पेगासस कांड की सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई, मोदी सरकार का संकट बढ़ना तय

Estimated read time 2 min read

पेगासस कांड से मोदी सरकार का संकट आने वाले दिनों में और बढ़ना तय है। एक ओर उच्चतम न्यायालय ने सहमति व्यक्त की है कि वह अगले सप्ताह सुनवाई करेगा तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में ममता सरकार द्वारा न्यायमूर्ति लोकुर की अध्यक्षता में दो सदस्यीय न्यायिक आयोग जल्दी ही इसकी जाँच शुरू कर सकता है क्योंकि आयोग को छह माह में ही अपनी रिपोर्ट देनी है। इसके अलावा संसद का मानसून सत्र पेगासस कांड की भेंट चढ़ता नज़र आ रहा है।

द हिंदू समूह प्रकाशनों के निदेशक एन राम और एशियानेट के संस्थापक शशि कुमार द्वारा दायर याचिका में पेगासस निगरानी घोटाले में सर्वोच्च न्यायालय के एक मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा जांच की मांग की गई है। इस मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के समक्ष किया, जो अगले सप्ताह मामले को सूचीबद्ध करने के लिए सहमत हुए।

सिब्बल ने कहा कि नागरिकों, विपक्षी दलों के राजनेताओं, पत्रकारों, अदालत के कर्मचारियों की नागरिक स्वतंत्रता को निगरानी में रखा गया है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो भारत और दुनिया में लहर बना रहा है और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। एन राम और कुमार के अलावा, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और अधिवक्ता एमएल शर्मा ने भी घोटाले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं ।

गौरतलब है कि पेगासस सॉफ्टवेयर एक इजरायली साइबर-आर्म्स फर्म एनएसओ ग्रुप टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (एनएसओ ग्रुप) द्वारा निर्मित एक हथियार ग्रेड स्पाइवेयर/निगरानी उपकरण है। यह बेहद उन्नत है और मालिक के साथ किसी भी बातचीत के बिना मोबाइल फोन/डिवाइस को संक्रमित करने में सक्षम है। यह इंटर-ट्रैकिंग और रिकॉर्डिंग कॉल्स रीडिंग टेक्स्ट और व्हाट्सएप संदेशों सहित घुसपैठ की निगरानी कर सकता है। इसका उपयोग उपकरणों पर फ़ाइलें लगाने के लिए भी किया जा सकता है। एनएसओ का दावा है कि पेगासस  को केवल सत्यापित सरकारों को बेचा जाता है, निजी संस्थाओं को नहीं, हालांकि कंपनी यह नहीं बताती है कि वह किन सरकारों को विवादास्पद उत्पाद बेचती है।

एन राम और कुमार ने अपनी याचिका में भारत सरकार को यह खुलासा करने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की कि क्या भारत सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है या कथित रूप से निगरानी करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसका इस्तेमाल किया है।

याचिका में कहा गया है कि सैन्य-ग्रेड स्पाइवेयर का उपयोग करके बड़े पैमाने पर निगरानी कई मौलिक अधिकारों को कम करती है और स्वतंत्र संस्थानों में घुसपैठ, हमला और अस्थिर करने के प्रयास का प्रतिनिधित्व करती है जो हमारे लोकतांत्रिक सेट-अप के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में कार्य करते हैं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सरकार ने उनकी प्रतिक्रिया में निगरानी करने के लिए पेगासस लाइसेंस प्राप्त करने से स्पष्ट रूप से इंकार नहीं किया है, और इन अत्यंत गंभीर आरोपों की एक विश्वसनीय और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की सुरक्षा लैब द्वारा निगरानी के लिए लक्षित व्यक्तियों से संबंधित कई मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण ने पेगासस से प्रेरित सुरक्षा उल्लंघनों की पुष्टि की है। याचिका में कहा गया है कि सैन्य-ग्रेड स्पाइवेयर का उपयोग करके इस तरह की लक्षित निगरानी निजता के अधिकार का अस्वीकार्य उल्लंघन है, जिसे केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकार माना गया है।निजता का अधिकार किसी के मोबाइल फोन / इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के उपयोग और नियंत्रण तक फैला हुआ है और हैकिंग / टैपिंग के माध्यम से कोई भी अवरोधन अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह इस बात का खुलासा करे कि क्या किसी सरकारी एजेंसी ने पेगासस स्पाईवेयर के इस्तेमाल का लाइसेंस ले रखा है। किसी तरह से सर्विलांस के लिए क्या सरकारी एजेंसी के पास पेगासस स्पा‌ईवेयर का लाइसेंस है, ये बताया जाए। याचिका में कहा गया है कि विश्वभर के मीडिया ने यह खबर दी है कि भारत में 142 से ज्यादा लोगों जिनमें पत्रकार, वकील, मंत्री, विरोधी दल के नेता, सिविल सोसायटी के एक्टिविस्ट और संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को निशाना बनाया गया है और पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर उनका सर्विलांस किया गया है।

याचिका में द वायर और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों की समाचार रिपोर्टों पर भरोसा किया गया है जिनमें कहा गया है कि क्या पत्रकार, डॉक्टरों, वकीलों, विपक्षी नेताओं, मंत्रियों, संवैधानिक पदाधिकारियों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं पर पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके उनके फोन को अवैध रूप से हैक करके लक्षित निगरानी की गई है? इस तरह के हैक के क्या निहितार्थ हैं? क्या वे एजेंसियों और संगठनों द्वारा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की अभिव्यक्ति को दबाने के प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं?

याचिका में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के संसद में दिए गए बयान पर भरोसा किया गया था कि कोई अनधिकृत अवरोधन नहीं हुआ था। याचिका में रिटायर या सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से पेगासस जसूसी केस की जांच की मांग की गई है।पेगासस कांड की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस पर अगले हफ्ते सुनवाई करेंगे।

पश्चिम बंगाल पेगासस स्पाईवेयर  के जरिए फोन की जासूसी मामले में ममता सरकार द्वारा गठित जांच आयोग से केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह आयोग देश भर में किसी को भी जांच के लिए तलब कर सकता है। इस आयोग में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी अध्यादेश के मुताबिक यह आयोग जासूसी मामले की जांच करेगा और यह पता लगाएगा कि इसके जरिए जुटाई गई जानकारियों का इस्तेमाल किस तरह से किया गया। अधिसूचना के मुताबिक यह सार्वजनिक महत्व का निश्चित मामला  है।

संवैधानिक नियम के अनुसार किसी मामले की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों को ही इस प्रकार के आयोग गठित करने की शक्ति है। कमीशंस ऑफ इंक्यावरी एक्ट, 1952 के तहत सरकार द्वारा गठित किए गए आयोग के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यह कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908 के तहत मामला दर्ज कर सकती है।

इजराइल में पेगासस के दफ्तर पर छापा

पेगासस जासूसी विवाद के बीच इजराइली रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने जाजूसी सॉफ्टवेयर पेगासस बनाने वाली कंपनी एनएसओ के तेल अवीव स्थित दफ्तर पर बुधवार को छापा मारा। हालांकि बाद में कंपनी ने इसे निरीक्षण बताया। वहीं इजराइली रक्षा मंत्री बेनी गेंट्ज ने भी फ्रांस के दौरे पर वहां की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले से पेगासस पर चर्चा की है। इस मीटिंग में गेंट्ज ने कहा कि पेगासस से जासूसी के आरोपों को गंभीरता से ले रहे हैं। आरोप है कि इजराइली कंपनी एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की जासूसी के लिए भी हुआ था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

  

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments