Sun. May 31st, 2020

मोदी के 15 लाख के सूट का रिटर्न गिफ्ट है ज्योति सीएनसी से 50 हज़ार ‘वेंटिलेटरों’ की ख़रीद!

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मोदी का सूट और उद्घाटन करते रूपानी।

नई दिल्ली। वेंटिलेटर के नाम पर जो अंबु बैग गुजरात सरकार को बेचा गया था पता चल रहा है कि केंद्र सरकार ने भी उसकी ख़रीद का आर्डर दे रखा है। और ख़रीदे जाने वाले 50 हज़ार उन वेंटिलेटरों का भुगतान पीएम केयर्स फंड से किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी में सूरत के उस व्यापारी की भी हिस्सेदारी है जिसने मोदी के नाम वाला सूट पीएम को गिफ़्ट किया था। और जिसकी क़ीमत 15 लाख बतायी गयी थी।

आपको बता दें कि वेंटलेटर के नाम पर राजकोट स्थित ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड से जिस मशीन को ख़रीदा गया था सूबे के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और उपमुख्य मंत्री नितिन पटेल ने पूरे गाजे-बाजे और शोर-शराब के साथ इसका उद्घाटन किया था। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में उद्घाटन के समय इसे मेक इन इंडिया की नई मिसाल बताया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि एक बार फिर गुजरात ने दुनिया को रास्ता दिखाया है। दरअसल ‘वेंटिलेटर’ की क़ीमत महज़ 1 लाख रुपये बतायी गयी थी। 

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धमन-1 के नाम से बनायी गयी यह मशीन गुजरात के अलग-अलग अस्पतालों में भेज दी गयी। इसके वेंटिलेटर न होने का खुलासा उस समय हुआ जब अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ने वेंटिलेटर की अलग से ख़रीद के लिए विज्ञापन जारी किया। यह पूछे जाने पर कि धमन-1 वेंटिलेटर तो अस्पताल के पास है फिर अलग से वेंटिलेटर की क्या ज़रूरत। तब जाकर अस्पताल के चिकित्सकों ने इसका खुलासा किया कि वह वेंटिलेटर नहीं है। और उसे किसी इमरजेंसी में कुछ समय के लिए सांस देने में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन वेंटिलेटर का काम वह नहीं कर सकता है। चिकित्सकों के इस खुलासे के बाद न केवल कंपनी की पोल खुल गयी बल्कि सरकार की असलियत भी सामने आ गयी। और फिर सरकार ने यह कहना शुरू कर दिया कि उसको पता था कि वह वेंटिलेटर नहीं है।

हालाँकि सच्चाई यह है सरकार झूठ बोल रही है। क्योंकि उद्घाटन के दिन जारी सरकारी विज्ञप्ति में उसे वेंटिलेटर कह कर ही संबोधित किया गया था। दरअसल कंपनी राजकोट की है। मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी राजकोट के हैं। और बताया जा रहा है कि ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जडेजा से मुख्यमंत्री विजय रूपानी की गहरी दोस्ती है। अब मुख्यमंत्री अपने दोस्त के काम नहीं आएँगे तो भला किसके काम आएंगे। वेंटिलेटर के नाम पर यह ख़रीद उसी का नतीजा था। इस पूरी कहानी और उसके पूरे घटनाक्रम को अहमदाबाद मिरर सबसे पहले सामने लाया था।

रिश्तों के जिस पौधे को पालने-पोसने और फिर फल देने तक ले जाया गया है वह केवल मुख्यमंत्री विजय रूपानी तक सीमित नहीं था। बताया जाता है कि कंपनी के कुछ मौजूदा और पूर्व प्रमोटरों का बीजेपी के आला नेताओं से भी रिश्ता है। द वायर के मुताबिक़ कंपनी से जुड़े एक व्यवसायी परिवार का पीएम मोदी से सीधा रिश्ता निकला है। यह वही परिवार है जिसने पीएम मोदी को वह चर्चित सूट उपहार में दिया था जिस पर मोदी-मोदी लिखा था और उसकी क़ीमत 15 लाख रुपये बतायी गयी थी। जिसे उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौक़े पर 2015 में तत्कालीन अमेरिका राष्ट्रपति ओबामा के साथ पहना था।

