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दाने-दाने को तरस रहे यूपी के ग़रीबों के हिस्से का अनाज बेचा जा रहा था एमपी की मंडी में

कोरोना महामारी के चलते उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को बांटने के लिए भेजा गया गेहूं बंटने की बजाय दूसरे प्रदेशों में बेचा जा रहा है। एक ओर देश में जारी कोरोना लॉकडाउन के बीच गरीब, मजदूर और जरूरतमंद देश के अलग-अलग हिस्सों में दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं, लेकिन ऐसी मुश्किल घड़ी में भी जमाखोर ,काला बाजारी और अधिकारी घोटाले की अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। उप्र के कोविड19 में गरीबों को मुफ्त वितरित हो रहे गेंहू के घोटाले का बड़ा मामला सागर में उजागर हुआ है। मामले में नौ लोगों के खिलाफ विधिवत एफआईआर हो चुकी है। पांच ट्रकों और तीन ट्रालियों में लदा कुल 959 बोरा गेंहू अब तक पकड़ा जा चुका है। दो ट्रक गेहूं खाली होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से मंडी प्रांगण तक पहुंच भी गया था।  ट्रकों पर “कोविड-19 राहत” के पर्चे चिपके हैं और बोरों पर एफसीआई की मुहर लगी है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि सभी ट्रकों पर कोविड-19 रसद आपूर्ति ललितपुर लिखा है। बावजूद इसके उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश की सीमा में बिना रोक-टोक कैसे आ गया? यह भी जांच का विषय है। यह सागर और ललितपुर प्रशासन दोनों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मामला सिर्फ आज का नहीं है बल्कि यह सिलसिला विगत 10 दिनों से निरंतर जारी है।

यह सारा गेंहू उप्र के सीमावर्ती ललितपुर जिले से मध्यप्रदेश के सागर जिले में लाकर यहां के सीहोरा सहकारी समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र, उपकेंद्र भैंसा और उपकेंद्र भापेल में तौलवाये जाने के बाद मप्र सरकार के समर्थन मूल्य 1925 रु प्रति क्विंटल पर बेचा जा रहा था। बाद में मप्र शासन प्रति क्विंटल पर कुछ बोनस राशि भी घोषित करता है। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी केंद्र मप्र शासन के नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विधानसभा क्षेत्र सुरखी में स्थित हैं। जहां से वे फिर से चुनाव लड़ने वाले हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। इसकी जांच में उप्र के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

एफआईआर में तीन समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों के प्रबंधकों, राय वेयर हाउस सीहोरा के संचालक जो कि सागर जिला पंचायत सदस्य के रिश्तेदार हैं, एक स्व सहायता समूह के सदस्यों के नाम हैं। रघु जैसे कुछ रसूखदारों के नाम छोड़े जाने की खबर है। यूपी की कोरोना राहत का गेंहू मालथौन स्थित दोनों प्रदेशों के चेकपोस्ट बैरियर्स को क्रास करने के बजाए मड़ावरा मदनपुर नोनिया तिराहा से होता हुआ लगभग डेढ़ सौ किमी दूर सागर में सीहोरा के राय वेयर हाउस में आकर ट्रालियों में पल्टी होता था। फिर किसानों के गेंहू के रूप में समर्थन मूल्य केंद्र पर तुलवाया जाता था। तीन ट्रक वेयर हाउस से पकड़े गये और दो ट्रक और ट्रालियां वेयर हाउस के पीछे स्थित खरीदी केंद्र से। सागर जिला प्रशासन को किसी ने खुफिया जानकारी दी थी कि यूपी का गेंहू इन केंद्रों पर तौला जा रहा है तब एसडीएम और टीआई राहतगढ़ ने छापामार कार्रवाई की।

आश्चर्यजनक रूप से ललितपुर कलेक्टर ने दिन में ही सफाई देकर यह कहकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की थी कि कुछ किसान और व्यापारी टैक्स बचाने के लिए ऐसा कर रहे थे। पर उन्हें शायद नहीं मालूम था कि ट्रकों पर कोविड-19 राहत और फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया-यूपी सील पूरे मामले की पोल खोल चुकी हैं। इस मामले की जांच को लेकर सागर जिला प्रशासन इतना सख्त है कि उसके दायरे में ललितपुर कलेक्टर भी आ सकते हैं। बड़ा सवाल यह है कि यह खेल कब से चल रहा था और यूपी से अब तक गेंहू के कितने ट्रक पिछले महीने भर में समर्थन मूल्य पर बिकवाए जा चुके हैं।

घोटाले बाजों ने स्थानीय किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल आन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने में किया होगा क्योंकि इसके बिना खरीदी केंद्रों पर गेंहू की खरीद संभव नहीं है। मामला स्वयंसिद्ध इसलिए है क्योंकि समर्थन मूल्य के रेट यूपी में भी वही हैं जो एमपी में हैं तो फिर इतनी लागत लगा कर माल दूसरे प्रदेश में बेचे जाने का औचित्य ही नहीं है। गेंहू के कोरोना राहत के चावल, दाल को भी सागर जिले में लाकर बेचे जाने की आशंका जताई जा रही है जिसे ललितपुर के कुछ व्यापारियों और अधिकारियों ने मिलकर ठिकाने लगाया है।

सागर में लोगों ने दावा किया कि यह घोटाला काफी दिनों से चल रहा था। इस मामले में पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि यह अनाज जिन बोरियों में मिला है उनमें एफसीआई उत्तर प्रदेश की मोहर लगी हुई है। पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। उत्तर प्रदेश से अवैध तरीके से सागर बेचने के लिए आया पांच ट्रक गेंहू बरामद किया गया है। यह गेंहू कोरोना महामारी के बीच उत्तर प्रदेश में जरूरतमंदों को बांटा जाना था। जिन ट्रकों में यह गेहूं रखकर लाया गया था उन सभी ट्रकों पर कोविड-19 खाद रसद आपूर्ति हेतु लिखा हुआ है। इससे पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गरीबों को बांटे जाने वाले आटे में घोटाला सामने आया था।

कोरोना महामारी में गेहूं घोटाले का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसकी कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि लीजिए अब योगी सरकार और शिवराज सरकार मिल कर घोटाला कर रही हैं। 1000 बोरी गेहूं जो यूपी में बांटना था वो एमपी बिकने भेज दिया गया। गरीब के पेट पर लात मार संवेदनहीनता की घोटालेबाज़ों ने हदें पार कर दीं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on May 19, 2020 11:10 am

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