते हुए एनसीपी मुखिया शरद पवार ने घोषणा की है कि वह निलंबित 8 सदस्यों के समर्थन में एक दिन के अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा है कि इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ जब प्रिजाइडिंग अफसर सदस्यों के साथ इस तरह का व्यवहार किए हों।

पत्रकारों से बात करते हुए पवार ने रविवार को विपक्ष के विरोध के बीच राज्य सभा में जिस तरह से विधेयक पारित किया गया उस तरीके का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि विधेयक एक बार में पारित हो जाता। उस पर अलग से बातचीत हो सकती थी। उन्होंने कहा कि “हम जैसे सदस्य यह चाहते हैं कि चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन या फिर जो भी उस कुर्सी पर बैठा हो मामले को गंभीरता से देखेगा और सदस्यों को अपना विचार रखने का मौका देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

पवार ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने डिप्टी चेयरमैन को यह बता दिया कि सदन में विधेयक पेश किये जाने के दौरान वह नियमों के हिसाब से नहीं चले थे। उन्होंने कहा कि “डिप्टी चेयरमैन से यह आशा की जाती है कि कम से कम वह उन नियमों को सुनें तो विपक्ष जिनका हवाला दे रहा है।”

लेकिन ऐसा नहीं हुआ और तुरंत वोटिंग शुरू हो गयी और वह भी ध्वनि मत से……इस तरह से सदस्यों की प्रतिक्रिया बेहद तीखी रही।

पवार ने कहा कि पिछले दो दिनों में राज्य सभा में जो हुआ वह इतिहास में कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि डिप्टी चेयरमैन के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह दिवंगत कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा का पालन करते हैं। लेकिन हरिवंश ने इन सभी विचारधाराओं को दरकिनार कर दिया और सदस्यों को निलंबित कर दिया गया और उनके अधिकारों को छीन लिया गया।

आठों सदस्यों द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बैठकर अपना विरोध दर्ज करने के मसले पर उन्होंने कहा कि सदस्यों ने अपना विरोध शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज किया है।

उन्होंने आगे कहा कि “मैंने टीवी पर सुना कि डिप्टी चेयरमैन उन्हें चाय देने गए थे। मैं इस बात से खुश हूं कि सदस्यों ने उसे स्वीकार नहीं किया और अपना अनशन जारी रखा। ऐसा कहा जा रहा है कि यह कुछ गांधीगीरी जैसा है। लेकिन इसके पहले हमने गांधी की विचारधारा का इतना अपमान कभी नहीं देखा।”

पवार ने कहा कि उन्हें मंगलवार को पता चला कि आठों सदस्य विरोध स्वरूप अपना खाना छोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि “डिप्टी चेयरमैन का सदन और विपक्षी सदस्यों के प्रति व्यवहार सदन और उस पोस्ट की प्रतिष्ठा को गिराने वाला है। इसलिए मैं उसके विरोध में शामिल हो रहा हूं और एक दिन भोजन नहीं करूंगा।”

(जनचौक डेस्क की खबर।)

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