अब केंद्र सरकार ने भी इन कथित वेंटिलेटरों को ख़रीदने का फ़ैसला किया है। यह जानकारी किसी और ने नहीं बल्कि गुजरात की स्वास्थ्य सचिव जयंति रवि ने दिया है। उन्होंने बताया ख़रीद की पूरी प्रक्रिया भारत सरकार की कंपनी एचएलएल लाइफ़ केयर के ज़रिये आगे बढ़ायी जा रही है। इसके साथ ही इस बात की पूरी संभावना है कि उसे वित्तीय संसाधन पीएम केयर्स फंड की ओर से मुहैया कराए जाएं। क्योंकि उसने इस महीने के शुरू में अपने एक बयान में कहा था कि ‘मेड इन इंडिया’ वेंटिलेटरों की ख़रीद में वह 2000 करोड़ रुपये खर्च करेगा।

इस वेंटिलेटर के बारे में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के एनीस्थीसिया डिपार्टमेंट के हेड शैलेश शाह ने पीटीआई एजेंसी को बताया था कि “सौभाग्य से हम लोग कुछ मौक़ों पर इन वेंटिलेटरों का इस्तेमाल किए थे। जैसा कि बड़े वेंटिलेटर हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे। धमन-1 उन उच्च निर्मित वेंटिलेटरों का स्थान नहीं ले सकता है। लेकिन इसे उस इमरजेंसी की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है जब आपके पास कुछ न हो।”

अहमदाबाद मिरर के मुताबिक़ धमन-1 के 900 कथित वेंटिलेटर पूरे सूबे में स्टाल कर दिए गए हैं। अकेले अहमदाबाद सिविल अस्पताल में उनकी संख्या 230 है। विपक्षी कांग्रेस ने इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। और तमाम मरीज़ सरकार से इस बात का जवाब माँग रहे हैं कि उनके परिजनों की मौत कहीं इस नक़ली वेंटिलेटर के चलते तो नहीं हुई है। इस तरह के कई ट्वीट सामने आए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर कर इन अंबु बैगों को वेंटिलेटर के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाज़त दी। जिसके चलते कितने मरीज़ों की जान को ख़तरे में डाला। इसके साथ ही उसने यह भी कहा कि अस्पताल में हुई 300 से ज़्यादा मौतों के लिए क्या यही वेंटिलेटर ज़िम्मेदार नहीं है? 

शुक्रवार को बीबीसी के एक पत्रकार ने ट्वीट कर बताया कि उसके जीजा की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मौत हो गयी। इसके साथ ही उसने जानना चाहा कि क्या उन्हें धमन-1 पर रखा गया था।

उसने अपने ट्वीट में लिखा है कि “मेरे जीजा का अहमदाबाद सिविल अस्पताल में निधन हो गया। मेरे पास मुख्यमंत्री गुजरात के लिए तीन सवाल हैं। 1- उनकी 16 मई को सुबह मौत होने के बावजूद क्यों हम लोगों को शाम तक सूचना नहीं दी गयी। 2- क्या उन्हें धमन-1 पर रखा गया था। 3-उनकी शरीर से फ़ोन और घड़ी किसने निकाली।” इस ट्वीट में उन्होंने पीएमओ के साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को भी टैग किया है।

अहमदाबाद मिरर ने रिपोर्ट किया था कि इन वेंटिलेटरों को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से भी लाइसेंस नहीं मिला है। और इन्हें केवल एक शख़्स पर टेस्ट के बाद मुख्यमंत्री रूपानी द्वारा 5 अप्रैल को स्थापित कर दिया गया। जब मशीन के ज़रिये मरीज़ का टेस्ट हो रहा था तो उस मौक़े पर मुख्यमंत्री और उनके डिप्टी नितिन पटेल दोनों मौजूद थे।

