Tuesday, December 7, 2021

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प्रयागराज: दुष्कर्म केस में पुलिस ने गवाह को ही फर्जी तरीके से भेज दिया जेल ,पीड़िता के भाई पर रेप का मामला ठोका

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देश के गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान योगी राज में कानून व्यवस्था की विरदावली गाते हुए दम्भ से कहा था कि प्रदेश में दूरबीन लेकर देखने से भी कोई माफिया या बाहुबली नजर नहीं आता लेकिन वे भूल गये कि यूपी में सबसे बड़ी माफिया या बाहुबली खाकी वर्दी हो गयी है, जिसे धन उगाही से लेकर काला सफेद करने में किसी का भय नहीं है। दुष्कर्म के एक मामले को दबाने में एक नहीं तीन इंस्पेक्टर की संलिप्तता से दुष्कर्म मामले के गवाह को प्रयागराज की पुलिस ने फर्जी तरीके से कूट रचना करके नैनी जेल भेज दिया।

मामला खुल जाने के कारण जनपदीय सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश सिंह यादव व नारकोटिक्स प्रभारी एसआई महावीर सिंह को हटा दिया गया है। तीनों को उनके वर्तमान तैनाती स्थल से हटाकर जोनल दंगा नियंत्रण इकाई से संबद्ध कर दिया गया। मामले का संज्ञान लेते हुए एडीजी जोन प्रेमप्रकाश ने यह कार्रवाई की है।

दरअसल सीएमपी डिग्री कॉलेज के एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर रेप का मुकदमा दर्ज कराने वाली युवती अब मुकदमों की मार झेल रही है। मारपीट समेत कई मुकदमा दर्ज हो चुका है। इससे आगे रेप केस के गवाह को दुष्कर्म के एक फर्जी मुकदमे में आरोपी बनाकर उसे जेल भेज दिया गया। जब जांच सीओ ने की तो राज खुला। फिलहाल सीओ सिविल लाइंस की रिपोर्ट पर सीआरपीसी 169 के तहत रिपोर्ट भेजकर जेल से रिहा भी करा दिया गया।

गाजीपुर की युवती की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवक से दोस्ती थी। युवती के ब्वाय फ्रेंड की सीएमपी डिग्री कॉलेज में नौकरी लग गई। युवती शादी करना चाहती थी, लेकिन युवक ने जॉब लगते ही दूरी बना ली। युवती ने शादी का झांसा देकर रेप करने का कर्नलगंज थाने में 2019 में मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया। वह जमानत पर रिहा हुआ। इसके बाद उसने रेप पीड़िता को परेशान करना शुरू किया। आरोप है कि उसे जार्जटाउन क्षेत्र में पीटा। नाले में धकेल दिया और रेप पीड़िता पर उल्टा केस दर्ज करा दिया। इसके बाद केस की पैरवी करने वाले पीड़िता के साथी ज्ञानचंद्र को टॉरगेट किया गया।

12 अप्रैल, 2021 को ज्ञानचंद्र समेत अन्य के खिलाफ एक महिला ने फूलपुर थाने में रेप की एफआईआर दर्ज करा दी। पीड़िता ने अपने बयान में कई और नाम प्रकाश में लाए। इस केस की विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर ने क्राइम ब्रांच की मदद से कार्रवाई की। ज्ञानचंद्र को रेप केस में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उधर, असिस्टेंट प्रोफेसर पर रेप का केस दर्ज कराने वाली युवती ने पुलिस अफसरों से मदद की गुहार लगाई तो इस केस की जांच सीओ को दे दी गई। सीओ संतोष सिंह ने जांच की। साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि ज्ञानचंद्र को फर्जी फंसाया गया। उन्होंने कोर्ट में 169 की रिपोर्ट प्रस्तुत करके ज्ञानंचद्र को जेल से रिहा कराया। पुलिस अफसर इस पूरे प्रकरण की जांच करा रहे हैं।

