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सीएए और एनआरसी के विरोध में राजद के बिहार बंद का मिला-जुला असर, ट्रेन और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित

पटना। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के विरोध में राजद द्वारा 21 दिसंबर को  आहूत बिहार बंद के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में बंद समर्थकों के प्रदर्शन जुलूस पर बंद विरोधियों ने पथराव और गोलीबारी शुरू कर दिया।

अचानक हुयी इस गोलीबारी व पथराव में कई लोग घायल हो गए। दोनों ओर से एक घंटे तक जमकर पथराव हुआ, जिसमें दर्जनों लोगों को चोटें लगीं। पथराव में एक पुलिसकर्मी का सिर फट गया, कई अन्य भी घायल हो गए। वहीं चाकू से भी एक युवक घायल हुआ है। हालात को संभालने के लिए पटना जिलाधिकारी कुमार रवि, एसएसपी गरिमा मल्लिक, एसडीएम सहित कई थानों की पुलिस रैपिड एक्शन फोर्स, वज्र वाहन के साथ पहुंच गए।

पुलिस ने लाठीचार्ज कर बवाल कर रहे लोगों को खदेड़ने की कोशिश की। बावजूद इसके हंगामा जारी रहा, तब प्रशासन ने दर्जनों राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े। वाटर कैनन का प्रयोग कर पानी की बौछार की गई। इस बीच, आला अधिकारियों की टीम हालात को काबू में करने के लिए लगातार अनाउंसमेंट करती रही। दोनों पक्षों से सड़क से हटने की अपील करती रही, लेकिन दोनों ही पक्ष हटने को तैयार नहीं दिखे।

तीन घंटे के प्रयास के बाद रणक्षेत्र बने फुलवारी शरीफ में हालात सामान्य हो सका। रैफ बीएमपी समेत भारी फोर्स तैनात की गयी थी।

हालात सामान्य होने के बाद भी हर प्रमुख चौक-चौराहा और गली के पास पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी। प्रशासन गोलीबारी करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में जुटा है।

बता दें कि राजद के आह्वान पर आहूत बिहार बंद के दौरान टमटम पड़ाव के पास प्रदर्शन के दौरान संगत मुहल्ले की ओर से कुछ लोगों ने राजद के प्रदर्शनकारियों पर पथराव कर दिया था, जिसके बाद दोनों ओर से पथराव में कई पुलिस कर्मियों सहित कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

विदित हो कि राजद के बिहार बंद को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलर्ट जारी कर दिया था। मंत्रालय ने भीड़ और हंगामा वाले इलाकों में विशेष रूप से ड्रोन से फोटोग्राफी कराने को कहा था, ताकि उपद्रवियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

सीएए व एनआरसी के खिलाफ राजद द्वारा आहूत बिहार बंद के दौरान पटना शहर के फुलवारीशरीफ में बंद समर्थकों पर पथराव व फायरिंग की घटना की भाकपा-माले राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि आरएसएस व बजरंगज दल के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। ये ताकतें सीएए व एनआरसी के खिलाफ उठ खड़े हुए आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की लगातार कोशिश कर रही हैं, लेकिन जनता उनकी असलियत पूरी तरह से समझ चुकी है। यही कारण है कि ये लोग बौखलाहट में इस तरह की कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज पूरा देश सीएए व एनआरसी के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है, लेकिन भाजपा से जुड़ा एबीवीपी और अन्य संगठन उसके पक्ष में उन्माद व नफरत का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में भाकपा-माले बिहार सरकार से मांग करती है कि सांप्रदायिक उन्माद-उत्पात फैलाने वाली ताकतों पर सख्ती से लगाम लगाए और आम लोगों के जान-माल की सुरक्षा की गारंटी करे।

घटना की जानकारी मिलते ही भाकपा-माले की राज्य कमेटी के सदस्य रणविजय कुमार के नेतृत्व में एक जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। जांच टीम ने कहा है कि खलीलपुर से निकला जुलूस जैसे ही टमटम पड़ाव के पास पूरब की ओर मुड़ा, बगल के मुहल्ले (जो आरएसएस समर्थित लोगों का मुहल्ला है) से पथराव आरंभ हो गया और फिर फायरिंग भी आरंभ हो गई। इससे भगदड़ की स्थिति मच गई। एक से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है।

