Subscribe for notification

जिस आईएनएक्स कंपनी की करतूतों के लिए पीटर मुखर्जी जेल काट रहे हैं उसके मालिक थे मुकेश अंबानी!

नई दिल्ली। एक चौंकाने वाले बयान में आईएनएक्स मीडिया केस के मुख्य आरोपी पीटर मुखर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने इस बात का दावा किया था कि आईएनएक्स मीडिया के मालिक मुकेश अंबानी और उनका परिवार है। गौरतलब है कि यह कंपनी इस समय विवादों के घेरे में हैं और उसके उसी विवाद के चलते पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी जेल की सलाखों के पीछे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के बयान पर ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को एक बार गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि बाद में दोनों को जमानत मिल गयी थी।

पीटर मुखर्जी ने ईडी को यह भी बताया कि मुकेश अंबानी चिदंबरम और उनके बेटे के साथ सीधे संपर्क में थे। और उनका रिलायंस के साथ दिन-प्रति-दिन का लेन-देन उनके कर्मचारियों के जरिये होती थी।

उनका बयान इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कार्ति को जिस घूस को दिए जाने का ईडी आरोप लगाता है वह एक अंबानी की फर्म के लिए दिया गया था- मुखर्जी ने जांचकर्ताओं को बताया कि अंबानी फर्म के मालिक थे और पीटर तथा खुद इंद्राणी उसका प्रतिनिधित्व करते थे।

ईडी केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले रेवेन्यू डिपार्टमेंट के तहत आता है। पिछले महीने बेहद आश्चर्यजनक तरीके से मोदी सरकार ने एजेंसी के हेड को एक साल का सेवा विस्तार दिया है।

इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह ईडी जो आरोपियों के बयान पर चिदंबरम और कार्ति को न केवल पूछताछ के लिए बुलाया बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी किया, उसने अंबानी या फिर उनके किसी सहयोगी को पूछताछ तक के लिए भी बुलाना जरूरी नहीं समझा।

इस सिलसिले में “द वायर” द्वारा पूछे गए किसी भी सवाल का ईडी ने जवाब देने से इंकार कर दिया। इसमें उसने पूछा था कि मुखर्जी के 2018 के बयान के बाद क्या एजेंसी ने अंबानी के खिलाफ कोई कार्रवाई की है या फिर बाद में कुछ करने का इरादा है।

मुखर्जी के बयान की रोशनी में अभी तक यह बात स्पष्ट नहीं हो पायी है कि ईडी ने क्या काई प्रयास यह जानने के लिए किया है कि कंपनी के मालिक सचमुच में अंबानी हैं या नहीं जिससे मुखर्जी के बयानों की पुष्टि हो सके। साथ ही अंबानी से भी यह जानने की कोशिश हुई कि क्या वो इस कंपनी के मालिक थे। या यह जानने की कोशिश करती कि जो घूस दिया गया था क्या इसकी उनको जानकारी थी। क्योंकि मुखर्जी का कहना है कि रिलायंस एक्जीक्यूटिव के साथ डे-टूडे की डीलिंग होती थी।

इस सिलसिले में द वायर ने रिलायंस के पास सवालों की एक श्रृंखला भेजी थी जिसमें उसने यह जानने की कोशिश की थी कि क्या एजेंसी ने कभी पूछताछ के लिए अंबानी या फिर किसी दूसरे को बुलाया था। इस लेख के प्रकाशित होने के समय तक उधर से कोई जवाब नहीं आया था।

जब मामले की जांच करने वाले ईडी अफसर संदीप थपलियाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह बातचीत करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह केस से बाहर चले गए हैं। यह पूछे जाने पर कि पीटर और इंद्राणी मुखर्जी द्वारा नाम लिए जाने पर क्या उन्होंने अंबानी या फिर उनके किसी सहयोगी को बुलाया था थपलियाल ने कहा कि केवल उनके वरिष्ठ ही इन सवालों का जवाब दे सकते हैं।

केस का सुपरविजन कर रहे थपलियाल के बॉस महेश गुप्ता ने कहा कि वह बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं और इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि अंबानी को पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया।

सीधे संपर्क में

अपने बयान में मुखर्जी ने आरोप लगाया था कि वह और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के पास केवल 10 फीसदी शेयर था जबकि 40 फीसदी जो इंद्राणी के पास था वह मुकेश अंबानी और उनके परिवार और मित्रों के लिए होल्डिंग कैपसिटी में था। एक तरह की बेनामी संपत्ति। मुखर्जी ने यह भी दावा किया था कि एनएसआरपीई नाम की एक प्राइवेट इक्विटी फर्म अंबानी के मित्रों के लिए एक वेहिकल थी उसके पास भी फर्म का 20 फीसदी का मालिकाना था। इस तरह से आईएनएक्स मीडिया में अंबानी के पास बहुमत की हिस्सेदारी थी और वह भी तकरीबन 60 फीसदी।

