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भागलपुर: प्राध्यापकों के साथ मारपीट का विवाद पहुंचा थाने

भागलपुर। भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लोकतंत्र के लिए लड़ने के तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी दावों के बीच तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजद स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के दो प्रगतिशील- लोकतंत्र पसंद शिक्षकों के खिलाफ संघी ब्रिगेड के तर्ज पर ही काम कर रहा है। बिहार विधानसभा में हुई घटना के खिलाफ 26 मार्च को बिहार बंद के आह्वान को लागू करते हुए छात्र राजद न्याय विरोधी अलोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवहार का काला अध्याय रच रहा है।

स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में हुई घटना और छात्र राजद के आगे के रवैये ने हिंदी पट्टी के प्रगतिशील बौद्धिक-अकादमिक समुदाय को झकझोरा है। छात्र राजद के रवैये और राजद के राज्य नेतृत्व की चुप्पी से राजद के भाजपा-आरएसएस से लड़ने के दावों के प्रति निराशा का भाव प्रगतिशील समुदाय के बीच बढ़ा है।

एक अप्रैल को भागलपुर में भी स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के दर्जनों छात्र-छात्राओं ने कुलपति, प्रति कुलपति, डीएसडब्लू, प्रॉक्टर और विश्वविद्यालय थाना को ज्ञापन सौंपा। दूसरी तरफ, शहर के समाजकर्मियों-बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधि मंडल भी एसएसपी कार्यालय पहुंचा और ज्ञापन सौंपा।

26 मार्च को राजद और अंग क्रांति सेना नामक संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के एक शिक्षक को थप्पड़ मारने और फिर विभागाध्यक्ष व पीड़ित शिक्षक पर दलित उत्पीड़न एक्ट के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग समाजकर्मियों-बुद्धिजीवियों ने किया। प्रतिनिधिमंडल में लोकचेतना के रामशरण, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता, संजय कुमार, बाकिर हुसैन, गांधी आश्रम के डॉ मनोज मीता, सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के अर्जुन शर्मा, रामानंद पासवान, अधिवक्ता सहेंद्र प्रसाद साहू, गंगा मुक्ति आंदोलन के गौतम मल्लाह थे।

वहीं हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने दर्जनों की संख्या में मार्च करते हुए कुलपति समेत विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि

1. स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के शिक्षक के साथ हिंसक कार्रवाई के नामजद अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी हो।

2. विभागाध्यक्ष डॉ.योगेन्द्र और असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्यानंद पर दर्ज कराये गये झूठे मुकदमे को निरस्त किया जाए।

3. झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई हो।

4. विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों पर बनी जांच कमिटियों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो।

5. दिनकर परिसर सहित विश्वविद्यालय के सभी संकाय और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेतृत्व से दोषी छात्र कार्यकर्ताओं को तुरंत पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है।

स्नाकोत्तर हिंदी विभाग के दर्जनों छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने कुलपति सहित अन्य अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में घटनाक्रम को विस्तार से बताया है।

छात्र-छात्राओं ने लिखा है कि दिनांक 26/03/2021 को तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में एम.ए. सेमेस्टर दो की कक्षा ले रहे प्रोफेसर दिव्यानंद सर के साथ छात्र राजद कार्यकर्ताओं द्वारा की गयी मारपीट भागलपुर विश्वविद्यालय के लिए एक शर्मनाक काले अध्याय के समान है। उस दिन छात्र राजद द्वारा टीएमबीयू को बंद कराने का आह्वान किया गया था।

स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में एम.ए. सेमेस्टर-2 की 10:30 से 11:30 की एक कक्षा  प्रोफेसर बहादुर मिश्र ले चुके थे। दूसरी कक्षा 11:30 से 12:30 में प्रोफेसर दिव्यानंद सर लेने आए। कक्षा की शुरुआत में सर ने हम लोगों से पूछा था कि आप लोगों को घर से आने में परेशानी तो नहीं हुई? फिर सर ने सभी से पूछा कि आप लोग कितनी दूर से विभाग आते हैं? सभी ने अपने अपने घर के बारे में बताया कि कोई सुल्तानगंज, कोई शाहकुंड, कोई अकबरनगर जैसी जगहों से आया है। सर ने कहा कि जब आप लोग इतने कष्ट से आए हैं तो हम लोग कुछ पढ़ाई कर लेते हैं। फिर सर हम लोगों को महादेवी वर्मा के बारे में बताने लगे क्योंकि उस दिन कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्मदिन था।

कुछ देर बाद करीब 12:00 बजे के लगभग 30 की संख्या में छात्र राजद कार्यकर्ता हाथ में झंडा लिए नारा लगाते हुए दिनकर परिसर में आए। चूंकि दिनकर परिसर में सबसे पहला भवन हिंदी विभाग का ही है इसलिए वे लोग हिंदी विभाग आ गए। हम लोगों ने खिड़की से उन्हें आते हुए देखा। सर पढ़ा ही रहे थे कि छात्र राजद दल ने हमारे राधाकृष्ण सहाय व्याख्यान कक्ष का दरवाजा पीटना शुरू कर दिया। सर ने हमें आश्वस्त किया कि मैं बात करता हूं और दरवाजा खोलने गए। दरवाजा जैसे ही खुला, उन लोगों ने सर को कक्षा से खींच लिया। सर कुछ बोल पाते इससे पहले उन लोगों ने सर पर हाथ चला दिया। हम लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्योंकि कक्षा में लड़कियां अधिक थीं और लड़के मात्र चार ही थे। सर को बाहर ले जाकर छात्र राजद दल ने घेर लिया था और उन्हें पीट रहे थे। इसी बीच उनके दल के कुछ लड़के कक्षा में आ गए और हम लोगों को बोलने लगे कि बाहर निकलो। हम लोग नहीं निकले. शोरगुल सुनकर हमारे विभागाध्यक्ष और अन्य लोग जो विभाग में उस समय उपस्थित थे, वहाँ आ गए। विभागाध्यक्ष योगेन्द्र सर के सामने भी छात्र राजद कार्यकर्ताओं ने दिव्यानन्द सर को थप्पड़ मारा।