न्यूज़पेपर का कहना है कि पूरे लॉकडाउन के दौरान रूपानी केवल एक बार अपने क़िले से निकले और वह मौक़ा था इसी मशीन के अहमदाबाद सिविल अस्पताल में उद्घाटन का।

विवाद सामने आने के बाद गुजरात सरकार बैकफ़ुट पर चली गयी। उसका कहना था कि उसने कभी भी इसे वेंटिलेटर के तौर पर ट्रीट नहीं किया। जबकि उसकी ख़ुद की प्रेस रिलीज़ में इसे 9 बार वेंटिलेटर के तौर पर पेश किया गया है। और इसे शानदार उपलब्धि बताया गया है। जो मोदी के मेक इन इंडिया अभियान में एक और कड़ी जोड़ देगा।

गुजरात के इसी प्रचार का नतीजा था कि कुछ और राज्य सरकारों ने भी उन्हें ख़रीदने का फ़ैसला ले लिया। उन्हीं में एक पुडुचेरी की नरायनस्वामी सरकार भी शामिल थी। हालाँकि 20 मई को पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नरायनस्वामी ने ट्वीट कर कहा कि उनका केंद्र शासित प्रदेश धमन-1 मशीन के ख़रीद के आर्डर को रद्द कर रहा है। 

उन्होंने साफ-साफ लिखा कि गुजरात राजकोट के बाई पैट मशीन “धमन-1 के कामकाज को लेकर ढेर सारे विवाद खड़े हो गए हैं। मैंने पुडुचेरी सरकार के स्वास्थ्यमंत्री से विचार-विमर्श किया। हम लोग आर्डर को रद्द कर देंगे और इससे संबंधित पत्र उन्हें भेज दिया गया है।”

एचलएल टेंडर और पीएम केयर्स

20 मई को उसी दिन गुजरात सरकार की स्वास्थ्य मंत्री मशीन की मज़बूती के साथ बचाव में सामने आयीं। उनका कहना था कि मशीन को गुजरात की सरकारी लेबोरेटरी ने सत्यापित किया है। और केंद्र की उच्च शक्ति वाली खरीद कमेटी ने भी यह साबित कर दिया है कि उत्पाद वेंटिलेटर के तौर पर ख़रीद के सारे पैमाने को पूरा करता है।

प्रेस रिलीज़ के ज़रिये सामने आयी अपनी इन टिप्पणियों में जयंति रवि ने इस बात को चिन्हित कर दिया कि केंद्र सरकार की इंटरप्राइज एचएलएल लाइफकेयर ने भी 50000 मशीनों की ख़रीद का ज्योति सीएनसी को आर्डर दिया है।

यह शायद उस टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा है जिसे एचएलएल लाइफकेयर ने मार्च 2020 में शुरू की थी। और जो वित्तीय तौर पर पीएम केयर्स फंड से समर्थित थी। जिसमें कहा गया था कि मई 2020 में 50000 वेंटिलेटरों की ख़रीद के लिए 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। द वायर का कहना है कि इस सिलसिले में वह पीएम केयर्स फंड के किसी शख़्स से संपर्क नहीं कर सका। जिससे वह जान सके कि कौन वेंडर इनकी सप्लाई करेगा जिसके लिए इन रुपयों को अदा करने की बात की जा रही है।

मोदी का चर्चित सूट।

यहाँ एक बार फिर लोगों को यह ज़रूर जान लेना चाहिए कि लोगों के दान से चलने वाले फंड का पैसा कहां खर्च किया जा रहा है सरकार अपनी कार्यप्रणाली की इस न्यूनतम पारदर्शिता के लिए भी तैयार नहीं है। इस सिलसिले में वायर द्वारा पीएमओ से कई बार बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