बताते चलें कि मुख्य विपक्षी दलों द्वारा बुलाये गए बिहार बंद से महज दो दिन पहले वाम दलों ने राज्यव्यापी बंद बुलाया था। राजद ने पहले 22 दिसंबर को बंद का आह्वान किया था, लेकिन रविवार को पुलिस भर्ती परीक्षाओं के मद्देनजर उसने एक दिन पहले बंद का कॉल दे दिया। 20 दिसंबर की रात को विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद कार्यकर्ताओं ने बंद के लिए   शहर में मशाल जुलूस निकाला था। उन्होंने बंद को ‘‘केंद्र की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के हमलों से संविधान को बचाने की कवायद” बताया। यादव ने कहा था, ‘‘यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा, लेकिन अगर राज्य पुलिस किसी तरह की ज्यादती करती है तो इसका जवाब दिया जायेगा।”

फुलवारी शरीफ में झड़प।

खबरों के मुताबिक बिहार में राजद के हजारों समर्थकों ने संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के तहत राज्यव्यापी बंद के दौरान रेल तथा सड़क यातायात बाधित कर दिया। वहीं पटना में पार्टी के सैकड़ों समर्थक लाठियां और पार्टी के झंडे लेकर रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों में घुस गये, बंद समर्थकों में बच्चे भी शामिल देखे गए।

नवादा में बंद समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर प्रदर्शन किया। बंद से वाहनों का आवागमन बाधित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फरपुर के जीरो मील चौक पर भी प्रदर्शन किया। अररिया और पूर्वी चंपारण जिलों में बंद समर्थक रेल की पटरियों पर बैठ गए।

दरभंगा के कोतवाली ओपी के निकट सड़क जाम कर रहे आरजेडी कार्यकर्ताओं को एसएसपी बाबूराम ने हटाया। वहीं कई जगह बंद के नाम पर हुड़दंग कर रहे आरजेडी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। दरभंगा से लहेरियासराय मुख्य सड़क को नाका-5 के पास जाम कर प्रदर्शनकारियों ने आगजनी भी की। समस्तीपुर से दरभंगा, सीतामढ़ी के रास्ते मुजफ्फरपुर जानेवाली 75207 रेलगाड़ी को देवरा बंधौली हाल्ट पर बंद समर्थकों ने रोक दिया। कमतौल-भड़बाड़ा पथ में कुम्हरौली चौक पर समर्थकों ने सड़क जाम कर दिया।

कुशेश्वर स्थान पूर्वी में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने बाजार के बस स्टैंड में सड़क जाम कर आगजनी की। दरभंगा में अदलपुर मोड़, डीकेबीएम एसएच-75 पथ, माधोपट्टी, अलीनगर, केवटी, सिमरी चौक, भरवाड़ा, सत्तीघाट में महागठबंधन का एसएच-56, पाली चौक शिवनगर घाट, कोठराम चौक, हाटगाछी-बौराम मार्ग, कुनौनी चौक, कुमई नाड़ी, लहेरिया सराय जामा मस्जिद और खाजासराय चौक पर आरजेडी कार्यकर्ताओं ने जाम पर सीएए के विरोध में प्रदर्शन किया।

पटना में सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़क पर उतरे आरजेडी सहित विरोध प्रदर्शन में इमारत शरिया भी शामिल हुई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका।

एसएसपी बाबूराम और सिटी एसपी योगेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस अधिकारी और जवान शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर तैनात किये गये हैं। जाम करने वाले को हटाया जा रहा है।

मधेपुरा के उदाकिशुनगंज में बंद समर्थकों ने सुबह से ही सड़क पर उतर कर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