उन लोगों ने हमारे विभागाध्यक्ष के साथ भी हाथापाई की क्योंकि सर उन्हें  विभाग से बाहर जाने को बोल रहे थे। दिव्यानंद सर ने अभी यहाँ ज्वाइन किया है इसलिए उन्हें यह बात पता नहीं थी कि यहाँ छात्र नेता बात नहीं करते, सीधे मारने लगते हैं। दिव्यानंद सर तो खुद उनके आने की आवाज सुनकर हम लोगों को बोले कि शांति से बात करके मैं उन लोगों को समझाता हूँ, फिर विभागाध्यक्ष से पूछ कर आप लोगों को छुट्टी दी जाएगी।

यहां दिव्यानंद सर के व्यक्तित्व के बारे में हम बताना चाहते हैं कि सर ने हम लोगों को आज तक तुम नहीं कहा है और न ही कभी ऊंचे स्वर में बात की है। यह जो आरोप सर पर लगाए गए हैं, सर ने किसी छात्र नेता को गाली नहीं दी है, न कोई दुर्व्यवहार किया है। इस तरह के आरोप बिल्कुल निराधार हैं। जिन शब्दों का प्रयोग उन लोगों ने हमारे विभाग में किया वही सर पर आरोपित कर दिया गया है। सर पर आरोप लगाने से पहले आप एक बार उनके बारे में जान लीजिए तो सही रहेगा। दिव्यानंद सर और एक मैम जो हमारे विभाग में आई हैं, उनके आने से हम लोगों की पढ़ाई में बहुत वृद्धि हुई है तथा कक्षाएं नियमित हो रही हैं। वे विषय को रटने की बजाय समझने पर जोर देते हैं और लगातार पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। सर के साथ ऐसा होने के कारण हम सभी बहुत दुखी हैं।

ति.मां.भा.वि. के अन्य विभागों की तरह हिंदी विभाग शिक्षकों के अभाव के बावजूद भी शिक्षण व्यवस्था को डगमगाने नहीं देता। यहाँ प्रत्येक सेमेस्टर की रोज न्यूनतम चार कक्षाएँ तो अवश्य ही करवाते हैं। अन्य विभागों में मुश्किल से दो या तीन घण्टे ही पढ़ाई हो पाती है।

शिक्षा की जब हम बात करते हैं तो यह दो प्रकार की होती है पारम्परिक तथा आधुनिक। हमारे विभाग में पढ़ाई पुरातन व्यवस्था से ही हो रही थी लेकिन जब से बी.पी.एस.सी. द्वारा बहाल होकर प्रो.दिव्यानंद एवं प्रो. शुभम् श्री आए हैं, परम्पराओं को आधुनिकता से जोड़ने का प्रयास करते रहे हैं। हमें नवीनता से जोड़ने की कोशिश करते हैं। हम लोगों ने पुरातन व्यवस्था को नवीनता के चश्मे से वर्तमान समय को परखा है।

गत दिनों हमारे विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया गया था जिसमें प्रो.दिव्यानंद एवं प्रो.शुभम् श्री ने हम सभी को जोड़ते हुए सेमिनार को सफल बनाने का काम किया था।

ति.मां.भा.वि.वि.भागलपुर के छात्रों को भी डी.यू., जे.एन.यू., बी.एच.यू. आदि विश्वविद्यालयों के छात्रों की भांति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वाकिफ कराने का सपना इन दोनों प्रोफेसरों के द्वारा ही देखा गया है। अच्छी खासी नौकरी छोड़कर अध्यापन कार्य से जुड़ना ही इनके मजबूत इरादों को प्रदर्शित करता हैं। हमारे युवा शिक्षक के साथ इस तरह का बर्ताव सर्फ उनके लिए नहीं, हम सभी विद्यार्थियों के लिए भी एक मानसिक आघात है।

यह घटना तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के सभी विद्यार्थी और शोधार्थी इस घटना की कड़ी भर्त्सना करते हैं और दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की माँग करते हैं। विश्वविद्यालय परिसर में होली की छुट्टी के पश्चात विरोध प्रदर्शन और तेज होगा।

छात्र-छात्राओं ने सोशल मीडिया पर भी अपील जारी करते हुए कहा है कि जब तक यह माँग पूरी नहीं होगी तब तक यह आंदोलन विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्वक अनवरत चलता रहेगा।

अपील में देश भर के विश्वविद्यालयों के सभी छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों से अनुरोध है कि इस आंदोलन को समर्थन दें!

ति. माँ. भा.वि. के सभी छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों से अनुरोध है कि संवैधानिक तरीके से घटना का शांतिपूर्वक विरोध करें!

यह केवल एक शिक्षक के सम्मान की लड़ाई नहीं हमारी सुरक्षा और स्वाभिमान की लड़ाई भी है। हम हिंसा की इस राजनीति को खारिज करते हैं। प्राचीन विक्रमशिला का गौरव तो हमलोग बहुत गाते हैं लेकिन वर्तमान विश्वविद्यालय गर्त में जाता देख कर भी चुप रहते हैं। यह चुप्पी तोड़िये और कलम के पक्ष में खड़े होइए।

-विद्यार्थी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित

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This post was last modified on April 2, 2021 9:23 am

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