हैरान करने वाली बात यह है कि अपने डाक्टरों द्वारा इस कथित वेंटिलेटर को लेकर लगातार नकारात्मक फ़ीडबैक के बावजूद ऐसी क्या चीज थी जो सरकार को लगातार इस बात के लिए मजबूर कर रही थी कि वह अपने अस्पतालों में इन्हीं मशीनों का इस्तेमाल करे। जैसा कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुआ। इसका उत्तर कंपनी के मौजूदा और पूर्व प्रमोटरों का मुख्यमंत्री विजय रूपानी और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शायद रिश्ता था। और यह सब कुछ पहले से ही सार्वजनिक है।

रूपानी ने इस वेंटिलेटर के बारे में फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा था कि “मैं यह घोषणा करते हुए ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ कि राजकोट के एक उद्योगपति ने 10 दिनों के भीतर वेंटिलेटर बनाने में सफलता हासिल कर ली है। उन्होंने इसको डिज़ाइन किया। उसका प्रोटोटाइप बनाया और उसके पुर्ज़े ख़रीदे और फिर सफलतापूर्वक वेंटिलेटरों का निर्माण कर दिया। उनकी टेस्टिंग हो चुकी है और सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी हो गयी है। और इसे शनिवार से मरीज़ों के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जाएगा।”  

अहमदाबाद मिरर के मुताबिक़ ज्योति सीएनसी के सीएमडी पराक्रम सिंह जडेजा का बयान था कि गुजरात के सीएम उन्हें रोज़ाना फ़ोन कर उत्साहित करते रहते थे। कुछ दिनों पहले रूपानी ने जडेजा की तरफ़ से एक धन्यवाद संदेश को भी ट्वीट किया था जिसे उन्होंने एमएसएमई से जुड़े केंद्र के पैकेज के सिलसिले में भेजा था।

ज्योति सीएनसी से जुड़ा विरानी नाम का एक व्यवसायी परिवार ऐसा भी है जो पहले ही मोदी के नाम वाला सूट उन्हें गिफ़्ट कर प्रसिद्धि या फिर कहिए कुख्याति हासिल कर चुका है। ग़ौरतलब है कि लाखों रुपये के इस सूट को लेकर देश में बहुत बवाल मचा था। और जब मामला आगे बढ़ा और पीएम मोदी की किरकिरी होने लगी तब उसे नीलाम कर विवाद को शांत करने की कोशिश की गयी थी। पीएम को गिफ़्ट में सूट देने वाला शख़्स यही वीरानी परिवार है जो ज्योति सीएनसी से जुड़ा हुआ है। यह सूरत में रहता है। व्यवसायी रामेशकुमार भीखाभाई वीरानी इसके मुखिया हैं। ज्योति सीएनसी में इस परिवार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। 2003-04 के कंपनी दस्तावेज़ों में भीखाभाई वीरानी के दोनों बेटों अनिल वीरानी और किशोर वीरानी को बड़े शेयरधारक के तौर पर दिखाया गया है।

वीरानी परिवार कार्प ग्रुप चलाता है। और दुनिया के बाहर फैले कारोबार के साथ यह परिवार डायमंड जगत का बड़ा व्यवसायी है।

सूट के विवाद के समय ढेर सारे अख़बारों में वीरानी ने दावा किया था कि उन्होंने मोदी को वह सूट अपने एक छोटे भाई के तौर पर दिया था। और ऐसा अपने बेटे स्मित की शादी में शामिल होने के लिए आमंत्रण की सहज परंपरा के तहत किया था। रमेश वीरानी भी कार्प डायमंड के निदेशक हैं। उन्होंने कहा था कि “मेरे बेटे का नाम स्मित वीरानी है। मैंने वह गिफ़्ट अपने बेटे की तरफ़ से अपने बड़े भाई (मोदी) को दिया था। मेरे बेटे के दिमाग़ में इस तरह के नाम लिखे सूट का विचार आया था। उसने कहा कि वह मोदी को चकित कर देना चाहता है।” यह बात उन्होंने एएनआई से कही थी।

