Friday, December 3, 2021

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जेलों को अपराध का केंद्र नहीं बनने देने का दावा करने वाले सीएम के राज में चित्रकूट जेल में खूनी खेल, तीन की मौत

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केंद्र की सरकार हो या यूपी की सरकार हो उसकी कथनी करनी में बड़ा फर्क है। अच्छे दिन की बात तो दूर केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था और लोगों के जानमाल का कबाड़ा करके रख दिया। इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसम्बर 2019 में अंबेडकर नगर में प्रदेश की 72वीं जेल का लोकार्पण करते हुए दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के जेलों को अपराध का केंद्र नहीं बनने देंगे। इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। कानून सख्त होगा तभी अपराधियों में भय पैदा होगा। आज शुक्रवार 14मई, 21 को इसे झुठलाते हुए उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में शुक्रवार को कैदियों के बीच खूनी टकराव हो गया। इसमें वेस्ट उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे मेराज और बदमाश मुकीम काला की गोली मारकर हत्या कर दी। मेराज बनारस जेल से भेजा गया था, जबकि मुकीम काला सहारनपुर जेल से लाया गया था। पुलिस ने अंशु दीक्षित को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह लगातार फायरिंग करता रहा। गोली मारने वाला गैंगस्टर अंशुल दीक्षित भी पुलिस कार्रवाई में मारा गया। अंशु भी मुख्तार अंसारी का पुराना शूटर बताया जा रहा है।

चित्रकूट जेल में अपराधी मेराजुद्दीन और मुकीम उर्फ काला की गोली मारकर हत्‍या किए जाने के बाद यूपी की जेलों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके पहले जुलाई 2018 में यूपी की बागपत जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। करीब तीन साल बाद चित्रकूट जेल से इससे बड़ी वारदात की खबर आई तो लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जेल के अंदर इस शूट आउट से जेलों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।दरअसल जब तक जेल अधिकारी और जेलकर्मी मिले न हों तब तक जेल में बहार से तिनका तक नहीं पहुँच सकता।जेल दुधारू गाय है जिसके दूध का रसास्वादन नीचे से उपर तक जेल कर्मचारी/अधिकारी और नौकरशाह करते हैं।आरोप तो यहाँ तक है कि सत्ता तक जेल की मलाई जाती है।

मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट जेल में हुए शूटआउट के मामले में डीजी  जेल से रिपोर्ट मांगी है। योगी ने कहा कि अगले 6 घंटे में कमिश्नर डीके सिंह, डीआईजी के सत्यनारायण और एडीजी जेल संजीव त्रिपाठी मामले की जांच कर पूरी रिपोर्ट दें। जेल में तलाशी कराई जा रही है। जिलाधिकारी और एसपी मौके पर मौजूद हैं।

कुख्यात बदमाश अंशु दीक्षित ने सुबह की परेड के बाद अपने साथ बंद मेराज अहमद और मुकीम काला पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अंशु जेल के भीतर ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगा। अंशु 5 अन्य बंदियों को भी मारने की धमकी दे रहा था। करीब आधे घंटे तक जेल कर्मी खौफ में उसके करीब नहीं गए। बाद में पुलिस आने पर उसकी घेराबंदी करके एनकाउंटर हुआ। ये भी बताया जा रहा है कि अंशु दीक्षित ने मुकीम, मेराज के अलावा तीन अन्य कैदियों पर भी हमला किया था।

सुबह 9:30 बजे जेल के आदर्श कैदी सभी बैरकों में जाकर नाश्ता बांट रहे थे।इसके थोड़ी देर पहले ही कैदियों की गिनती खत्म हुई थी और ज्यादातर कैदी बैरक से बाहर मैदान में थे। इसी दौरान बाल्टी में कच्चा चना और गुड़ लेकर दो कैदी अंशु की बैरक में दाखिल हुए। वह चना देकर जैसे लौटे अंशु ने पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर मेराज और मुकीम की हत्या कर दी। इससे साफ होता है कि नाश्ते के साथ ही पिस्टल भी अंशु तक पहुंचाई गई थी।

विशेष निगरानी रखने की हिदायत के साथ अंशु दीक्षित इसी हफ्ते सुल्तानपुर जेल से चित्रकूट जेल भेजा गया। 20 मार्च को मेराज को जिला जेल बनारस से स्थानांतरित करके चित्रकूट जेल लाया गया।7 मई को मुकीम काला को जिला जेल सहारनपुर से चित्रकूट जेल लाया गया था। तीनों को कड़ी निगरानी में रखने को कहा गया था, क्योंकि ये तीनों बड़े गैंगस्टर और इनामी बदमाश थे।लेकिन जेल प्रशासन ने कैसी निगरानी रखी कि अंशु के पास जेल में हथियार पहुंच गया?तीनों के मारे जाने से घटना के सबूत और षड्यंत्र की हकीकत का भी पटाक्षेप हो गया।