मुखर्जी ने यह भी कहा कि अंबानी पी चिदंबरम जैसे वरिष्ठ नेता और उनके बेटे कार्ति के साथ सीधे संपर्क में थे। और उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस के साथ उनकी रोजाना की डीलिंग होती थी वह भी रिलायंस के एक्जीक्यूटिव के जरिये। इस सिलसिले में उन्होंने बाकायदा अंबानी के विश्वसनीय कर्मचारियों एलवी मर्चेंट, मनोज मोदी और आनंद जैन का नाम तक लिया।

मुखर्जी ने यह बयान 7 मार्च, 2018 को विवेक माहेश्वरी नाम के एक असिस्टेंट डायरेक्टर के सामने दिया था। और पूरा बयान हाथ से लिखा हुआ था। प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट के तहत एक हाथ से लिखा गया बयान और वह भी एक असिस्टेंट लेवेल के डायरेक्टर के सामने कोर्ट में संज्ञेय प्रमाण के तौर पर मान्य है।

वायर को यह जानकारी नहीं है कि बाद में चार्जशीट दायर करते समय क्या उसमें मुखर्जी के अंबानी संबंधी बयान को हिस्सा बनाया गया है या नहीं? चार्जशीट इसी साल के जून महीने में दाखिल की गयी है। कोर्ट को अभी चार्जशीट देखना बाकी है।

यह बात रिपोर्टरों के हवाले से सामने आयी थी कि पीटर और इंद्राणी ने अपने बयान में कहा था कि दोनों की पी चिदंबरम के साथ उस समय मुलाकात हुई थी जब वह वित्तमंत्री थे। मुखर्जी का यह आरोप कि अंबानी कंपनी के मालिक थे। साथ ही इंद्राणी रिलायंस की बेनामी के तौर पर काम कर रही थीं ये दोनों बातें कभी भी मीडिया के सामने नहीं आयीं।

मुखर्जी दंपति ने यह आरोप लगाया था कि कार्ति के साथ जब दिल्ली स्थित एक होटल में उनकी मुलाकात हुई थी तो कार्ति ने एक मिलियन डालर घूस मांगा था। सच्चाई यह है कि दो आरोपियों द्वारा अंबानी को असली मालिक बताया गया लेकिन उनसे ईडी द्वारा अभी तक पूछताछ नहीं की गयी जबकि चिदंबरम और उनके बेटे को केवल डिस्प्ले किया गया। इस बात से देखा जा सकता है कि एजेंसियां राजनीतिक केसों में कैसे पिक एंड चूज के सिद्धांत पर काम कर रही हैं।

आरआईएल और उसकी सहयोगी कंपनियों की आईएनएक्स/न्यूजएक्स ग्रुप में क्या भूमिका रही है उसको खुद पहले भारत सरकार की अपनी एजेंसियां उठाती रही हैं।

एक वरिष्ठ पत्रकार प्रणंजय गुहा ठाकुरता ने नवंबर 2013 में हूट में प्रकाशित एक आर्टिकिल में इसका विस्तार से वर्णन किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि मुखर्जी ने आईएनएक्स और न्यूजएक्स मीडिया ग्रुप की अपनी हिस्सेदारी कैसे बेच दी थी और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कैसे उसे खरीद लिया था और फिर उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।

ये दावे उस एसएफआईओ की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट के बाद सामने आए जिसमें आरआईएल और अंबानी से जुड़ी कंपनियों द्वारा अप्रत्याशित किस्म के लेन-देन की रिपोर्ट की थी।

यह पहला मामला नहीं है जब अंबानी का किसी एक मामले में किसी आरोपी द्वारा नाम लिया गया और फिर उन्हें एजेंसियों द्वारा पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया। अगस्ता वेस्टलैंड के हाईप्रोफाइल केस में भी मुख्य आरोपी क्रिश्चियन मिशेल ने दावा किया था कि वह डील के लिए एक नौकरशाही और राजनीति से जुड़े शख्स की तलाश कर रहा था और जिस व्यक्ति की उसने सिफारिश की थी वह मुकेश अंबानी था।

(द वायर में रोहिणी सिंह की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on December 7, 2020 5:12 pm

Share