अटॉर्नी जनरल ने नहीं दी अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की अनुमति

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न्यायालय अवमान कानून के प्रावधानों के अनुरूप प्रशांत भूषण के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए सबसे पहले अटार्नी जनरल से सहमति मांगी गयी होती तो सम्भवतः अनुमति उसी तरह नहीं मिलती जिस तरह अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अवमानना का केस चलाने के लिए सहमति देने से इनकार दिया है।

इसका संकेत इस तथ्य से भी मिलता है कि सुनवाई के दौरान देश के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी भूषण को सजा न देने की अपील की थी। उन्होंने भी उच्चतम न्यायालय के पूर्व जजों को लेकर दलील दी। उन्होंने कहा था कि उनके पास कोर्ट के पांच पूर्व जजों के नाम हैं, जिन्होंने कहा था कि उच्चतम न्यायालय में लोकतंत्र नाकाम हुआ है। उनके पास रिटायर्ड जजों के बयान हैं, जिनमें कहा गया था कि उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार था।

अटॉनी जनरल वेणुगोपाल ने बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति देने से इंकार कर दिया है। राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ अभिनेत्री ने कथित तौर पर अपमानजनक और निंदनीय बयान दिए थे। किसी व्यक्ति के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए अदालत की अवमानना कानून, 1971 की धारा 15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलीसीटर जनरल की सहमति की जरूरत होती है। अभिनेत्री के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए वकील अनुज सक्सेना ने अटॉर्नी जनरल की सहमति मांगी थी। वेणुगोपाल ने 21 अगस्त को सक्सेना को लिखे पत्र में कहा कि अभिनेत्री के बयान दो पैराग्राफ में हैं, जो तथ्यात्मक प्रतीत होते हैं और यह बोलने वाले की अपनी धारणा हो सकती है।

अटॉनी जनरल ने कहा कि मेरा मानना है कि इस मामले में अदालत की निंदा या अदालत के अधिकारों को कमतर करने का अपराध नहीं बनता है। इसलिए मैं स्वरा भास्कर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति नहीं दे सकता। सक्सेना और अन्य ने आरोप लगाए हैं कि भास्कर ने मुंबई कलेक्टिव की तरफ से 1 फरवरी, 2020 को आयोजित एक पैनल परिचर्चा में ये बयान दिए थे।

उच्चतम न्यायालय में लगाई गई याचिका में ये आरोप लगाया गया था कि स्वरा ने ये बयान 1 फरवरी, 2020 को एक पैनल में चर्चा के दौरान दिया था। उन्होंने कहा था कि हम एक देश में रह रहे हैं जहां हमारे देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस गैरकानूनी था और फिर उसी फैसले ने उन्हीं लोगों को पुरस्कृत किया, जिन्होंने मस्जिद को गिराया था। याचिका में उस बयान को न्यायालय की छवि खराब करने वाला बताया गया था।

अदालत में बहस के दौरान दौरान अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल को बीच में ही रोकते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि मिस्टर अटॉर्नी, हम यहां मेरिट की बात नहीं कर रहे हैं। जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि आप प्रशांत भूषण का जवाब देखे बिना ऐसी दलील न दें। देखिए, उन्होंने अपने जवाब में क्या कहा है। उनके जवाब में आक्रामकता झलकती है, बचाव नहीं। हम इन्हें माफ नहीं कर सकते। जब तक प्रशांत भूषण अपने स्टेटमेंट पर पुनर्विचार नहीं करते, तब तक यह संभव नहीं है। जस्टिस मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वो 2-3 दिन का वक्त लें। पूरे केस को देखें, उस पर विचार के बाद अपना तर्क दें। जस्टिस मिश्रा ने ये भी कहा कि वो नहीं चाहते कि अटॉर्नी जनरल के मौजूदा तर्क से बेंच प्रभावित हो।

गुरुवार शाम उच्चतम न्यायालय  की वेबसाइट पर अपलोड किए गए इस आदेश में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की उपस्थिति दर्ज नहीं दिखी। अवमानना मामले में सजा को लेकर ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मौजूद थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल से परामर्श भी किया था कि क्या प्रशांत भूषण को ‘विचार करने के लिए’ और अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले पर नाराजगी व्यक्त करने वाले बयान पर पुनर्विचार करने का समय दिया जाए। बाद में उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर संशोधित आदेश अपलोड किया गया, जिसमें अटॉर्नी जनरल की उपस्थिति दर्ज़ की गयी।

अटॉर्नी जनरल प्रशांत भूषण को समय दिए जाने को लेकर सहमत थे। अटॉर्नी जनरल ने तीन जजों वाली पीठ से प्रशांत भूषण के सार्वजनिक हित में किए गए कार्यों को देखते हुए दंडित नहीं किए जाने का अनुरोध भी किया था। हालांकि, पीठ अटॉर्नी जनरल के प्रशांत भूषण को दोषी नहीं ठहराए जाने की दलील पर सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि हम यहां मामले की मेरिट पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। सुनवाई के अंत में अटॉर्नी जनरल ने कई पूर्व जजों के सुप्रीम कोर्ट में लोकतंत्र खत्म होने और शीर्ष ज्यूडिशिएरी में भ्रष्टाचार वाले बयानों का हवाला दिया। अटॉर्नी जनरल ने कहा, इस कोर्ट के अगर पांच जज कहते हैं कि लोकतंत्र खत्म हो गया, तो उनकी बात बीच में ही काटते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मिस्टर अटॉर्नी हम यहां मामले की मेरिट पर विचार नहीं कर रहे हैं।

इस बीच, उच्चतम न्यायालय की अवमानना के मामले में दोषी ठहराए जा चुके वकील प्रशांत भूषण अभी भी टस से मस होने के तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने ट्वीट पर कायम रहते हुए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने भूषण को बिना शर्त माफी मांगने के लिए एक और मौका दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर भूषण चाहें तो 24 अगस्त तक बिना शर्त माफी दाखिल कर सकते हैं और यदि भूषण बिना शर्त माफी मांगते हैं तो कोर्ट मामले पर 25 अगस्त को फिर विचार करेगा। उच्चतम न्यायालय ने बीते गुरुवार को प्रशांत भूषण को सजा के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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