Subscribe for notification

पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर केस: अपने ही तर्कों के जाल में फंसती जा रही है यूपी पुलिस

करगुआ खुर्द/झांसी/नई दिल्ली। यूपी में झांसी का पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे के साथ यह और गंभीर हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने सीआईएसएफ दिल्ली में तैनात पुष्पेंद्र के बड़े भाई रविंदर को भी इंस्पेक्टर पर हमले का आरोपी बना दिया है। जबकि उनका कहना है कि घटना के समय वह दिल्ली में अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

घटना, घटनाक्रम और उसके पीछे की कहानी बेहद उलझी हुई है। लेकिन गहरी नजर डालने पर तस्वीर बिल्कुल साफ होने लगती है। एक स्थानीय पत्रकार ने जनचौक से बातचीत में बताया कि घटना की शुरुआत 5 अक्तूबर को शाम को 7-8 बजे के आस-पास उस समय होती है जब ह्वाट्स एप ग्रुपों और स्थानीय मीडिया में यह संदेश और खबर आनी शुरू हुई कि मोठ थाने के एचएसओ धर्मेंद्र चौहान पर बदमाशों ने हमला कर दिया है। और बदमाश उनकी कार (यह क्रेटा कार बतायी जा रही है) लेकर भाग गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस मेसेज में पुष्पेंद्र यादव का नाम भी दर्ज था। मेसेज में पुष्पेंद्र यादव समेत कुछ बदमाश शामिल थे। ऐसा लिखा गया था।

पत्रकार का कहना था कि पुष्पेंद्र यादव का नाम आते ही उनके घर के लोग न केवल चिंतित हुए बल्कि उनकी खोज में सक्रिय भी हो गए।

एफआईआर में दर्ज इस घटना का एसएचओ धर्मेंद्र चौहान ने कुछ इस तरह से बयान किया है। उसमें कहा गया है कि जब तीनों पुष्पेंद्र, रविंदर और विपिन ने क्रेटा कार को रोका तो “विपिन ने पुष्पेंद्र की तरफ देखा और क्रोध में कहा ‘यही इंस्पेक्टर है जिसने 29 सितंबर 2019 को हमारी ट्रक जब्त कर ली’” चौहान का कहना है कि पुष्पेंद्र ने उन पर .315 बोर की पिस्टल से फायरिंग किया जिसकी गोली उनके गाल को छूते निकल गयी।

इस बीच, पुलिस प्रशासन के मुताबिक उसने उन कथित बदमाशों की तलाश के लिए रात में ही चार टीमें गठित कर दी। पुलिस का कहना है कि एचएसओ धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व वाली टीम का 2.30 से 3 बजे के बीच पुष्पेंद्र और उसके दोस्तों से गुरसराय थाना क्षेत्र में आमना-सामना हो गया। पुलिस के मुताबिक चौहान ने उन्हें जब रुकने और समर्पण करने के लिए कहा तो ऐसा करने की जगह उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। लिहाजा पुलिस को भी उन पर गोलियां चलानी पड़ी जिसमें पुष्पेंद्र की मौके पर ही मौत हो गयी। जबकि बाकी दो अभियुक्त फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि पुष्पेंद्र अवैध बालू खनन के धंधे में शामिल था और उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।

जांच करती पुलिस। साभार-गूगल।

आपको बता दें कि मामले में आरोपी बनाए गए रविंदर यादव पुष्पेंद्र के सगे भाई हैं और सीआईएसएफ में कांस्टेबल हैं और आजकल दिल्ली में तैनात हैं। जबकि विपिन चचेरा भाई है। और उसका अपना सगा भाई सचेंदर यादव कानपुर में एडीजी मुख्यालय में तैनात था। घटना के बाद जिसका पुलिस लाइन में तबादला कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि ऐसा जांच को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए किया गया है।

कथित मुठभेड़ के बाद पुलिस ने झांसी मुख्यालय से 75 किमी दूर स्थित मऊरानीपुर पोस्टमार्टम हाउस में पुष्पेंद्र यादव का 6 अक्तूबर को आनन-फानन में पोस्टमार्टम करा दिया। और फिर शव को सौंपने के लिए उसे परिजनों के पास भेज दिया जिसे उन्होंने लेने से इंकार कर दिया।

आगे बढ़ने से पहले पुष्पेंद्र यादव के बारे में जान लेना जरूरी है। वह 27 वर्ष का नौजवान था और उसके पास दो ट्रके थीं जिनके जरिये बालू, मोरंग ढुलाई के साथ ही वह यातायात के दूसरे काम करता था।

इस बीच, एनकाउंटर में कथित रूप से घायल धर्मेंद्र चौहान को पहले मोठ स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर उन्हें झांसी के जिला अस्पताल में भेज दिया गया। और आखिर में कानपुर के एक अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि “वह खतरे से बाहर हैं। उनके गाल पर दो घर्षण के निशान थे। उनसे उनके जीवन को कोई खतरा नहीं है। और उसके लिए किसी तरह की सर्जरी की भी जरूरत नहीं है।” दिलचस्प बात यह है कि इस बीच उनका तबादला भी मोठ थाने से कानपुर कर दिया गया।

