Wednesday, January 26, 2022

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जनचौक संवाददाता को तड़ीपार के नोटिस की देश भर में आलोचना, कलीम ने पुलिस से कहा- नोटिस कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह

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अहमदाबाद। 30 जुलाई को जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी अहमदाबाद शहर के ए डिविजन (एसीपी कार्यालय) में उपास्थि हो कर तड़ीपार मामले में अपना पक्ष रखा। उन्होंने एसीपी पटेल को बताया “मेरे खिलाफ जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वह दो एफआईआर के आधार पर है। एक रामोल पुलिस ने एंटी लिकर मूवमेंट के समय 2018 में दर्ज की थी। इसमें मुझे मेट्रो कोर्ट ने 24-1-2020 को निर्दोष छोड़ दिया है। दूसरी FIR रखियाल पुलिस स्टेशन की है। जो 19-12-2019 को 500 लोगों के खिलाफ नागरिकता कानून के मुद्दे पर बंद में शामिल होने के लिए 143,188 की धारा में दर्ज हुआ है। इसमें अभी चार्शीट भी नहीं दाखिल हुई है। मेरे ऊपर केवल एक FIR पेंडिंग है। वह भी मामूली धारा में, इसलिए मैं मानता हूं यह नोटिस राजनीति से प्रेरित है।”

उन्होंने एसीपी से कहा कि सरकार ने एंटी सीएए आंदोलन और भाजपा की जनता विरोधी नीतियों को पत्रकारिता के माध्यम से उजागर करने के लिए यह नोटिस जारी किया है। मुझ पर जो अन्य दस आरोप हैं, उसमें न तो कोई शिकायत दर्ज है न ही कोई ठोस सुबूत। इन आरोपों से मुझसे अधिक पुलिस और कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है।

कलीम सिद्दीकी को जारी नोटिस की खबर आते ही देश भर में सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ट्विटर पर जाने माने पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, विधायक सभी अपनी राय रख रहे हैं। DYFI की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने #standwithkaleem की मुहिम भी शुरू की है।

गुजरात की दसाड़ा सीट से विधायक नौशाद सोलंकी ने सरकार के इस कदम की निंदा करते हुआ अपने हैंडल से लिखा, “जनचौक के जाने माने संवाददाता, पत्रकार @Kaleem_Siddiqi1 जो अपनी कलम की ताकत से सत्ता के गलियारों में शोर मचाते हैं उनको @AhmedabadPolice ने तड़ीपार का नोटिस दिया है। विरोध की सभी आवाज को कुचल दिया जाएगा? गुजरात के नामी पत्रकार क्या करेंगे??”

वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर से बात कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही ट्वीट में लिखा है, “This is targetted harassment of a fantastic, grassroots level activist and journalist by @GujaratPolice

They want to shut down voices of dissent and ground-level workers like Kaleem and still call it a democracy?!
Very shameful!”

DYFI की सचिव प्रीति शेखर ने लिखा,
“Kaleem Siddiqui, friend and human rights activist gets “tadipar”. This is in response to the anti-CAA agitation he was leading in Ajit Mill compound in Ahmedabad. Many intellectuals and activists across had been to the Ajit Mill “Shaheen Bagh”. (1/n)”

इन सबके अलावा DYFI CEC ने #standwithkaleem का हैश टैग चलाया। सुचित्रा विजयन, आरिफ शाह, अफरीन फातिमा समेत सैंकड़ों एक्विस्ट ने ट्विटर के माध्यम से सवाल उठाए हैं।

व्हाट्सऐप और फेसबुक पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। आंदोलनों से जुड़े छात्र और प्रोफेसरों भी इस मामले में नाराजगी है। अहमदाबाद की सिविल सोसएटी और दीगर सामाजिक कार्यकर्ता भी संघर्ष के लिए तैयार हैं। जमीयत उलेमा हिंद गुजरात यूनिट ने भी तड़ीपार के नोटिस की आलोचना की है। साथ ही संगठन के स्तर पर एकजुट होने का आश्वासन दिया है।

जमाते इस्लामी हिंद के अलावा आल इंडिया मजलिसे माशावरत के इकराम मिर्ज़ा ने भी अपनी तंजीम की जानिब से हर मदद का आश्वासन दिया। अनहद के देव देसाई ने भी फैसले की आलोचना करते हुए संघर्ष का एलान किया है।

गुजरात हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील आनंद याग्निक कलीम सिद्दीकी के तड़ीपार के शो काज़ नोटिस पर कानूनी मामले देख रहे हैं। नोटिस को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की गई है।

आप को बता दें कि जनचौक के गुजरात संवाददाता कलीम सिद्दीकी ने नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में अहमदाबाद के अजीत मिल में शाहीन बाग जैसा ही आंदोलन का आयोजन किया था। इसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।

इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए देश भर से आंदोलनकारी पहुंचे थे। इस आंदोलन के बाद गुजरात में जगह जगह शाहीन बाग बन गए थे। 14 जनवरी से 14 मार्च 2020 तक चले आंदोलन को कोरोना आपदा के कारण बंद करना पड़ा था।

सरकार पूरे देश में नागरिकता संसोधन बिल का विरोध करने वाले आंदोलनकारियों को प्रताड़ित कर रही है। इसी कड़ी में अहमदाबाद के एंटी सीएए आंदोलन के अगुआ रहे कलीम सिद्दीकी को तड़ीपार का शो काज़ नोटिस जारी किया गया है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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