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सीएए पर बादल ने तोड़ी खामोशी! नाम लिए बगैर केंद्र सरकार, भाजपा, मोदी, शाह और आरएसएस पर जम कर बरसे

लंबी खामोशी के बाद आखिरकार नागरिकता संशोधन विधेयक पर एनडीए के सबसे बुजुर्ग नेता और दिग्गज अकाली सियासतदान पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपनी खामोशी तोड़ी है। सीएए के मसले, देश के मौजूदा हालात और धर्मनिरपेक्षता को दरपेश ‘खतरों’ पर उन्होंने नाम लेने से परहेज करते हुए खुलकर भाजपा, आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरा है। अब तक नागरिकता संशोधन विधेयक पर बड़े बादल पूरी तरह खामोश थे और इसे राजनीति में तूफान से पहले की खामोशी कहा जा रहा था। अब यह खामोशी टूट गई है और बादल अपनी चिर-परिचित शैली में भाजपा पर जमकर बरसे।               

अजनाला (अमृतसर) में शिरोमणि अकाली दल की विशाल रैली में सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल ने नाम लिए बगैर केंद्र सरकार और भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दो-टूक कहा कि यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है कि देश की मौजूदा स्थिति लगातार खराब हो रही है। असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। बादल ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह का नाम लिए बगैर, खुले इशारे में साफ-साफ कहा कि अगर आपको सरकार चलाने में कामयाब होना है तो अल्पसंख्यकों और अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलना ही होगा। सभी देशवासी खुद को एक परिवार का हिस्सा मानते हैं और सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, जो कि नहीं हो रहा।

बादल बोले कि केंद्र में सत्तासीन असरदार लोगों को सुनिश्चित करना चाहिए कि देश को संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक लोकाचार के अनुसार सख्ती से चलाया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान में लिखा है कि भारत में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन होगा। धर्मनिरपेक्षता के पवित्र सिद्धांतों से छेड़छाड़ हमारे देश को कमजोर कर रही है। ऐसा कुछ नहीं किया जाना चाहिए जिससे भारत की धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र खतरे में पड़े।                                   

प्रकाश सिंह बादल ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर कहा कि केंद्र सरकार को सभी समुदाय के लोगों को इसमें शामिल करना चाहिए। सभी धर्मों का समान रूप से सत्कार करना चाहिए। बादल ने सांकेतिक भाषा में कहा कि ऐसा हो नहीं रहा है। वह बोले कि एनडीए सभी सहयोगियों को साथ लेकर चले और सब की आवाज को बराबर का महत्व दे। उन्होंने कहा, “सीएए पर हमारा स्टैंड स्पष्ट है कि इसमें मुसलमानों को भी शुमार किया जाए।”                                   

शिरोमणि अकाली दल सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल का यह मुखर रुख यकीनन भाजपा को बर्दाश्त नहीं होगा और अब नए सियासी समीकरण बनेंगे। बादल का कथन जाहिर करता है कि शिरोमणि अकाली दल, नागरिकता संशोधन विधेयक, धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों के सवाल पर भाजपा से एकदम अलहदा राय रखता है और इस सब पर एनडीए से बाहर भी हो सकता है। वैसे भी अकाली-भाजपा गठबंधन इन दिनों वेंटिलेटर पर है और कभी भी दम तोड़ सकता है।

प्रकाश सिंह बादल से पहले उनके खासमखास राज्यसभा सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रेम सिंह चंदूमाजरा और डॉ. दलजीत सिंह चीमा इसी सुर में खुल कर बोल चुके हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लोगोंवाल भी सीएए पर जोर देकर कह चुके हैं कि वे इसमें मुसलमानों को दरकिनार करने के सख्त खिलाफ हैं।                                                       

जब प्रकाश सिंह बादल नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर बरस रहे थे, ठीक तब कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुसलमान रहनुमा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से सीएए के खिलाफ हिमायत के लिए बैठक कर रहे थे। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने मुस्लिम शिष्टमंडल को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि अब प्रकाश सिंह बादल का रुख पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद सिरमौर सिख संस्थाएं तथा शिरोमणि अकाली दल खुलकर नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ मोर्चा ले सकता है। श्री अकाल तख्त साहिब सीएए के खिलाफ रिवायती ‘हुकमनामा’ जारी कर सकता है और एसजीपीसी आधिकारिक दिशानिर्देश।                                                       

फिलवक्त प्रकाश सिंह बादल के केंद्र सरकार, नागरिकता संशोधन विधेयक, देश के वर्तमान माहौल तथा धर्मनिरपेक्षता पर दिए गए तीखे बयान पर भाजपा खामोश है लेकिन यह तय है कि बादल की आवाज ने ‘दिल्ली’ को भी अब तक जरूर हिला दिया होगा!

(वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)


This post was last modified on February 14, 2020 1:05 pm

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