एडीजी प्रयागराज जोन प्रेमप्रकाश का कहना है कि सीएम का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हाल में दागी छवि वाले पुलिसकर्मियों को फील्ड में तैनाती न दी जाए। उन्होंने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस संबंध में निर्देश दिया था। गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के आरोप बेहद गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया भूमिका संदिग्ध होने पर तीनों पुलिसकर्मियों को जोनल दंगा नियंत्रण इकाई में संबद्ध किया गया है। मामले की जांच एडिशनल एसपी से कराई जा रही है। डीआईजी को निर्देशित किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

आरोप है कि सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव ने अपने पद का फायदा उठाते हुए इस मामले में खेल किया। उसने हंडिया इंस्पेक्टर और नारकोटिक्स प्रभारी को भी शामिल कर लिया। इसके बाद खुद गवाह की लोकेशन सर्विलांस के जरिए निकालकर उसे शहर से पकड़वाया और फिर हंडिया इंस्पेक्टर को सौंप दिया। जिसके बाद हंडिया थाने में दाखिला कराकर उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में एक और खेल किया गया।

गवाह को जिस स्कूटी के साथ पकड़ा गया, उसकी नंबर प्लेट भी बदल दी गई। गवाह को शहरी क्षेत्र से पकड़ा गया, जिसके कब्जे से स्कूटी भी मिली। इस स्कूटी को पहले कर्नलगंज थाने ले जाया गया। वहां से इसे हंडिया थाने भेजा गया और बीच रास्ते में ही स्कूटी की ओरिजिनल नंबर प्लेट बदलकर इस पर ट्रक की नंबरप्लेट लगा दी गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गवाह को जालसाजी का भी आरोपी बनाया जा सके।

दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के आरोपी पुलिसकर्मियों ने एक और खेल किया था। उन्होंने गवाह को तो जेल भेजा ही था, दुष्कर्म पीड़िता के भाई को भी फर्जी मुकदमे में फंसाया था। उसके खिलाफ फूलपुर थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। हालांकि विवेचना के दौरान मामला झूठा पाया गया था। मामले में चल रही जांच में अब इस बिंदु को भी शामिल कर लिया गया है।

मामले का खुलासा दो दिन पहले होने के बाद हड़कंप मच गया था। जिसमें अगले दिन सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर हंडिया बृजेश सिंह और नारकोटिक्स प्रभारी महाबीर सिंह को उनके वर्तमान तैनाती स्थल से हटा दिया गया था। साथ ही उन्हें जोनल दंगा नियंत्रण इकाई से अटैच कर दिया गया। बुधवार को इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह बात सामने आई है कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म पीड़िता पर दबाव बनाने के लिए सिर्फ गवाह को ही जेल नहीं भेजा। बल्कि उसके भाई को भी फर्जी मुकदमे में फंसवा दिया।

यह मुकदमा इसी साल फूलपुर थाने में लिखा गया था। इसमें पीड़िता के भाई के साथ ही उस गवाह को भी नामजद कराया गया था जिसे बाद में हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे में फर्जी तरीके से जेल भेजा गया। हालांकि इस मामले में उनका खेल मुकदमा दर्ज कराने तक ही सीमित रहा। विवेचना के दौरान मामला झूठा मिलने पर फूलपुर पुलिस ने इसमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इससे साफ है कि न सिर्फ दुष्कर्म पीड़िता के गवाह बल्कि उसके परिजनों को भी फंसाने की कोशिश की गई। इस पूरी कवायद का नतीजा उसे दबाव में लेकर मुकदमे में सुलह के लिए मजबूर करना था।

दुष्कर्म के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मी भी जांच अफसर के रडार पर हैं। दरअसल खेल में शामिल इंस्पेक्टरों व दरोगा के कहने पर एसओजी टीम के चार सिपाहियों ने गवाह को फर्जी तरीकेसे पकड़कर हंडिया थाने पहुंचाया था। जहां से उसे जेल भेजा गया।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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