रूपेश को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है: पत्नी ईप्सा

(अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनपक्षीय पत्रकारिता के लिए मशहूर रूपेश कुमार सिंह पिछले तीन सालों से बिहार और झारखंड की जेलों में कैद हैं। इस बीच जेल में रहते उन्हें न केवल प्रताड़ित किया जा रहा है बल्कि एक जेल से दूसरे जेल लगातार उनका तबादला किया जा रहा है। जिसका उनके स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ा है। लेकिन उसको ठीक करने और मेडिकल जरूरतों के मुताबिक सुविधाएं मुहैया कराने के बजाय जेल प्रशासन ने उनकी प्रताड़ना को और बढ़ा दिया है। सरकारी नियमों के तहत परिजनों से नियमित होने वाली बात की कड़ी में उनकी जीवनसाथी ईप्सा शताक्षी की उनसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात हुई। रूपेश से हुई बातचीत और उनकी मौजूदा स्थितियों का ईप्सा शताक्षी ने पूरा ब्योरा दिया है। पेश है ईप्सा शताक्षी का नोट-संपादक)

आज यानी 24 अक्टूबर, 2025 को सुबह 10 बजे के लगभग पटना के बेऊर जेल के एसटीडी से रूपेश से बात हुई। बीच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात हुई थी पर एसटीडी खराब था। 

एसटीडी ठीक होने पर बात हो गई। रूपेश को भागलपुर से 23 सितम्बर को वापस बेऊर जेल लाया गया है, चूंकि पटना कोर्ट में मामला चल रहा है इसलिए यहां होना जरूरी था और हमारे वकील साथी के प्रयास पर उन्हें वापस लाया गया।

रूपेश को भागलपुर जेल पनिशमेंट के तौर पर भेजा गया था, मनमाने आरोप के साथ, वह ट्रांसफर बस 6 महीने का था, पर इन्हें पूरे 20 महीने बाद वापस लाया गया है। वहां भागलपुर में रूपेश का स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया था, ट्राइग्लिसराइड्स और वीएल, डीएल, कॉलेस्ट्रॉल खतरनाक स्तर तक बढ़ा हुआ था, साथ ही कमर की नस दबने की समस्या भी सामने आई थी, जिसे लेकर कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई और फिर कोर्ट के आदेश पर इनका इलाज कराया गया और कुछ दिनों के बाद रिपोर्ट ठीक-ठाक आई। पर, वहां अस्पताल में यह कहा गया था कि रेगुलर चेक अप की जरूरत होगी और साथ ही सही खान पान की भी।

पर, जब से रूपेश को बेऊर जेल, पटना लाया गया है तब से पहला, तो उन्हें बेवजह सेल में बंद रखा गया है, जबकि भागलपुर जाने के पहले वह नॉर्मल वार्ड में थे। दूसरा, रूपेश को स्वास्थ्य संबंधी सही डाइट बहुत ही जरूरी है, पर यहां तो जेल मैन्युअल के अनुसार भी डाइट नहीं दिया जा रहा है। स्पेशल डाइट या केयर की तो बात ही दूर है।

रूपेश की कोई मेडिकल जांच भी उनकी कुछ दिन पहले की समस्या को लेकर नहीं करायी गयी है। जबकि यह बहुत ही जरूरी है। क्योंकि उनकी स्वास्थ्य समस्या खतरनाक स्तर को छुए हुए थी।

पिछले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी वह थोड़े दुबले व शारीरिक रूप से थोड़े कमजोर दिख रहे थे। बाकी तो जिन्हें जिंदादिली से जीने की आदत है वह जिंदादिल दिखेगा ही और इसकी भरपूर कोशिश भी करेगा। पर, उनकी स्वास्थ्य समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हम सब जानते हैं कि जब यह क्रूर व्यवस्था एक जनप्रिय और जनपक्षीय इंसान का मनोबल किसी भी तरह नहीं तोड़ सकती है तब वह ऐसी ही मानसिक प्रताड़नाओं का इस्तेमाल करती है। और ऐसे इंसान को स्वास्थ्य से तोड़ने का काम करती है।

रूपेश के साथ भी यही खेल खेला जा रहा है। अगर वह ऐसी स्थिति में जेल के इस मनमाने नियम का किसी भी तरह से विरोध जताएंगे या अपने अधिकार की मांग करेंगे तो फिर से जेल की विधि व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाकर किसी अन्य जेल में भेज दिया जाएगा। जो अब तक होता रहा है। 

रूपेश को मानसिक रूप से परेशान करने के अलावा और कुछ नहीं है। एक जनपक्षीय पत्रकार व लेखक को पहले तो फर्जी आरोप में कई मामले लगाकर तीन साल से ज्यादा समय से जेल में रख गया है, और अब उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर करके व मानसिक प्रताड़ना देकर तोड़ने की भरपूर चाल चली जा रही है। 

भ्रष्टाचार में अव्वल स्थान रखने वाले बेऊर जेल के इस रवैये को देखकर लगता है कि हाईकोर्ट में रिट दाखिल करने की जरूरत है। क्योंकि एक स्वस्थ तथा मानवाधिकार के लिए लिखने, बोलने, लड़ने वाले इंसान के स्वास्थ्य के साथ यह खिलवाड़ बर्दाश्त से बाहर है। 

—- ईप्सा शताक्षी।

(जीवन साथी, पत्रकार रूपेश कुमार सिंह)

24 अक्टूबर 2025।

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