Sunday, October 17, 2021

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EXCLUSIVE: जब एक शव को करना पड़ा सुबह से लेकर रात तक इंतजार

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मौजपुर (नई दिल्ली)। आज मैंने दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। सबसे पहले मैं बाबरपुर स्थित मौजपुर के विजय पार्क इलाके में गयी। मुस्लिम बहुल इस इलाके में कई घर हिंदुओं के हैं साथ ही एक मंदिर भी है। इस दौरान मेरी मंदिर के पुजारी से भी मुलाकात हुई। लेकिन सबसे पहले बात इलाके के हालात और वहां घटी घटनाओं की। इसी इलाके की गली नंबर 27-ए के पास पहुंचने पर देखा कि कुछ लोग एक जगह जमा हैं। पूछने पर पता चला कि वहां एक शख्स की लाश पड़ी है। जिसे सफेद चादर में लपेटकर चारपाई पर रखा गया था। 30-32 साल की उम्र वाले इस शख्स का नाम मुबारक हुसैन बताया गया।

मुबारक राजमिस्त्री का काम करता था। वह बिहार से ताल्लुक रखता था और यहां अपने छोटे भाई सदाकत हुसैन के साथ रहता था। सदाकत वेल्डिंग का काम करता है। शव के पास खड़े एक शख्स ने बताया कि दोपहर में ही उसे गोली लगी थी और उसी दौरान उसकी मौत हो गयी। इसके अलावा इस हमले में दो और लोग घायल हुए थे। इलाके के लोगों ने उस वीडियो को भी दिखाया जिसकी गोली से मुबारक की मौत हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क पर एक शख्स बार-बार पिस्तौल से गली में खड़े लोगों पर निशाना लगाने की कोशिश कर रहा है और आखिर में वह कामयाब हो गया। और उसके हाथ से चली गोली मुबारक के सीने में लगती है और उसकी वहीं मौत हो जाती है।

लोगों ने बताया कि उसके कुछ देर बाद पुलिस के साथ दंगाई आते हैं और तमंचों और तलवारों से हमला बोल देते हैं। जिसमें दो शख्स बुरी तरीके से घायल हो जाते हैं। आसिफ को कंधे में गोली लगती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है जबकि अरशद को तलवार से तीन जगहों पर चोट लगती है। उसके दाहिने पैर के पीछे हिस्से में गहरे कटे का निशान बिल्कुल साफ देखा जा सकता है।

चश्मदीदों का कहना है कि उसके बाद से उन लोगों ने पुलिस और प्रशासन के जरिये मुबारक के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजने की कोशिश शुरू कर दी। एक युवक ने बताया कि इस सिलसिले में भजनपुरा के एसएचओ को फोन किया गया और उन्होंने भरोसा भी दिलाया। और कहा कि दो कांस्टेबल पास के एक प्वाइंट पर भेज रहे हैं शव को उन्हीं को सौंप दो। लेकिन जब इलाके के लोग तय जगह पर गए तो पता चला कि वहां कोई नहीं आया था। लोग डेढ़ घंटे तक वहां इंतजार किए लेकिन पुलिस का कोई भी शख्स वहां नहीं आया। तब से लगातार कभी एंबुलेंस को तो कभी पुलिस प्रशासन को लोग फोन करते रहे लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। और इस तरह से दोपहर से शाम और फिर शाम से रात हो गयी।

वहां पहुंचने के बाद मैंने भी अपनी तरफ से कोशिश शुरू कर दी और इस कड़ी में आम आदमी पार्टी के स्थानीय विधायक गोपाल राय के दफ्तर में फोन कर मदद की गुहार लगायी। उनकी टीम के एक सदस्य कृष्णा ने बताया कि ऐसे तमाम लोगों की शिकायतें और आवेदन आ रहे हैं लेकिन पुलिस और प्रशासन के लोग न तो एंबुलेंस जाने दे रहे हैं और न ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां। इसी सिलसिले में उन्होंने बताया कि ‘आप’ के किसी एक कार्यकर्ता के घर पर आग लग गयी थी उसके लिए उन लोगों ने फायर ब्रिगेड से संपर्क किया और वहां से मौके के लिए दमकल की दो गाड़ियां भी चल दीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।

उन्होंने बताया कि गाड़ी एक घंटे बाद जाने दी गयी। तब तक स्थानीय लोगों ने मिलकर आग पर काबू पा लिया था और जो नुकसान भी होना था वह हो चुका था। कृष्णा ने कहा कि वह अपनी तरफ से कोई गाड़ी भेजने की कोशिश करेंगे। अंत में जब कहीं से किसी तरह की मदद नहीं मिली तो लोगों ने शव को उसी गली के बाहर लावारिस रखने का फैसला किया। 

इसके तहत उन लोगों ने शव को बस्ती से दूर ले जाकर अकेले छोड़ दिया और खुद वापस चले आए। बाद में वहां पुलिस अपनी पूरी पलटन के साथ पहुंची और फिर उसने मुबारक के भाई को भी वहीं बुलवा लिया। उसके बाद मुबारक के शव के साथ उसके भाई को गाड़ी में बैठाकर अस्पताल भेज दिया। 

पूरे इलाके में भय और आतंक का माहौल है। अविश्वास इस कदर है कि दाहिना हाथ बाएं पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं है। मेरे वहां पहुंचने और फिर अपना नाम बताने पर पहले लोग बेहद आशंकित हो गए। लेकिन पत्रकार बताने पर थोड़ा आश्वस्त हुए। मौजपुर के आस-पास के सारे इलाकों की मुख्य सड़कों पर बजरंग दल से जुड़े लोग खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस द्वारा उनको खुला संरक्षण मिला हुआ है। कहीं हमला करना होता है तो पुलिस उनके लिए कवर का काम करती है। मुख्य सड़कों पर घूमते हुए समय-समय पर वे मुस्लिम बहुल वाली गलियों में धावा बोल देते हैं। यह बिल्कुल शिकार करने जैसा होता है। जब शिकारी हमेशा अपने शिकार की तलाश में रहता है। और मौका पड़ने पर उस पर टूट पड़ता है।

पास जमा लोगों ने कुछ ऐसी भी बातें बतायीं जिसको सुनकर किसी के लिए एकबारगी विश्वास कर पाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि बजरंग दल से जुड़े दंगाई हिंदू दुकानों में भी तोड़-फोड़ करने और उन्हें लूटने से बाज नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करके वे उसकी पूरी जिम्मेदारी मुसलमानों पर मढ़ देना चाहते हैं। पास ही शगुन नाम की एक दुकान की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने बताया कि इसको भी बजरंग दल से जुड़े उपद्रवियों ने ही तोड़ा है। दुकान के सामने पड़े बिखरे सामान लूट-पाट की खुली बयानी कर रहे थे।

(ग्राउंड जीरो से जनचौक की दिल्ली हेड वीना की रिपोर्ट।)    

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