6 अक्तूबर को दिन में परिवार के लोग सामने आते हैं। पुष्पेंद्र की पत्नी शिवांगी ने मीडिया को बताया कि “मेरे पति की इंस्पेक्टर धर्मेद्र चौहान से ट्रक छुड़ाने को लेकर बात चल रही थी। यह बातचीत पैसे को लकेर चल रही थी। घटना की रात को पुष्पेंद्र ने धर्मेंद्र को बुलाया। उन्होंने धर्मेंद्र से कहा कि पैसे भी ले लिए और ट्रक भी सीज कर दिया। पुष्पेंद्र ने चौहान से अपना पैसा वापस करने के लिए कहा।

परिजनों के बीच अखिलेश।

और इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहा सुनी हो गयी। पुष्पेंद्र ने कहा कि मैंने तुम्हारा वीडियो बना लिया है और नहीं देने पर वायरल कर दूंगा। इस पर इंस्पेक्टर उससे नाराज हो गए और फिर उन्होंने गोली मार दिया”। शिवांगी ने बताया कि इंस्पेक्टर चौहान पहले ही एक लाख रुपये ले लिए थे। वह और पैसों की मांग कर रहे थे। शिवांगी की मानें तो पुष्पेंद्र उस दिन 50 हजार रुपये साथ लेकर भी गए थे।

पुष्पेंद्र का शव बगैर किसी परिजन की उपस्थिति और रात में जलाए जाने को लेकर पत्नी शिवांगी समेत पूरा परिवार बहुत दुखी है। उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा कि क्या रात में किसी हिंदू की लाश जलायी जाती है? इस मामले की सफाई देते हुए पुलिस का कहना है कि चूंकि परिजन शव लेने के लिए तैयार नहीं हुए लिहाजा कानून और व्यवस्था को देखते हुए पुष्पेंद्र के शव के अंतिम संस्कार का काम पुलिस को करना पड़ा। हालांकि उसका कहना है कि उसके पहले उसने सारी औपचारिकताएं पूरी की थीं और पूरा काम हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। उसने बताया कि एडीजी भी गांव गए थे परिजनों से भी उन्होंने मुलाकात की थी बावजूद इसके घर वालों ने पुष्पेंद्र के शव को लेने से इंकार कर दिया।

घटना के बारे में सुनने के बाद पुष्पेंद्र के भाई रविंदर यादव जिन्हें मामले में नामजद किया गया है आनन-फानन में दिल्ली से अपने घर झांसी पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। दिल्ली स्थित उनके महकमे से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

जिस पुष्पेंद्र को पुलिस शातिर और ईनामी अपराधी बता रही है स्थानीय पत्रकार का कहना है कि उसके खिलाफ गंभीर अपराध का कोई मुकदमा नहीं दर्ज है। जो चार-पांच मुकदमे हैं भी वह 107 और 151 से जुड़े हैं। इन धाराओं के तहत कुल 3 मुकदमे हैं। इसके अतिरिक्त एक मुकदमा सरकारी काम में बांधा का दर्ज है। ऐसे में पुलिस द्वारा पुष्पेंद्र को शातिर अपराधी ठहराने की थियरी यहां नाकाम होती दिख रही है।

घटना के विरोध में वाराणसी में प्रदर्शन।

उसी गांव के एक सज्जन चरण सिंह पटेल से जनचौक की बात हुई। उन्होंने पुष्पेंद्र के परिवार उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और घटना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि पुष्पेंद्र के पिता सीआईएसएफ में नौकरी करते थे। लेकिन ड्यूटी के दौरान ही उनकी आंखों की रोशनी चली गयी। जिससे उन्हें बीच में ही नौकरी छोड़नी पड़ी। और फिर उन्हीं की जगह बड़े बेटे रविंदर को सीआईएसएफ में नौकरी मिली। छोटा बेटा पुष्पेंद्र घर पर ही रहता था और उसने अपने और परिवार के जीविकोपार्जन के लिए एक ट्रक ले ली और उससे माल ढुलाई के साथ ही बालू और दूसरे यातायात के काम करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद उसने किस्त पर दूसरी ट्रक ले ली।

घटना का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि ओवरलोडिंग के चलते पुष्पेंद्र की एक ट्रक माल के साथ पकड़ ली गयी। जिस पर क्रशर से निकली डश भरी हुई थी। पटेल का कहना है कि उसको छोड़ने के एवज में पुष्पेंद्र ने इंस्पेक्टर को कुछ रुपये दिए। लेकिन इस बीच थाने पर स्थानीय मीडिया के पहुंच जाने के चलते इंस्पेक्टर को गाड़ी का नियम के हिसाब से चालान करना पड़ा। उनकी मानें तो इसमें पुष्पेंद्र के 1 लाख रुपये से ऊपर खर्च हुए। इस मामले में इंस्पेक्टर चौहान द्वारा कोई मदद न होने पर पुष्पेंद्र ने अपने पहले के दिए पैसे उनसे मांगने शुरू कर दिए। और उसी को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ। आप को बता दें कि पुष्पेंद्र की अभी तीन महीने पहले ही जून में शादी हुई थी। साथ ही एक बात यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि पुष्पेंद्र का खनन से कोई जुड़ाव नहीं था।

हालांकि पुलिस ने मामले में मजेस्ट्रियल जांच बैठा दी है। लेकिन उससे न तो परिजन खुश हैं और न ही उनके शुभचिंतक। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 9 अक्तूबर को परिजनों से मुलाकात की। और 10 अक्तूबर यानि कल उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस करके मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर उनकी पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। और फिर मामले में शामिल सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को सजा होगी। वह पार्टी के स्तर पर इस बात को सुनिश्चित करेंगे।

पुष्पेंद्र की पत्नी शिवांगी।
Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on October 11, 2019 2:38 pm

Share