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भट्ठों की बंधुआ जिंदगी से मिली 16 मजदूरों को निजात

ईंट भट्ठे, बंधुआ मजदूरी के पर्याय बन गए हैं। कितना अजीब लगता है सुनने में कि आज जब सूचना और तकनीकी बच्चे-बच्चे की पहुंच में है, ऐसे समय में एक-दो नहीं, दर्जनों लोगों को कुछ लोग बंधुआ बनाकर काम लें। उन्हें मारे-पीटें और उनके स्वतंत्रता के अधिकार से उन्हें वंचित कर दें, लेकिन ये सच है।

23 नवंबर को बंधुआ मुक्ति मोर्चा, ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क एवं नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर ईरेडिकेशन ऑफ़ बोंडेड लेबर के प्रतिनिधियों की टीम संभल जिला पहुंची और वहां जाकर एडीएम संभल से संपर्क किया। एडीएम संभल ने एसडीएम संभल को तत्काल बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने का आदेश दिया। इसके बाद उप जिलाधिकारी देवेंद्र यादव के निर्देशन में नायब तहसीलदार भारत प्रताप सिंह, श्रम अधिकारी विनोद कुमार शर्मा, हरद्वारी लाल गौतम विजिलेंस की टीम मेंबर और असमोली थाना की एक टीम बनाकर बंधुआ मुक्ति मोर्चा के सोनू तोमर, ह्युमन राइट्स लॉ नेटवर्क के एडवोकेट ओसबर्ट खालिंग और कंवलप्रीत कौर की टीम के साथ मछालि के गांव में बहाली के जंगल में छापा मारकर पांच परिवारों के 16 बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाया। इसमें पांच पुरुष, चार महिला एवं सात बच्चे शामिल हैं। ये बंधुआ मज़दूर यूपी के जिला बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर के निवासी थे। ये सभी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं।

मुक्त बंधुआ मजदूरों की हालत बहुत ही नाजुक और दर्दनाक थी। इनके पास कुछ भी  खाने की सामग्री मौजूद नहीं थी। न रहने के लिए मकान थे। मुक्त मजदूरों ने बताया कि  एक ठेकेदार उन्हें उत्तर प्रदेश से जम्मू-कश्मीर में काम करने के लिए यह कहकर ले गया कि एक महीने बाद वो वापस उत्तर प्रदेश ले आएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिवार सहित फंसे मजदूर बंधुआ बनकर दिन रात मालिक एवं ठेकेदारों की मारपीट के शिकार होते। मजदूरों को न तो काम का पैसा मिला, न सम्मान। फिर जब मजदूरों को कश्मीर से संभल जिले में लाया गया तो यहां मालिक का शोषण आसमान पर चढ़कर कहर बरपाने लगा।

जब भी मज़दूर मालिक से मज़दूरी की बात करते तो मालिक के हाथों उन्हें पिटना पड़ता और मालिक मजदूरों को कहीं आने-जाने नहीं देता। मालिक महिला मजदूरों के साथ भी बदतमीजी करता था। खाने के नाम पर प्रत्येक परिवार को एक माह में पांच किलो चावल और पांच किलो आटा और एक किलो दाल दिया जाता था और कुछ नहीं। मजदूर कार्यस्थल पर इधर-उधर से मांग मांग कर पेट भरते थे। मजदूरों की हालत उनके साथ हुए अत्याचार की कहानी बयां कर रही थी।

प्रशासन की टीम द्वारा मजदूरों के बयान दर्ज किए गए। फिर एसडीएम संभल ने भट्टा मालिक और मानव तस्कर पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए और तत्काल मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र जारी किए। सभी मजदूरों को कोई मज़दूरी नहीं दी गई और उन्हें उनके गांव भेज दिया गया।

बता दें कि नेशनल कैंपेन केमटी फॉर ईरेडिकेशन ऑफ़ बोंडेड लेबर उत्तर प्रदेश ने बंधुआ मुक्ति मोर्चा दिल्ली को दिनांक 13/11/2020 को सूचना दी थी कि 16 मजदूर, जो अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, को जिला संभल के मछाली गांव में एच प्लस एच भट्टे में चल रही बंधुआगिरी से मुक्त कराया जाए। तत्काल बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने संभल जिले के जिलाधिकारी एवं एडीएम को एक शिकायत भेजकर मानव तस्करी से पीड़ित बंधुआ मजदूरों के मुक्ति की गुहार लगाई।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के जनरल सेक्रेटरी निर्मल अग्नि ने जनचौक को बताया कि उत्तर प्रदेश के मजदूरों को मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के खेमे से बाहर निकाला गया, किंतु वर्तमान में जीवन जीने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं है। बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास की योजना 2016 के तहत तत्काल सहायता राशि प्रत्येक मुक्त बंधुआ मजदूर को 20,000 रुपये के हिसाब से दी जानी चाहिए। साथ ही संभल जिले में तत्काल प्रभाव से बंधुआ मजदूरों का सर्वे किया जाना चाहिए नहीं तो गुलामी क यह चक्र चलता रहेगा। लॉकडाउन के कारण मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना में मजदूरों को हर कोई बहला-फुसला कर बेच रहा है, इसलिए सरकार मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कड़े कदम उठाए।

कांचीपुरम तमिलनाडु के कारखाने से मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूर
इंडियन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स ( इफ्टू) के प्रयास से कांचीपुरम तमिलनाडु से, भदोही जिले के रहने वाले, 10 बंधुआ मजदूरों को 18 नवंबर को बचाया गया। कड़ी परेशानियों का सामना करने के बाद वे लोग बहरामपुर उड़ीसा पहुंचे थे। वहां से उनका टिकट और अन्य सहयोग दिलाकर वाराणसी के लिए रवाना किया गया।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के चंदौली जिला संयोजक डॉ. राकेश कुमार राम के मुताबिक भदोही के निवासी सुनील, संतोष, अनिल, करमचंद, श्यामभर, राजन, धर्मेंद्र, सुरेंद्र, कमल और कृष्णा को मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांचीपुरम से मुक्त कराया, और उन्हें उनके घर भदोही सुरक्षित पहुंचाया गया।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं का कहना है कि 10 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के बाद पुरी-नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन भेजा गया। ये सभी मजदूर संत रविदास नगर भदोही के रहने वाले हैं और तीन वर्षों से बंधुआ मजदूर के तौर पर कांचीपुरम में एक फैक्ट्री में काम कर रहे थे। यह लोग बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संपर्क में आए, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उन्हें किसी प्रकार वहां से मुक्त कराया और घर पहुंचाने का आश्वासन दिया।

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This post was last modified on November 25, 2020 6:17 pm

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