भोजपुर जिले के आरा-सासाराम स्टेट हाईवे को जाम कर चरपोखरी में आरजेडी और कांग्रेस के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। वहीं अगिआंव बाजार में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने गाड़ियों का आवागमन बाधित कर दिया। शाहपुर थाना चौक के समीप आरा-बक्सर एनएच 84 मुख्य मार्ग को आरजेडी कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया। पीरो में भी सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़क जाम और प्रदर्शन किया गया।

लखीसराय में भी सीएए और एनआरसी के विरोध में आरजेडी और कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और विरोध जताया।

मुंगेर में भी बंद समर्थक सड़क पर उतरे और जाम कर विरोध जताया। वहीं, धरहरा-जमालपुर मुख्यमार्ग के समीप आरजेडी नेता धरने पर बैठ गये। गया के टेउसा बाजार में बंद समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का पुतला दहन किया।

वैशाली जिले के लालगंज में भी आरजेडी कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। वहीं भगवानपुर में एनएच 22 पर मवेशी के साथ बंद समर्थक सड़क पर उतरे और आगजनी कर प्रदर्शन किया। पातेपुर के महुआ ताजपुर मार्ग को दभइच चौक पर सड़क पर टायर जलाकर बंद समर्थकों ने सड़क को जाम कर दिया। सहदेई बुजुर्ग के आरजेडी कार्यकर्ता भी सड़क पर उतरे। महनार में भी आरजेडी कार्यकर्ताओं ने बाजार और सड़क यातायात को बंद कराया। देसरी में हाजीपुर-महनार पथ को चांदपुरा ओपी के समीप आरजेडी कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया। वहीं सड़क पर अलाव जला कर बंद समर्थक सड़क पर बैठ गये। जंदाहा-हाजीपुर एनएच 322 पर जंदाहा बाया नदी पुल को आरजेडी कार्यकर्ताओं ने आवाजाही को अवरुद्ध कर दिया।

राघोपुर के रुस्तमपुर कच्ची दरगाह गंगा नदी पर बने पीपा पुल को आरजेडी कार्यकर्ताओं ने बंद किया। महुआ में सड़क पर आगजनी कर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया। वहीं बहुआरा में महुआ ताजपुर मार्ग को कार्यकर्ताओं ने जाम कर बाधित कर दिया।

वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) जितेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में पर्याप्त बलों की तैनाती की गई और संबंधित अधिकारियों के समक्ष परेशानी खड़ी करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति से सख्ती से निपटने के लिए कहा है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि राजद का बिहार बंद लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन नहीं, राजनीतिक गुंडागर्दी था। उन्होंने कहा है कि राजद को पहले से पता था कि उनके बिहार बंद को सिवा एक गुमराह समुदाय के कट्टरपंथियों के अलावा नागरिकता कानून को ठीक से समझने वाले एक भी आदमी का समर्थन नहीं मिलने वाला है, इसलिए वे पेट्रोल, माचिस और तेल पिलायी लाठी लेकर शांतिपूर्ण लोगों को अपने जंगलराज की याद दिलाने निकले थे। सुशील कुमार मोदी के ट्वीट में ‘एक गुमराह समुदाय के कट्टरपंथियों’ वाली लाइन को समझने में कोई कठीनाई नहीं है कि उनका इशारा किधर है।

इधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो टूक कहा कि बिहार में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) लागू नहीं होगा। इस बारे में बाद में विस्तार से वह अपनी बात रखेंगे। सीएए और एनआरसी पर देश भर में चल रहे विरोध के बीच 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री का एनआरसी पर यह पहली बार बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि बिहार में यह लागू नहीं होगा।

वे 20 दिसंबर को इंडियन रोड कांग्रेस के 80वें अधिवेशन का उद्घाटन समारोह से बाहर निकलते समय पत्रकारों द्वारा एनआरसी लागू किये जाने को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश की गई, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि काहे की एनआरसी? मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले पर वह अपनी बात विस्तार से एक-दो दिनों के बाद रखेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद यह तय हो गया है कि जदयू और मुख्यमंत्री बिहार में एनआरसी लागू होने के पक्ष में नहीं हैं।

This post was last modified on December 21, 2019 9:44 pm

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