मोदी को उनके नाम वाला सूट गिफ़्ट में देने का विचार देने वाले स्मित रमेशभाई वीरानी की 31 मार्च 2019 तक ज्योति सीएनसी में 20 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी। यह वह तारीख़ है जब आख़िरी बार कंपनी से संबंधित टैक्स और दूसरे हिसाब-किताब हुए थे। इसके अलावा वित्त वर्ष 2019 में कंपनी के दूसरे शेयर धारकों में जडेजा परिवार और एक दूसरी कंपनी ज्योति इंटरनेशनल का नाम शामिल था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ 2012 में गुजरात का मुख्यमंत्री रहते मोदी वीरानी परिवार की एक शादी में शामिल होने के लिए सूरत विमान से गए थे।

टाइम्स आफ इंडिया ने इसकी रिपोर्टिंग कुछ इस तरह से की थी, “कार्प इंपेक्स के चेयरमैन किशोर वीरानी (मालदार) के निजी बुलावे पर मोदी उनके भतीजी और भांजे की शादी में शामिल हुए थे। सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को मोदी द्वारा डायमंड सिटी सूरत के विमान से दौरे का आख़िरी समय में योजना बनी। वह (मोदी) मंगलवार को शहर में ख़ासकर डायमंड बैरन पंकज वीरानी के बेटे और बेटी की भव्य शादी में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। और एसआईसीसीसी में आयोजित इस समारोह में शामिल होने के बाद वापस गांधीनगर लौट गए।“

जब वायर ने ज्योति सीएनसी के सीएमडी जडेजा से संपर्क किया तो पहले उन्होंने बताया कि वीरानी परिवार का कंपनी में 46.76 फ़ीसदी शेयर है। जब यह पूछा गया कि क्या यह वही वीरानी परिवार है जिसने मोदी को विवादित सूट भेंट किया था। तो इस पर जडेजा का कहना था कि शेयरहोल्डिंग को अलग कर दिया गया है और इससे संबंधित वह हालिया दस्तावेज भेज देंगे। उसके बाद उन्होंने अपना फ़ोन यह कहते हुए हैंग पर डाल दिया कि अभी वह ड्राइव कर रहे हैं।

बाद में उन्होंने ई-मेल के ज़रिये वायर को जवाब दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि “जहां तक आज की बात है तो वीरानी परिवार का कोई शेयर नहीं है।” 

यह पूछे जाने पर कि कब शेयर अल ग किया गया और उसे किसे दिया गया तो जडेजा ने इसका कोई साफ़ उत्तर नहीं दिया। उन्होंने केवल कहा कि वह पिछली रात 11 बजे से ड्राइव कर रहे हैं और वो सभी विवरण वीरानी परिवार का आंतरिक मामला है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह एक पारदर्शी शख़्स हैं और हम लोगों को सारा विवरण उपलब्ध करा दिया जाएगा।

द वायर ने हांग-कांग में स्मित वीरानी से संपर्क किया तो उनका कहना था कि वह भारत में नहीं रहते हैं और ज्योति सीएनसी में अपनी हिस्सेदारी तथा उससे जुड़ाव के बारे में वह कुछ भी नहीं बोलना चाहते हैं। 

उसके बाद द वायर के फ़ोन का जडेजा ने कोई जवाब नहीं दिया। न ही उन्होंने कंपनी से संबंधित हालिया दस्तावेज देने का जो वादा किया था उसको पूरा किया। बाद में उन्होंने एक मौक़े पर वायर से कहा कि वह दो घंटे की लंबी बैठक में जा रहे हैं और अभी बात नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजकोट में दूसरे दफ़्तरों की तरह उनका दफ़्तर भी बंद हो गया है।

कार्प ग्रुप के किशोर वीरानी को किए गए कॉल और टेक्स्ट का सिवाय इसके कि ‘मैं व्यस्त हूँ। आप मुझे टेक्स्ट कर सकते हैं’, कोई जवाब नहीं आया।

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