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अहमदाबाद में सम्मेलन कर अल्पसंख्यकों ने लिया लड़ाई का संकल्प

अहमदाबाद। गुरुवार को गुजरात की राजधानी गांधी नगर में माइनॉरिटी कोआर्डिनेशन कमेटी संस्था द्वारा अल्पसंख्यक अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें राज्य के सभी दलों को न्योता भेजा गया था। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सम्मेलन में न तो कोई आया न कोई उत्तर आया।  कांग्रेस से विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी को सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया था लेकिन धनानी लोकल चुनाव में व्यस्तता के कारण नहीं आये। और न ही कोई कांग्रेस प्रतिनिधि आया। कांग्रेस कोई भी बहाना बनाए लेकिन जानकार बताते हैं कि कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व और मुस्लिमों से दूरी बनाए रखने की नीति के तहत सम्मेलन में शामिल नहीं हुई है। भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो और राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक विधायक हैं इनमें से भी कोई नहीं आया।

केवल दलित नेता तथा वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी उपस्थित रहे। मेवानी ने अपने संबोधन में कहा कि ” 2 जुलाई से विधान सभा चल रही है अभी तक मुझे बोलने का मौका नहीं मिला है जबकि विपक्ष अपने समय में से मुझे समय देना चाहता था लेकिन अध्यक्ष महोदय ने स्वीकार नहीं किया। सदन में बोलने का मौका न मिलने पर बजट के बाद मैंने मीडिया के सामने अल्पसंखयकों को बजट में फूटी कौड़ी न देने का मुद्दा उठाया था मैं बीजेपी के नारे ‘सबका साथ…..’ पर चौकड़ी (X)  मारता हूं इस नारे का अर्थ “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास माईनस दलित, आदिवासी और मुस्लिम है।”

जिस प्रकार से मुसलमानों को धर्म के नाम पर मारा पीटा जा रहा है उन पर अत्याचार किया जा रहा है। उससे इस चीज की जरूरत बढ़ गयी है कि Atrocity act में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए या एक स्वतन्त्र कानून बनाया जाए तब हम समझेंगे कि (मोदी) सबका विश्वास जीतना चाहते हैं।” मेवानी ने आगे कहा, ” मेरा पहले से मानना है सदन में मुद्दे उठाने से अख़बार की सुर्खी तो बनती है लेकिन परिणाम नहीं आता है। सदन के साथ सड़क पर लड़ाई जरूरी है। सदन में अध्यक्ष महोदय बोलने से रोक सकते हैं सड़क तो अपने बाप की है। वहां पहले से बोलते आए हैं और बोलते रहेंगे।”

एडवोकेट ओवेश मलिक ने अपने संबोधन में कहा, “1947 में संघ की सत्ता में हिस्सेदारी थी श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंत्री थे। 2014 में संघ को पूरी सत्ता मिली हुई है अब देश केवल संघ के अनुसार चल रहा है। विपक्ष को गिनती से दूर करने की कोशिश हो रही है। सेकुलरिज्म मुस्लिम शासकों से सीखना चाहिए उनके शासन काल में मॉब लिनचिंग की कोई घटना नहीं हुई। संघ के शासन में दलित और मुस्लिमों की आए दिन भीड़ द्वारा हत्याएं हो रही हैं। अकबर ने दीन ए इलाही के माध्यम से सर्व धर्म समभाव कायम किया था जो बहादुर शाह ज़फ़र तक चला। अब अल्पसंख्यक समुदाय को अपने अधिकार से ही वंचित किया जा रहा है।”

एमसीसी संयोजक मुजाहिद नफीस ने अपने संबोधन में सूरत में ईसाई समुदाय को दफ़्न करने से रोकने वाली घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिमों के अलावा ईसाई समुदाय के साथ भी ऐसा ही हो रहा है।

जन संघर्ष मंच के शमशाद पठान ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा मुसलमानों की बेहतरी की स्कीम की बात छोड़ो यहां हिन्दू विस्तार में कारोबार करने से भी रोकने का प्रयत्न होता है। ” पठान ने दो सप्ताह पहले नारण पुरा में मुस्लिम ऑटो चालक को हिन्दू मोहल्ले से चले जाने तथा धंधा न करने को कहा गया था जिसके बाद पुलिस ने मुक़दमा भी दर्ज किया था। पठान ने आगे कहा, ” मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक समुदाय (जैन समुदाय) से आते हैं फिर भी राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण के नाम पर कोई योजना नहीं है। अब समय आ गया है मुस्लिम अपने अधिकार की बात खुलकर मुस्लिम के नाम पर करें। “

मुजाहिद नफीस ने विधायक जिगनेश  मेवानी को आवेदन दिया और माँग की कि वह सरकार तक उनकी बात पहुचाएं।

आवेदन तथा सम्मेलन की मुख्य मांग थी कि राज्य में सरकार अल्प संख्यक मंत्रालय और आयोग की स्थापना की जाए। राज्य सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बजट दे। इस सम्मेलन में राज्य भर से लगभग 400-500 लोग एकत्र हुए थे।

जिस समय यह सम्मेलन चल रहा था कुछ फासले पर विधान सभा है। वहां पर भाजपा प्रदेश प्रमुख की उपस्थिति में कांग्रेस के पूर्व विधायक अलपेश ठाकोर भाजपा का भगवा धारण कर रहे थे। उन्हें मंत्री भी बनाया जायेगा। ठाकोर ने मीडिया को बताया कि वह प्रधान मंत्री के नेतृत्व से प्रभावित हैं तथा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। 2017 विधान सभा चुनाव से पहले ठाकोर, मेवानी और हार्दिक की तिकड़ी थी जो भाजपा के खिलाफ राज्य में जबरदस्त वातावरण खड़ा किये हुए थी। अब यह तिकड़ी टूट चुकी है जिगनेश मेवानी ने ठाकोर को सलाह दी है, “कमल कीचड़ में खिलता है कोशिश करें कि कम से कम कीचड़ लगे खुद आकलन भी करें। जब कांग्रेस में शामिल हुए थे तो राहुल गांधी उपस्थित थे आज भाजपा में शामिल होते हुए जीतू वाघानी उपस्थित थे। ऐसे दिन आ गए।”

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 20, 2019 8:21 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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