Subscribe for notification
Categories: राज्य

कॉरपोरेट लड़ाई का अखाड़ा बनेगा बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार में कॉरपोरेट पूंजीपतियों ने चुनावी खेल खेलना शुरू कर दिया है। वैसे लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में कॉपोरेट की रुचि कोई नई बात नहीं है लेकिन देश में जबसे वैश्वीकरण और उदारीकरण का दौर प्रारंभ हुआ है तबसे पूंजीपति खुलकर खेलने लगे हैं। चूंकि बिहार कई मामलों में महत्वपूर्ण है इसलिए इन दिनों इसे कंट्रोल करने में कई ताकतें सक्रिय हो गयी हैं।
याद होगा 2019 के संसदीय आम चुनाव से पहले बेगुसराय जिले के सिमरिया में कुंभ के नाम एक बहुत बड़ा धार्मिक इवेंट किया गया था। उस इवेंट में मुंबई और कोलकाता की कई बड़ी कंपनियों ने पैसा लगाया था। यह अनायास नहीं हुआ था। फिलहाल बिहार में प्रशांत किशोर का एक इवेंट चल रहा है। प्रशांत के चेहरे में कुछ लोगों को बिहार का भविष्य नजर आ रहा होगा लेकिन उनके काम करने का ढंग, कॉरपोरेट पूंजीवाद का बहुत ही बढ़िया उदाहरण है। इस प्रकार के इवेंटों के पीछे बहुत बड़ी लॉबी काम कर रही होती है। तभी ये आसानी से अपने प्रबंधन में सफल हो पाते हैं। इसे साधारण तरीके से नहीं समझा जा सकता है। इसकी गहराई को जानना जरूरी है।
यह वर्ष बिहार के विधानसभा चुनाव का है। भारतीय लोकतंत्र की एक खासियत यह भी है कि यहां राजनीतिक दलों के साथ ही साथ कॉरपोरेट लॉबी भी चुनाव लड़ती है। इनके अपने इंट्रेस्ट होते हैं। झारखंड में संपन्न विधानसभा चुनाव में यह साफ-साफ दिखा। झारखंड के कॉरपोरेट व्यापारी और भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट की लॉबी ने बड़ी चालाकी से सरयू राय जैसे नेता को भाजपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि वे चुनाव जीत गए लेकिन पार्टी में रहते वे कॉरपोरेट व भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट लॉबी पर दबाव बनाया करते थे, वह खत्म हो गया है। इस प्रकार के नेताओं को चुन-चुन कर मुख्यधारा की राजनीति से बाहर करना भी कॉरपोरेट पूंजीवाद की रणनीति का हिस्सा रहा है। बिहार के इस चुनावी वर्ष में भी कई चित-पट चाले चली जा रही है लेकिन यहां सबसे खास इवेंट प्रबंधकों के माध्यम से बिहार में कॉरपोरेट कंपनियों का बड़े पैमाने पर निवेश है।
इन तामाम चीजों को समझने के लिए पहले बिहार के भौगोलिक स्थिति को समझना होगा। मसलन जिस प्रकार पस्तून को उत्तर-पूर्वी एशिया का दरवाजा माना जाता है, उसी प्रकार बिहार दक्षिण-पूर्वी एशिया का दरवाजा है। इन दिनों पश्चिम और चीनी कॉरपोरेट दक्षिण पूर्वी एशिया में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। भारत के कॉरपोरेट की भी इस खेल में रुचि है। पूर्वोत्तर के राज्यों का ऑप्रेशन सफल तभी होगा जब बिहार में इस लॉबी की पकड़ मजबूत होगी। बिहार में पकड़ मजबूत करने के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक पकड़ बेहद जरूरी है। लोगों को कंट्रोल करने के लिए जाति और धर्म भी बड़ा महत्वपूर्ण है। इसलिए बिहार में ये तमाम औजार और हथकंडे आजमाए जा रहे हैं। इसके लिए कॉरपोरेट के खास हिट मैन बिहार में विगत दो वर्षों से सक्रिय हैं। भाजपा में इस प्रकार के कई इवेंट प्रबंधक पहले से सक्रिय हैं।
इसका जीता जागता एक और उदाहरण अभी हाल ही में देखने को मिला। लंदन में रहने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी नामक एक लड़की ने बिहर के कई अखबारों में दो-दो पेज का विज्ञापन दिया। उस विज्ञापन में उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया गया है। जानकारी एकत्रित करने पर पता चला कि पुष्पम प्रिया, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड के एक बड़े नेता की बेटी हैं। पुष्पम एक एनजीओ भी चलाती हैं। उसी के माध्यम से यह विज्ञापन दिया गया है। विज्ञापन पर खर्च किए गए पैसे और सोशल मीडिया पर पेड लाइक-शेयर यह साबित करने के लिए काफी है कि बिहार कॉरपोरेट पूंजीवादियों के लिए बेहद टफ है और उसे वे कई माध्यमों से साधने में लगे हैं।
इन दिनों देश में और खासकर बिहार में बड़े पैमाने पर राजनीतिक-सामाजिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के द्वारा लगातार लिए जा रहे निर्णयों ने अल्पसंख्यकों के मन में एक डर बैठ गया है कि उन्हें इस देश से खदेड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। इस डर को राजनीतिक दलों ने अवसर के रूप में हाथों-हाथ लिया है। जिस प्रकार भाजपा हिन्दू ध्रुवीकरण को लेकर सक्रिय है उसी प्रकार अन्य दल भाजपा के खिलाफ एक नए प्रकार के ध्रुवीकरण में लग गए हैं। साम्यवादी नेता डॉ. कन्हैया कुमार को इसका फायदा बिहार में मिलने लगा है। याद रहे बिहार में अभी भी साम्यवादी दलों का ताना-बाना बहुत कमजोर नहीं हुआ है। कन्हैया मुस्लिम और दलित वोटरों को एक मंच पर लाने में सफल हुए हैं। इनके साथ कुछ पिछड़ी जाति के लोग भी संगठित हो रहे हैं। विगत दिनों बिहार के कई जिलों में कन्हैया की जो रैली हुई उसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे। यही नहीं 27 फरवरी की पटना रैली में भी बड़ी संख्या में लोग आए थे।
बिहार की सामाजिक संरचना अन्य प्रांतों से भिन्न हैं। यहां बड़ी संख्या में दलित, मुसलमान और पिछड़ी जाति के लोग बसे हैं। उच्च वर्ग में भी बड़े पैमाने पर समाजवादी सोच के लोग हैं। यही कारण रहा है कि स्वतंत्रता के आन्दोलन से लेकर जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति यहीं से प्रारंभ हुई।कन्हैया की मेहनत रंग लाने लगी है। बिहार के अधिकतर लोग यह सोचने के लिए बाध्य हो रहे हैं कि बिहार में जो राजनीति की सड़ांध नजर आ रही है उसका एक मात्र विकल्प कन्हैया कुमार ही हो सकता है। कन्हैया और कन्हैया के साथ लामबंद हो रहे लोगों को रोकने के लिए बिहार में कॉरपोरेट की सक्रियता स्वाभाविक है।
बिहार के लोग यह सोचने के लिए बाध्य हो रहे हैं कि कन्हैया को माले नेता चन्द्रशेखर की तरह नहीं खोएंगे। कन्हैया के उभार ने भी कॉरपोरेट पूंजीवादियों को परेशान किया है। अगर कन्हैया के साथ बिहार की जनता लामबंद हो गई, जिसकी थोड़ी संभावना दिख रही है तो फिर पूर्वोत्तर एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया की स्थिति बदल जाएगी। इसलिए बिहार का यह चुनावी दंगल रोमांचक हो गया है। इसलिए भी इस लॉबी के लोग बिहार में बुरी तहर सक्रिय हैं और पैसे के बल बिहार को जीतने की कोशिश में लगे हैं। 