गैंगवार में मारा गया मुकीम काला वेस्ट यूपी का कुख्यात गैंगस्टर था। उस पर एक लाख रुपए का ईनाम भी रखा जा चुका था। सपा सरकार में मुकीम काला का आतंक इतना था कि UP, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान पुलिस को उसकी तलाश में थी। सहारनपुर में तनिष्क शोरूम में इंस्पेक्टर की वर्दी में 10 करोड़ की डकैती डालने वाले मुकीम से पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान एके-47 भी बरामद की थी।मुकीम काला शामली जिले के कैराना थाना क्षेत्र के जहानपुरा गांव का रहने वाला था। उस पर शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर के अलावा दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में 61 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें लूट, रंगदारी, अपहरण, फिरौती के 35 से ज्यादा मुकदमे थे। मुकीम काला के दूसरे भाई वसीम काला को 2017 में एसटीएफ यूनिट ने मेरठ में मुठभेड़ में मारा था।

जेल की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी? अफसर यह बताने को तैयार नहीं हैं। बदमाश अंशु दीक्षित के पास पिस्टल कहां से आई? यह एक बड़ा सवाल है। अंशु दीक्षित यूपी का कुख्यात अपराधी था। बताया जा रहा है कि उसने काला को मारने की सुपारी ली थी। इसे अंजाम देने के लिए उसने सेटिंग से चित्रकूट जेल में अपना ट्रांसफर करवाया था।

सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का मूल निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र के रूप में दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया। 2008 में वह गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया था। अंशु दीक्षित को 2019 में दिसंबर में सुल्तानपुर जेल में वीडियो वायरल होने के बाद चित्रकूट जेल भेजा गया था।अंशु मुख्तार अंसारी का खास व शार्प शूटर था। 27 अक्टूबर 2013 को उसने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश STF पर गोलियां चलाई थीं। दिसंबर 2014 में इसे पकड़ा गया था। चित्रकूट जेल आधुनिक होने के चलते इसे यहां करीब दो साल पहले भेजा गया था। इसे पूर्वांचल के माफियाओं का चहेता भी बताया जाता था।

मेराज वाराणसी का रहने वाला था। पहले मुन्ना बजरंगी का खास था, फिर मुख्तार से जुड़ा। इसकी अंशु दीक्षित से तनातनी रहती थी। बताया जाता है कि कुछ साल पहले उसकी अंशु से तनातनी भी हो गई थी। बनारस में उसे मेराज भाई नाम से जाना जाता था।मेराज अपने गैंग के लिए हथियारों का इंतजाम करता था। वह फर्जी दस्तावेजों पर असलहों का लाइसेंस बनवाने का मास्टरमाइंड था। पिछले साल अक्टूबर में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। छानबीन में फर्जी तरीके से बनवाए गए 9 लाइसेंसी पिस्टल और राइफल की जानकारी मिली थी। इसमें उसने एक नगालैंड से मंगवाई थी।

गौरतलब है कि बागपत की जिला जेल में गत 9 जुलाई 2018 की सुबह पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी।मुन्‍ना बजरंगी भी मुख्‍तार अंसारी का शूटर था। मुन्ना बजरंगी की हत्या करने का आरोप जेल में बंद वेस्ट यूपी के कुख्यात बदमाश सुनील राठी पर लगाया गया। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह ने तभी खेकड़ा थाने पर उसके खिलाफ घटना की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसी दिन मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने भी पुलिस को एक तहरीर दी थी। इसमें उन्होंने पूर्वांचल के कई महत्वपूर्ण लोगों पर साजिश रचकर पति की हत्या कराने का आरोप लगाया था।

दरअसल आए दिन यूपी की जेलों से कुख्यात बंदियों के मुर्गा व शराब पार्टी से लेकर जुए की तस्वीरें सामने आती रही हैं। इससे जेलों की सुरक्षा-व्यवस्था से लेकर जेल के भीतर कुख्यात अपराधियों को मिल रही सुविधाओं पर सवाल खड़े होते रहे हैं पर कोई वारदात होने पर फूं फां होता है फिर ढाक के वही तीन पात। नैनी जेल, रायबरेली जेल, सुल्तानपुर जेल या  उन्नाव जेल  या प्रदेश की कोई जेल हो जेल में हत्या के लिए असलहे और मोबाइल सहित कई आपत्तिजनक वस्तुएं पहुंचने की लगातार ख़बरों के बावजूद  जेल प्रशासन इस पर रोक लगाने में नाकाम साबित रहा है।स्थिति का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है की एक माफिया की पत्नी नैनी जेल में जाकर कई कई दिन गुपचुप ढंग से रहती थीं और उनके कम से कम तीन बच्चे जेल का प्रसाद माने जाते हैं। किसी भी सेन्ट्रल जेल के वर्तमान या रिटायर रहे वरिष्ठ अधीक्षक के यहाँ सीबीआई, ईडी और आयकर का छापा डाला जय तो नोट गिनने की मशीन से कला धन गिनना पड़ेगा। इसमें अपवाद भी कम ही मिलेंगे। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।) 

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