कोसी क्षेत्र बन रहा है जन-समस्याओं के विरोध में आंदोलन की प्रयोगशाला

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जब कोसी क्षेत्र के दो नामचीन नेता मनोज झा और आनंद मोहन “ठाकुर का कुआं” कविता पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग रहे थे उसी वक्त कोसी क्षेत्र स्थित सुपौल के गांधी मैदान में 2 अक्टूबर 2023 के दिन 20 हजार की भीड़ कोसी क्षेत्र की पांच जन समस्याओं के मुद्दे पर इकट्ठा हुई थी।

इस भीड़ को महापंचायत नाम दिया गया था। यह महापंचायत बेरोजगारी, नशा, जमीन समस्या, स्वास्थ्य और बाढ़ आपदा को मिटाने के नाम पर किया गया था। इस पूरे महापंचायत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, दिल्ली के प्रसिद्ध संस्था युवा हल्ला बोल के संस्थापक अनुपम। लालू प्रसाद यादव की रैली के बाद पहली बार ऐसी भीड़ देखी गई।

सुपौल के निवासी अनिल मिश्रा बताते हैं कि, “सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जिला कभी जन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और समस्या के निवारण के लिए खड़ा ही नहीं हुआ है। सुपौल लोकसभा की बात की जाए तो यहां की पूरी राजनीति धानुक जाति बनाम यादव जाति की हो जाती है। यहां किसी को मतलब नहीं है, हमारी समस्या से। पूरे बिहार की तरह ही यहां वोट देने से पहले कैंडिडेट की जात देखी जाती है। पहली बार गांधी मैदान में इस तरह की रैली देखी गई है।”

सुपौल के ही रहने वाले प्रोफेसर मिथिलेश कुमार बताते हैं कि, “90 के दशक में लालू प्रसाद यादव की एक रैली सुपौल में हुई थी। उस वक्त भी बिहार एक अलग ही आंदोलन के दौर में था। वही भीड़ फिर से दिखा अक्टूबर 2023 में। बारिश होने के बावजूद भी लोग खड़ा होकर भाषण सुन रहे थे। सबसे बड़ी बात थी कि भाषण देने वाला व्यक्ति जात की नहीं बल्कि मुद्दों की राजनीति कर रहा था।”

“सुपौल लोकसभा मुख्य रूप से यादव,मुस्लिम और धानुक जाति की बहुलता वाला लोकसभा क्षेत्र है। यहां जाति के आधार पर ही पार्टी भी टिकट देती हैं। पटना या किसी बड़े शहर की तरह यहां पर कभी जनता की बड़ी रैली नहीं हुई है। पहली बार बुजुर्ग तो छोड़िए युवा भी इस बात से खुश हैं कि बात मुद्दों की हो रही है।” सुपौल स्थित बीएसएस कॉलेज के छात्र रोहित कुमार बताते है।

रैली के बाद लोकल नेता की गतिविधियां बढ़ गई हैं। स्थानीय पत्रकार विमलेंदु बताते हैं कि, “सितंबर 2023 के बाद रैली की भीड़ को देखकर सभी पार्टी के लोकल नेता पूर्ण रूप से एक्टिव हो चुके है। पार्टी और क्षेत्र के बड़े से बड़े नेता और जाति के नाम पर जीतने वाले नेता भी मुद्दा की बात करने लगे हैं। सत्ताधारी पार्टी के नेता सुपौल में ही सरकार के खिलाफ गैर राजनीतिक आंदोलन कर रहे है। चुनाव का नतीजा जो भी हो लेकिन चुनाव की गतिविधियां अनुपम कुमार ने बदल दी है।”

अनुपम कुमार के साथ प्रशांत भूषण भी इस महापंचायत में शामिल हुए थे। वो ट्विटर पर लिखते हैं कि लाखों लोगों से जनसंपर्क और संवाद के जरिए हमें पता चला कि पाँच ऐसे मुद्दे हैं जो अभिशाप का रूप ले चुके हैं। इसी पंच-अभिशाप को मिटाने के लिए कोसी क्षेत्र से जनांदोलन शुरू हो रहा है। कोसी का क्षेत्र पहले तो प्रदेशव्यापी और फिर देशव्यापी आंदोलन का केंद्र बन सकता है। खुशी इस बात की है कि अब जाति की नहीं मुद्दों की राजनीति होगी।

अनुपम कुमार कहते हैं कि “कोसी की धरती महापुरुषों की धरती रही है। लेकिन आज नशे के बढ़ते प्रभाव से अपराध बढ़ रहा है, भीषण बेरोजगारी और बाढ़ समस्या और जमीन की समस्या इसे खोखला कर रही है। पूरा कोसी क्षेत्र मजदूर सप्लाई का केंद्र बन चुका है। महापंचायत से पहले इन सारे मुद्दों को लेकर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया है हमने। तब हमें पता चला कि पिछड़ापन और पलायन की मार झेल रहा हमारा कोसी क्षेत्र खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। लेकिन अब यहां के लोग लड़ने को तैयार हो रहे हैं ‘पंच-अभिशाप’ के खिलाफ। हमारी यह लड़ाई जारी रहेगी। इस महापंचायत का इतना असर तो हुआ है कि बड़े से बड़े नेता जाति की नहीं मुद्दों की राजनीति करने को मजबूर हो रहे है।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं कि “कोसी के छोटे छोटे बच्चे और युवा नौजवान नशाखोरी के शिकार हो गए हैं। कोसी क्षेत्र की पहचान आज लेबर सप्लायर जोन के रूप में हो गयी है। शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति ऐसी है कि कोई भी अपने बच्चे को बिहार में रहने देना नहीं चाहता। ऐसे में पांचों अभिशापों से मुक्ति के बाद ही नया कोसी का निर्माण संभव है।”

(बिहार से राहुल कुमार की रिपोर्ट।)

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