This post was last modified on March 11, 2020 11:33 am

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share

Recent Posts

कल हरियाणा के किसान करेंगे चक्का जाम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलों के विरोध में हरियाणा और पंजाब के…

5 hours ago

प्रधानमंत्री बताएं लोकसभा में पारित किस बिल में किसानों को एमएसपी पर खरीद की गारंटी दी गई है?

नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के सदस्य एवं पूर्व…

6 hours ago

पाटलिपुत्र का रण: जनता के मूड को भांप पाना मुश्किल

प्रगति के भ्रम और विकास के सच में झूलता बिहार 2020 के अंतिम दौर में एक बार फिर…

7 hours ago

जनता के ‘मन की बात’ से घबराये मोदी की सोशल मीडिया को उससे दूर करने की क़वायद

करीब दस दिन पहले पत्रकार मित्र आरज़ू आलम से फोन पर बात हुई। पहले कोविड-19…

9 hours ago

फिल्म-आलोचक मैथिली राव का कंगना को पत्र, कहा- ‘एनटायर इंडियन सिनेमा’ न सही हिंदी सिनेमा के इतिहास का थोड़ा ज्ञान ज़रूर रखो

(जानी-मानी फिल्म-आलोचक और लेखिका Maithili Rao के कंगना रनौत को अग्रेज़ी में लिखे पत्र (उनके…

11 hours ago

पुस्तक समीक्षा: झूठ की ज़ुबान पर बैठे दमनकारी तंत्र की अंतर्कथा

“मैं यहां महज़ कहानी पढ़ने नहीं आया था। इस शहर ने एक बेहतरीन कलाकार और…

12 hours ago