Wed. Jan 29th, 2020

नार्थ-ईस्ट के साथ अब पंजाब भी नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में सड़कों पर

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नागरिकता संशोधन बिल का सड़कों पर तीखा विरोध पूर्वोत्तर के साथ-साथ अब पंजाब में भी होने लगा है। राज्य भर में जोरदार धरना-प्रदर्शन इस बिल के खिलाफ हो रहे हैं। इनमें बड़ी तादाद में लोग शिरकत कर रहे हैं।

मंगलवार को पूरे पंजाब में मनाया गया मानवाधिकार दिवस, नागरिकता संशोधन बिल विरोधी दिन के रूप में बदल गया। बुधवार को भी यह सिलसिला विभिन्न शहरों और कस्बों में शुरू हो गया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही एलानिया कह चुके हैं कि पंजाब में किसी भी सूरत में यह बिल लागू नहीं होने दिया जाएगा। इस पर विधानसभा का विशेष अधिवेशन बुलाया जाएगा।

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शिरोमणि अकाली दल गोलमोल भाषा में इसका समर्थन कर रहा है तो शेष अकाली दल इस बिल के सख्त खिलाफ है। चंडीगढ़ से लेकर सुदूर शहरों-कस्बों तक नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उनकी अगुवाई कई सियासी और गैर सियासी प्रगतिशील संगठन कर रहे हैं। कतिपय पंजाबी बुद्धिजीवी भी बिल के विरोध में पुरजोर बोल रहे हैं। मुख्यधारा के पंजाबी मीडिया ने भी बिल के खिलाफ सख्त संपादकीय टिप्पणियां की हैं।

नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में पंजाब के चार प्रमुख वामपंथी संगठनों और कई जम्हूरी संगठनों ने अमृतसर में संयुक्त तौर पर एक बड़ी रैली का आयोजन किया। लंबा जलूस निकाला गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुतले जलाए गए।

आरएमपीआई के अखिल भारतीय महासचिव मंगत राम पासला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करने के लिए नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास किया है। इस बिल के तहत बांग्लादेश से आए शरणार्थी हिंदू, सिख, इसाई, बोद्ध, पारसियों को तो भारत का नागरिक बनने का अधिकार मिल जाएगा, लेकिन मुस्लिम शरणार्थीयों को भारतीय नागरिक होने का अधिकार नहीं होगा।

मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल पास करके देश के संविधान की धर्म निरपेक्ष मूल अवधारणा की हत्या की है। यह बिल देश में फैली फिरकापरस्ती में जबरदस्त इजाफा करेगा और अल्पसंख्यकों पर सरकारी संरक्षण में जुल्म बढ़ेंगे।

पंजाब के लोग इसके विरोध में हैं। माझा इलाके के अमृतसर के साथ-साथ ऐसी रोष रैलियां तरनतारन, झब्बाल, अजनाला, भिखीविंड, गुरदासपुर, बटाला और छरहटा में भी की गईं। वक्ताओं ने दूर-दराज से आए लोगों को इस बिल की विसंगतियों और दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया तथा लोगों ने घंटों बैठकर उन्हें सुना। पंजाब के मालवा और दोआबा इलाकों में भी यही आलम था। 

मालवा के मानसा जिले के बोहा कस्बे में भारतीय कमुनिस्ट पार्टी के पोलिट ब्यूरो सदस्य पूर्व विधायक हरदेव अर्शी ने नागरिकता संशोधन बिल विरोधी विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए इसे भाजपा का निहायत जालिमाना फासीवादी पैंतरा बताया। सीपीआई इसके विरोध में 26 दिसंबर को मानसा में महारैली कर रही है। पंजाब के नागरिक संशोधन बिल का विरोध करने वाले संगठनों ने राज्य के तमाम जिलों, शहरों और कस्बों में रैलियां, रोष-प्रदर्शन और समागम किए।

राज्य की राजधानी चंडीगढ़ में जम्हूरी अधिकार सभा ने बिल के विरोध में बड़ा आयोजन किया और बाद में रैली निकाली। सभा के महासचिव (शहीद भगत सिंह के भांजे) प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कहा कि जो 1947 में सांप्रदायिक ताकतें नहीं कर पाईं, उसे मोदी सरकार ने कर दिया है। केंद्र सरकार का नागरिकता संशोधन बिल हर लिहाज से एक सांप्रदायिक एजेंडा है।

जम्हूरी अधिकार सभा ने भी पंजाब के अलग-अलग शहरों में चंडीगढ़ की तरह रोष रैलियां निकालीं। प्रतिष्ठित संस्थान देशभक्त यादगार हाल ने भी नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है। लोक मोर्चा पंजाब के संयोजक अमोलक सिंह कहते हैं कि इस बिल की घातकता के दूरगामी नागवार नतीजे होंगे। नामचीन पंजाबी बुद्धिजीवियों और चिंतकों के विभिन्न संगठनों ने भी बिल के विरोध में वक्तव्य जारी किए हैं।

प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ. सुखदेव सिंह कहते हैं कि यह बिल सरासर फासीवादी है। आज इसका विरोध नहीं किया तो आने वाले वक्त ने ऐसे कई कदम भाजपा सरकार उठाएगी, जो भारत और भारतीयों को पूरी तरह तबाह कर देंगे। उधर, प्रतिष्ठित पंजाबी दैनिक ‘पंजाबी ट्रिब्यून’ और ‘नवां जमाना’ ने भी नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ संपादकीय टिप्पणियां लिखी हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शुरू से ही इस बिल का विरोध कर रहे हैं और राज्य में इसे लागू न करने की बात कह रहे हैं। फिलहाल शिरोमणी अकाली दल यह कहकर भाजपा का समर्थन कर रहा है कि इसमें मुसलमानों को भी शुमार किया जाता तो बेहतर होता। इससे आगे बादल की सरपरस्ती वाला अकाली दल खामोश हो जाता है।

जबकि शिरोमणि अकाली दल के प्रतिद्वंदी पंथक और टकसाली अकाली दल नागरिकता संशोधन बिल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो शिरोमणि अकाली दल कभी अल्पसंख्यक समर्थक राजनीतिक दल माना जाता था, वह सत्ता के लालच में भाजपा का समर्थन कर रहा है। 

बुधवार को भी नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में पंजाब के कई शहरों में महिला और विद्यार्थी जत्थे बंदियों और मानवाधिकार संगठनों ने रोष प्रदर्शन और समागम किए हैं।

(अमरीक वरिष्ठ पत्रकार हैं और जालंधर में रहते हैं।)

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